काशी में मोरारी बापू: मानस मर्मज्ञ बोले- तुलसी ने एक रामचरितमानस की रचना की और रामचरितमानस ने कई तुलसी की
मानसरत्न डॉ. श्रीनाथ मिश्र के जन्म शताब्दी महोत्सव के शुभारंभ पर संत समागम में संत रमेश भाई ओझा ने कहा कि आज कथा को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है, लेकिन श्रीनाथ जी की कथाएं भीतर से भाव जगाती हैं। मोरारी बापू ने कहा कि तुलसी ने एक रामचरितमानस की रचना की और रामचरितमानस ने कई तुलसी पैदा किए।
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प्रख्यात मानस मर्मज्ञ संत मोरारी बापू ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीगुरु चरण सरोज रज... का संदेश दिया। इसका जो पालन करेगा, उसे भगवत रत्न की प्राप्ति होगी। जीवन का अर्थ परमार्थ है। काम कामना नहीं, बल्कि जिसने रामनाम का जप किया, उन पर उनकी कृपा बरसी। जो राम का नाम ले और राम का काम न करे तो भगवान उसे स्वीकर नहीं करेंगे।
मानसरत्न श्रीनाथ जी फाउंडेशन की ओर से ब्रह्मलीन मानसरत्न डॉ. श्रीनाथ मिश्र के जन्म शताब्दी महोत्सव के शुभारंभ पर बृहस्पतिवार अस्सी स्थित गोयनका संस्कृत विद्यालय परिसर में संत समागम में उन्होंने कहा कि धर्म का मौलिक रस कथा है। अर्थ द्रवीभूत होता है। अर्थ रूपी रस मुक्ति का रस है। मुक्ति का रस पुनर्जन्म है। इसलिए जन्म को राम रति माना गया है। परमात्मा का मिलना चारों फल देता है।
मोरारी बापू ने कहा कि तुलसी ने एक रामचरितमानस की रचना की, लेकिन रामचरितमानस ने कई तुलसी की रचना की। रामचरितमानस बड़ा रत्नाकर है। सभी ऋषि मुनि ने समुद्र मंथन किया। उन्होंने श्रीनाथ जी के मानस चेतना को नमन करते हुए कहा कि उनके साथ उनका परिवार भी वंदनीय है, जो परंपरा निर्वाहन कर रहा है। उन्होंने किसी भी परंपरा का पवित्र और प्रवाहित होना जरूरी जरूरी बताया।
रमेश भाई ओझा ने कहा कि श्रीनाथ जी ब्रह्मलीन होते हुए भी सशरीर जुड़े हैं। उनका व्यक्तित्व, चरित्र हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी कथा करने की शैली नित नवीन जिज्ञासा प्रदान करता था। आज कथाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है। जबकि श्रीनाथ जी की कथाएं अंदर से भाव जगाती हैं।
मैं जब भी काशी आता हूं, उनकी कथा जरूर सुनता था और उस दिव्य चेतना को प्रणाम करता था।उन्होंने कहा कि श्रीनाथ जी ने यशोदा भाव से मानस का मंथन कर श्रीरामकथा का नवनीत निकालकर श्रोता रूपी कृष्ण को प्रदान किया। जैसे मां गंगा का प्रवाहमान जल हमेशा नया होता है, वैसे ही उनके श्रीमुख से निकलने वाली श्रीरामकथा प्रतिपल नवीन संवेदनाओं से प्रदान करती थी। मैं भाग्यशाली हूं कि उनकी कथा सुनी है।
संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि काशी में जल्दी किसी का सम्मान नहीं होता है। आप किसी से कहें मैं फलां तोप हूं तो उत्तर में यही सुनने को मिलेगा कि तोप होंगे अपने घर के, हमसे क्या मतलब। सब यही मानते हैं कि हनुमान जी का नाम ले लेंगे तो भूत-प्रेत निकट नहीं आएंगे, लेकिन इस काशी में एक प्रेत ने ही गोस्वामी तुलसीदास को हनुमान जी के दर्शन करा दिए।
मानसवक्ता पं. भारतभूषण पांडेय कहा कि हमारे आसपास की वस्तुएं सफाई के लिए कोई उपकरण होता है। वैसे ही मानव मन की सफाई के लिए श्रीरामचरितमानस से श्रेष्ठ कोई उपकरण नहीं है। पं. श्रीनाथ मिश्र ने इस उपकरण से सर्व समाज का कल्याण किया।
जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा ने कहा कि यह हम सब सौभाग्यशाली है कि हम उनकी जन्मशताब्दी में शामिल होकर उनके जीवन दर्शन को जानने और सुनने को मौका मिला। वृंदावन के कथाव्यास पं. मनोज मोहन शास्त्री, बरेली के स्वामी मैथिल शरण आदि संतों ने विचार रखे। रामनाम अवलंबन एकू नाम से लघु फिल्म प्रदर्शित किया गया। दिल्ली से आए उपहार ग्रुप कंपनी के कलाकारों ने कथक पेश से देवों की महिमा का गान किया।
आज अखंड पाठ, कल से भागवत कथा
जन्मशताब्दी महोत्सव के क्रम में शुक्रवार को शिवाला स्थित उनके निवास स्थान श्रीनिकेतन में अखंड मानस पाठ शुरू होगा। पं. आशीष बृजेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि 27 सितंबर से तीन अक्तूबर तक श्रीमदभागवत कथा होगी। कथा व्यास डॉ. भारतभूषण पांडेय होंगे। जो प्रतिदिन शाम चार से सात बजे तक चलेगी।