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कार्तिक मास : धनवर्षा से सूर्यदेव की आराधना तक, पूरे महीने भर पड़ रहे हैं 15 व्रत व त्योहार; जान लें खास महत्व

Sun, 25 Oct 2026 11:28 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 25 Oct 2026 11:28 AM IST
सार

कार्तिक मास में इस बार पूरे महीने 15 व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं। धनतेरस से लेकर दीपावली और सूर्यदेव की आराधना के महापर्व छठ तक धार्मिक आयोजनों की धूम रहेगी। छह नवंबर को धनतेरस, आठ नवंबर को दीपावली और 12 नवंबर से छठ व्रत शुरू होगा। श्रद्धालु पूरे महीने पूजा-पाठ और व्रतों में लीन रहेंगे।

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Month Kartik rituals prosperity worship Sun God 15 fasts and festivals fall throughout special significance
हिंदू धर्म में कार्तिक माह का विशेष महत्व होता है। - फोटो : adobe

विस्तार

भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को समर्पित कार्तिक मास 27 अक्तूबर से शुरू होगा। इसमें धनवर्षा से लेकर सूर्यदेव की आराधना तक के व्रत व त्योहार पड़ेंगे। धनतेरस छह नवंबर को तो दीपावली आठ नवंबर को मनाई जाएगी। वहीं, 24 नवंबर को काशी में देवों की दीपावली भी मनाई जाएगी। देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु देवों के इस उत्सव में शामिल होंगे। महीने भर 15 से ज्यादा व्रत और त्योहार पड़ेंगे।

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पौराणिक मान्यता है कि कार्तिक मास को द्वादश मास में सर्वश्रेष्ठ मास माना गया है। इसे पावन मास की उपाधि दी गई है। इस मास में स्नान-दान, पूजा-अर्चना की विशेष महिमा है। शरद पूर्णिमा से ही भगवती श्रीलक्ष्मी की आराधना के साथ ही दीपदान वधार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं। कार्तिक मास में ही शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी तिथि को श्रीहरि विष्णु जागृत होंगे। कार्तिक मास के धार्मिक यम, नियम, व्रत व संयम आदि 27 अक्तूबर से शुरू हो जाएंगे।

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खास है महत्व

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष व प्रख्यात ज्योतिषविद प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि इसी मास को कार्तिकेय का मास भी कहा जाता है। चातुर्मास का समापन भी भगवान श्रीहरि विष्णु का जागृत हो जाते हैं और सभी धार्मिक कार्यों की स्वीकृति देते हैं। 

शास्त्रों में इस मास को ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाला कहा गया है। कार्तिक में तुलसी व पीपल वृक्ष की पूजा, यमदेव को प्रसन्न करने के लिए आकाशदीप जलाने, एक माह तक आंवले के वृक्ष को सींचना और इसकी पूजा करना फलदायी माना गया है। व्रत रखकर गंगा स्नान कर दान करने से तीर्थयात्रा के समान फल की प्राप्ति होती है। इस मास में मठा, साग और दाल का सेवन निषेध है।

मिट्टी का जलाएं दीप, जीवन में आएगी रोशनी : कार्तिक मास भर रोज मिट्टी का दीपक जलाएं। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि एक दीपक प्रतिदिन मंदिर में शिवलिंग व नारायण के समक्ष या घर में जलाएं। तुलसी, पीपल व वटवृक्ष के पौधे के समक्ष दीप जलाएं। संभव हो तो प्रतिदिन आकाशदीप जलाएं।

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ये हैं कार्तिक मास में पड़ने वाले व्रत और त्योहार
करवा चौथ - 29 अक्तूबर, अहोई अष्टमी - एक नवंबर, दो नवंबर को राधा अष्टमी व्रत, पांच को रम्भा एकादशी व गोबतसर द्वादशी व्रत, छह को धनतेरस और धन्वंतरि जयंती, सात को नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) व हनुमान जयंती, आठ को दीपावली, नौ को अमावस्या व गोवर्धन पूजा (अन्नकूट), 10 को भैया दूज (यम द्वितीया), 12 को छठ पूजा (नहाय-खाय से उदयमान अर्घ्य तक), 13 से 16 नवंबर तक (15 नवंबर को संध्या अर्घ्य) छठ पूजा, 17 को गोपाष्टमी, 18 को अक्षय नवमी, 20 को देवउठनी एकादशी/तुलसी विवाह, 22 को प्रदोष त्रयोदशी व्रत, 23 को बैकुंठ चतुर्दशी, 24 को कार्तिक पूर्णिमा/देव दीपावली होगी।

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