Varanasi News: राज्य मुख्यालय की तीसरी आंख से होगी वाराणसी के अस्पतालों की निगरानी
सरकारी अस्पतालों में आए दिन चिकित्सकों, कर्मचारियों की लेटलतीफी की वजह से मरीजों को परेशान होना पड़ता है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने पिछले दिनों बनारस में दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल के साथ ही अन्य जिलों का दौरा कर कई खामियां पकड़ी थी।
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अव्यवस्थाओं और लापरवाही के चलते हर कदम पर मिलने वाले मरीजों की दर्द पर मरहम लगाने के लिए अब अस्पतालों की राज्य मुख्यालय की तीसरी आंख से निगरानी होगी। शासन की इस पहल से जहां ओपीडी, वार्ड में चिकित्सकों, कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित होगी, वहीं इसका लाभ मरीजों को मिलेगा।
खास बात यह है कि सरकारी अस्पतालों में पहले से लगे क्लोज सर्किट कैमरों को दुरुस्त करने के साथ इनकी संख्या भी बढ़ाई जाएगी। जिले के सरकारी अस्पतालों में हर दिन हजारों मरीज बेहतर इलाज के लिए आते हैं। मरीजों की सुविधा को देखते हुए ही शासन, प्रशासन की ओर से समय से सभी चिकित्सकों के ओपीडी में बैठने और बाहर की दवा न लिखने की हिदायत दी जाती है, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने पकड़ी थी कई खामियां
आए दिन चिकित्सकों, कर्मचारियों की लेटलतीफी की वजह से मरीजों को परेशान होना पड़ता है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने पिछले दिनों बनारस में दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल के साथ ही अन्य जिलों का दौरा कर कई खामियां पकड़ी थी।
इसके बाद व्यवस्था सुधार के उद्देश्य से शासन ने ओपीडी हाल, दवा वितरण काउंटर पर भी सीसीटीवी कैमरा लगाने और उसको राज्य मुख्यालय के कंट्रोल रूम से जोड़ने का निर्णय लिया है, जिससे कि हर एक गतिविधि पर बारीकियों से नजर रखी जा सके।
सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के आदेश के बाद अस्पतालों के सीएमएस, एसआईसी से नए सिरे से कैमरे को दिखवा लेने और ओपीडी हॉल, दवा वितरण काउंटर आदि जगहों पर भी तत्काल कैमरा लगवाने और फुटेज देखने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
जिले के सरकारी अस्पताल
- -दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल
- -लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल रामनगर
- -शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा
- -जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा
- शहरी पीएचसी 29
- शहरी सीएचसी 5
- ग्रामीण पीएचसी 28
- ग्रामीण सीएचसी 9
अब तक जिला स्तर पर भी ठोस व्यवस्था नहीं
अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी के लिए राज्य मुख्यालय के कंट्रोल रूम से जोड़ने का निर्णय तो लिया गया है लेकिन हकीकत यह है कि स्थानीय स्तर पर भी जिला स्तर पर निगरानी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। अब तक अस्पतालों में केवल सीएमएस, एसआईसी के कक्ष में ही स्क्रीन लगी है, जिससे कि संबंधित अधिकारी देखते रहते हैं। ऐसे में राज्य मुख्यालय से जुड़ने के बाद कुछ हद तक व्यवस्था में सुधार हो सकता है।
स्वास्थ्य केंद्रों की मॉनिटरिंग रामभरोसे
सरकारी अस्पतालों में तो सीसीटीवी कैमरे को राज्य मुख्यालय से जोड़कर मॉनिटरिंग कराने की तैयारी तो चल रही है लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों की मॉनिटरिंग राम भरोसे चल रही है। अब भी जिले के कई स्वास्थ्य केंद्रों पर केवल मेन गेट से लेकर इमरजेंसी तक ही कै मरे लगे हैं, यहां भी ओपीडी, वार्ड से लेकर अन्य जगहों पर कैमरे लगाकर इसकी मानीटरिंग भी सही तरीके से होेगी तो व्यवस्था सुधर जाएगी।