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मां अन्नपूर्णेश्वरी भक्तों में दोनों हाथों से लुटाती हैं खजाना, भगवान शिव ने अन्न-धन के लिए मांगी थी भिक्षा

Sat, 24 Oct 2020 10:48 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Sat, 24 Oct 2020 10:48 PM IST
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Mother Annapurneshwari gives treasures to devotees
मां अन्नपूर्णेश्वरी का भव्य स्वरूप - फोटो : अमर उजाला
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के रेड जोन में स्थित मां अन्नपूर्णा का अनूठा दरबार है। स्वर्णमयी अन्नपूर्णेश्वरी अपने भक्तों पर दोनों हाथों से अन्न और धन की बरसात करती हैं। नवरात्र में अष्टम महागौरी के स्वरूप में विराजने वाली मां अन्नपूर्णा अन्नकूट पर भक्तों को श्री समृद्धि का आशीष भी देती हैं।
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देवाधिदेव महादेव के आंगन में सजे मां अन्नपूर्णेश्वरी के दरबार की प्रतिष्ठा का अंदाजा इससे ही लगा सकते हैं कि इसमें बाबा स्वयं याचक के रूप में खड़े हैं। मान्यता है बाबा अपनी नगरी के पोषण के लिए मां की कृपा पर आश्रित हैं। उपलब्ध इतिहास पर गौर करें तो बाबा विश्वनाथ के यहां वास से पहले ही देवी अन्नपूर्णा विराजमान हो चुकी थीं।
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Mother Annapurneshwari gives treasures to devotees
मां के दर्शन के लिए उमड़े भक्त - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 1775 में जब बाबा विश्वनाथ मंदिर का निर्माण शुरू हुआ तब पार्श्व भाग में देवी अन्नपूर्णा का मंदिर मौजूद था। माता की स्वर्ण प्रतिमा अपने आप में अनूठी है। रजत शिल्प में ढले शिव बाबा की झोली में अन्नदान करती अन्न दात्री की कमलासन पर ठोस सोने की मूर्ति व दायीं ओर मां लक्ष्मी और वाम भाग में भूदेवी की भी स्वर्ण प्रतिमा विराजमान हैं। माता के इस स्वरूप की साल में चार दिन दर्शन उत्सव के दौरान धान का लावे, बताशा संग मां का खजाना वितरण की परंपरा है।

अन्य दिनों में मंदिर गर्भगृह में स्थापित सामान्य प्रतिमा की दैनिक पूजा की जाती है। मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी ने बताया कि मां अन्नपूर्णेश्वरी की स्वर्ण प्रतिमा की प्राचीनता का उल्लेख भीष्म पुराण व अन्य शास्त्रों में है। वर्ष 1601 में तत्कालीन महंत केशव पुरी के समय भी देवी के इस विग्रह के पूजन का प्रमाण उपलब्ध है। मान्यता है कि भगवान शिव ने काशी में अन्न-धन के लिए मां अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी।
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