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सेंसर से निगरानी, शहर में पानी की समस्याओं का होगा समाधान

Sat, 20 Mar 2021 01:43 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 20 Mar 2021 01:43 AM IST
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Monitoring with sensors, solution to water problems in the city
अबकी बार गर्मी में जनता को समय से पानी मिलेगा। जलकल ने सेंसर से संचालित होने वाले ट्यूबवेल से आपूर्ति शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में सेंसर से लीकेज का भी पता चलेगा। इससे जलकल को पता चल जाएगा कि किस इलाके में पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और क्या दिक्कत आ रही है।
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पहले चरण में 148 ट्यूबवेल में सेंसर लगा है। ट्यूबवेल में डेफ्थ सेंसर, फ्लो मीटर, एनर्जी एफिशिएंट पंप, मोटर आदि लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा ओवरहेड और अन्य स्टोरेज टैंकों में सेंसर लगाए जाएंगे। चौदहवें वित्त की धनराशि पांच करोड़ रुपये से आगामी छह माह में शहर की जलापूर्ति हाईटेक होगी।
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शहर में पेयजल व्यवस्था को ऑटोमैटिक (स्वचालित) बनाने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। जल संस्थान के 148 ट्यूबवेल और एक पंपिंग स्टेशन पूरी तरह स्वचालित बनाए जा रहे हैं। पेयजल व्यवस्था की चौकाघाट स्थित कंट्रोल रूम से ऑनलाइन मॉनीटरिंग भी संभव होगी। पानी में क्लोरीन की मात्रा भी कंट्रोल रूम से नियंत्रित होगी। टंकी से पानी नहीं आ रहा है, पानी बहुत कम आ रहा है, पानी का प्रेशर कम है, इसलिए दूसरी और तीसरी मंजिल पर नहीं चढ़ रहा है, पाइप लाइन लीक है। पानी दूषित है, पीने लायक बिल्कुल नहीं है, पानी में बदबू आ रही है। अब इन सवालों के जवाब कंट्रोल रूम से मिलेंगे।
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टंकी में पानी भरने के बाद सेंसर से पता चलेगा कितना पानी भर गया है। उसके बाद वहां से पानी आपूर्ति होने पर उसकी धारा की तीव्रता, पानी की मात्रा, पानी की गुणवत्ता का पूरा लेखा-जोखा होगा। टंकी से पानी की कहां कितनी आपूर्ति हुई, यह भी पता चलेगा। इसके लिए ट्यूबवेल में ही पूरा कंट्रोल पैनल, फ्लो मीटर, फ्लो रीडिंग मीटर, लेवल सेंसर, प्रेशर सेंसर, ऑटोमैटिक वाल्व सिस्टम लगाया जा रहा है। इन सभी डिजिटल उपकरणों को ऑनलाइन जोड़ा जाएगा। इसकी निगरानी कंट्रोल से होगी।
खोदाई से टूटी लाइन का भी पता चलेगा
अक्सर जेसीबी से खोदाई के कारण पानी की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो जाया करती है, लेकिन समस्या तब बढ़ जाती है, जब पाइप लाइन टूटने के बाद सीवर लाइन में मिल जाती है और उसे मालूम करने में जलकल विभाग के इंजीनियरों एवं कर्मचारियों को कई रोज लग जाते हैं। इससे लोगों को पेयजल संकट और प्रदूषित जलापूर्ति की समस्या से दो-चार होना पड़ता है।
ऐसे काम करेगा सेंसर
आधुनिक सेंसर : ये सेंसर ओवरहेड व अन्य स्टोरेज टैंक पर लगाए जाएंगे। इससे एक सीमा तक पानी भर जाने के बाद सेंसर की मदद से आपूर्ति बंद हो जाएगी। इससे ओवरफ्लो के रूप में पानी की बर्बादी नहीं होगी। ये सेंसर पेयजल लाइन के वॉल्व पर भी लगे होंगे। इससे इनका संचालन स्वत: होगा और किसी भी कर्मचारी को फील्ड में जाकर वॉल्व नहीं घुमाने पड़ेंगे।
डेफ्थ सेंसर: इनकी मदद से यह पता लग पाएगा कि संबंधित ट्यूबवेल का जलस्तर कितना है। उसका कितना दोहन हो रहा है। इनकी मदद से ट्यूबवेल से पानी की निकासी को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।

लाइन लोकेटर : लाइन लोकेटर जीआई, सीआई और पीवीसी लाइन एवं केबिल को चिह्नित करने में कारगर है। इससे यह भी पता चलेगा कि केबिल में करंट है या नहीं।
फ्लोमीटर : फ्लोमीटर से प्रति घंटे पानी डिस्चार्ज की क्षमता का पता चल सकेगा।
लीक डिटेक्टर : लीक डिटेक्टर कंप्यूटराइज्ड है। इससे किसी लाइन में लीकेज सेंसर के माध्यम से कंप्यूटर के स्क्रीन पर दिखने लगेगा।
पेयजल की पूरी निगरानी का तंत्र विकसित होगा। कंट्रोल रूम से पूरे शहर की पानी की आपूर्ति पर नजर रखी जाएगी। कहीं भी खराबी की सूचना अविलंब मिलेगी। इससे उसको तत्काल दुरुस्त किया जा सकेगा। नलकूपों को संचालित करने में मनमानी नहीं हो पाएगी। पेयजल आपूर्ति का समय दुरुस्त होगा।
- रघुवेंद्र कुमार, महाप्रबंधक जलकल
ऐसे होगी निगरानी
- कंट्रोल पैनल : नलकूप में लगने वाले इस पैनल से पूरा सिस्टम कंट्रोल होगा।
- फ्लो मीटर : इससे नलकूप से निकलने वाले पानी और आपूर्ति हुए पानी की मात्रा नापी जाएगी।
- फ्लो रीडिंग मीटर : फ्लो मीटर की रीडिंग का डिजिटली रिकार्ड करने का उपकरण।
- लेवल सेंसर : यह भूजल का स्तर बताएगा। इससे भविष्य की पेयजल योजना बनती रहेगी।
- प्रेशर सेंसर : इससे पाइप लाइन का पूरा प्रेशर नाप कर उसको दुरुस्त रखा जाएगा।
- आटोमैटिक वाल्व : इससे नलकूप को मानवरहित बना कर भी उसका संचालन किया जा सकेगा। इसके माध्यम से नलकूप का पूरा सिस्टम जुड़ा रहेगा।
एक नजर में शहर की पानी आपूर्ति
अंग्रेजों के जमाने में बिछाई गई पाइप लाइन से आज भी पेयजल की सप्लाई होती है।
- 1827 में जेम्स प्रिंसेप ने शहर में पानी और सीवर पाइप लाइन बिछवाई थी।
-2 लाख के अधिक कनेक्शन हैं शहर में
- 535 मीटर लंबी पेयजल पाइप लाइन बिछाई गई थी ब्रिटिश शासन काल में बनारस में।
- 296 मिलियन लीटर पानी की मांग है प्रतिदिन शहर में।
- 250 मिलियन लीटर हो रही आपूर्ति रोजाना
- 46 मिलियन लीटर पानी आपूर्ति के दौरान पाइप लाइन ध्वस्त होने के चलते होता है बर्बाद
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