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अलम ताबूत की जियारत करके निभाई परंपरा
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कोरोना संक्रमण के कारण चौथी मुहर्रम पर भी केवल रवायत निभाई गई। हर साल की तरह उठने वाले शहर के तीनों जुलूस स्थगित रहे। परंपरा को निभाते हुए मजलिस और अलम ताबूत की जियारत हुई। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी सैयद फरमान हैदर ने बताया कि हर साल चार मोहर्रम को शहर में तीन जुलूस उठाया जाता था।
पहला जुलूस इम्तियाज हुसैन के चौहट्टा लाल खां स्थित निवास से अंजुमन आबिदिया की जेरे इंतजाम उठाया जाता था लेकिन उनके निवास पर ही नौहा मातम के बाद लोगों ने ताबूत की जियारत की। वहीं दूसरा जुलूस शिवाला कर्मतीला स्थित हाजी आलिम हुसैन रिजवी के निवास से ताजिये को उठाया जाता था जो अंजुमन गुल्जारिया अब्बासिया और कासिमिया अब्बासिया के नौहा मातम के साथ गौरीगंज के वरिष्ठ पत्रकार कासिम रिजवी के इमामबाड़े पर जाकर समाप्त होता था। यह जुलूस भी शिवाले में ही नौहा मातम और ताजिये की इबारत के बाद समाप्त हुआ।
अंतिम जुलूस रात नौ बजे चौहट्टा लाल खां के इमामबाड़े से अंजुमन आबिदिया के जेरे इंतजाम उठाया जाता था। यहां पर चौहट्टा लाल खां इमामबाड़े में ही मजलिस हुई। हाजी फरमान हैदर ने बताया कि चौथी मुहर्रम को ही इमाम हुसैन के खेमे को दरिया किनारे से हटाया था और इमाम हुसैन का कातिल शिम्र अपने लश्कर के साथ कर्बला पहुंचा था।
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पहला जुलूस इम्तियाज हुसैन के चौहट्टा लाल खां स्थित निवास से अंजुमन आबिदिया की जेरे इंतजाम उठाया जाता था लेकिन उनके निवास पर ही नौहा मातम के बाद लोगों ने ताबूत की जियारत की। वहीं दूसरा जुलूस शिवाला कर्मतीला स्थित हाजी आलिम हुसैन रिजवी के निवास से ताजिये को उठाया जाता था जो अंजुमन गुल्जारिया अब्बासिया और कासिमिया अब्बासिया के नौहा मातम के साथ गौरीगंज के वरिष्ठ पत्रकार कासिम रिजवी के इमामबाड़े पर जाकर समाप्त होता था। यह जुलूस भी शिवाले में ही नौहा मातम और ताजिये की इबारत के बाद समाप्त हुआ।
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अंतिम जुलूस रात नौ बजे चौहट्टा लाल खां के इमामबाड़े से अंजुमन आबिदिया के जेरे इंतजाम उठाया जाता था। यहां पर चौहट्टा लाल खां इमामबाड़े में ही मजलिस हुई। हाजी फरमान हैदर ने बताया कि चौथी मुहर्रम को ही इमाम हुसैन के खेमे को दरिया किनारे से हटाया था और इमाम हुसैन का कातिल शिम्र अपने लश्कर के साथ कर्बला पहुंचा था।
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