Chinese Garlic : पूर्वांचल के सबसे बड़े गल्ला मंडी का हाल, हर रोज बिक रहा 20 टन चीन का लहसुन; निगरानी पर सवाल
Varanasi News : चाइनीज लहसुन की बड़े खेप पूर्वांचल में भी खपाई जा रही है। वहीं, जानकार इसे खाने को लेकर मनाही करते हैं। अभी पिछले सप्ताह वाराणसी के पहड़िया मंडी में 63 क्विंटल चीन के लहसुन की खेप को मंडी सचिव की टीम ने पकड़ा था। बावजूद इसके इस लहसुन की खपत जारी है। ऐसे में निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विस्तार
चीन का प्रतिबंधित लहसुन शहर ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में खपाया जा रहा है। विशेश्वरगंज मंडी में रोजाना करीब 20 टन चीन के लहसुन की खपत है। रोजाना चोरी छिपे भारी गाड़ियों से लहसुन की ये खेप मंडी में पहुंच रही है और यहां से अलग-अलग जिलों में भेजी जा रही हैं। नेपाल, गोरखपुर के रास्ते चीन के लहसुन की गाड़ियां विशेश्वरगंज मंडी में पहुंच रही हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के लचर पर्यवेक्षण का फायदा चीन के लहसुन के तस्कर उठा रहे हैं। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और युवाओं से फेरी लगाकर भी चीन के लहसुन की बिक्री कराई जा रही है। इसके एवज में उन्हें अच्छा खासा कमीशन दिया जाता है। हालांकि पिछले हफ्ते पहड़िया मंडी में 63 क्विंटल चीन के लहसुन की खेप को मंडी सचिव की टीम ने पकड़ा था। इसे विशेश्वरगंज मंडी ले जाया जा रहा था।
शहर की विभिन्न मंडियों में देसी लहसुन की कीमत इस समय 320 से 360 रुपये किलो है। वहीं, चीन के लहसुन की कीमत 180 से 240 रुपये तक है। सस्ता होने के कारण चीन के लहसुन की मांग मंडी में ज्यादा है। यही कारण है कि प्रतिबंध होने के बावजूद मंडियों में चोरी छिपे इसकी बिक्री हो रही है। शहर की काॅलोनियों और वार्ड में ठेले और साइकिल पर भी फेरे लगाकर चीन के लहसुन बेचे जा रहे हैं।
लहरतारा के बेदौली, कोटवा, लोहता, रोहनिया, मंडुवाडीह और सामनेघाट क्षेत्रों में महिलाएं भी फेरी लगाकर चीन के लहसुन की बिक्री कर रही हैं। विशेश्वरगंज के कुछ व्यापारियों ने बताया कि चीन के लहसुन बिक्री के लिए कमीशन के तौर पर युवाओं और महिलाओं को लगाया गया है। कुछ बड़े व्यापारी एक से दो ट्रक माल रोजाना मंगवा रहे हैं। वह छोटे वाहनों या फिर ट्रांसपोर्ट के जरिये चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, जौनपुर, गाजीपुर आदि जिलों में भेजते हैं। तकरीबन 20 टन माल की रोजाना खपत है।
किडनी, लिवर से लेकर नसों को नुकसान पहुंचाता है
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. पीके सिंह ने बताया कि चीन के लहसुन के सेवन से लिवर, किडनी और नसों को नुकसान होता है। वहीं, आंखों की रोशनी भी प्रभावित होती है। पेट में दर्द, सूजन और गैस्ट्राइटिस जैसी बीमारी होती है। इसमें मेटाइल ब्रोमाइड नामक जहरीला केमिकल भी होता है। इसमें सिंथेटिक पदार्थों का उपयोग किया जाता है।
जुर्माने तक कार्रवाई, असली मालिक नहीं पकड़ में आए
छह दिन पहले पहड़िया मंडी सचिव विपुल कुमार ने गोलगड्डा में छापा मारकर 63 क्विंटल प्रतिबंधित चीन के लहसुन की खेप पकड़ी थी। चालक किसी तरह का कोई कागजात नहीं दिखा सका। कानपुर निवासी अखिलेश कुमार ने बताया कि मोतिहारी बिहार से लहसुन लोड हुआ था। कौन लोड कराया, किसे अनलोड करना था, यह सब रहस्य ही बना हुआ है।
इसके पूर्व अक्तूबर माह में भी विशेश्वरगंज मंडी से एक गाड़ी चीन के लहसुन की खेप पकड़ी थी। सितंबर माह में खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन की ओर से धर पकड़ के लिए तीन टीमें गठित हुई थी। चीन के लहसुन की तस्करी बिहार और नेपाल के रास्ते हो रही है। नेपाल के सुनौली बाॅर्डर के रास्ते इसे लेकर गाड़ियां उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर रही हैं।
बोले अधिकारी
गोलगड्डा से बरामद चीन के लहसुन का सैंपल लखनऊ स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। उसकी जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। टीमें लगातार जांच अभियान चला रही हैं। - कौशलेंद्र सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन