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केंद्र और राज्य की खींचतान में फंसा मॉडल स्कूल प्रोजेक्ट
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Wed, 10 Jun 2015 02:16 AM IST
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वाराणसी। केंद्र और प्रदेश सरकार की खींचतान के चलते मॉडल स्कूल का प्रोजेक्ट लटक गया है। प्रदेश में 191 मॉडल स्कूलों के भवन बनकर तैयार हैं लेकिन न तो छात्र-छात्राओं का दाखिला हुआ और न पढ़ाई शुरू हो सकी। केंद्र ने करोड़ों रुपये खर्च कर भूमि और भवन तो खड़ा कर दिया लेकिन अब स्कूलों के संसाधन और संचालन के लिए धन देने से इंकार कर दिया है। इधर, राज्य सरकार ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं, जिससे शिक्षकों की नियुक्ति और फर्नीचर की टेंडर की प्रक्रिया लटक गई है। ऐसे में ग्रामीण विद्यार्थियों के अच्छी पढ़ाई के ख्वाब अभी पूरे होते नहीं दिख रहे।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को माध्यमिक स्तर की अच्छी शिक्षा देने के उद्देश्य से प्रदेश में मॉडल स्कूल योजना शुरू की थी। इन स्कूलों में पढ़ाई तो सीबीएसई बोर्ड से होनी है लेकिन उसका माध्यम हिंदी होगा। मॉडल स्कूलों के संचालन और संसाधन पर आने वाले खर्च की 75 फीसदी धनराशि केंद्र को और 25 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार को
देनी है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र ने यह कहकर धनराशि देने से इंकार कि इस योजना में राज्यांश बढ़ा दिया गया है। इसलिए प्रदेश सरकार अपने संसाधनों से इनका संचालन करे। वहीं, प्रदेश सरकार केंद्र से 75 प्रतिशत धनराशि मांग रही है। इस खींचतान में यह योजना लटक गई है। जिले में आराजीलाइन
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ब्लाक के जक्खिनी में पांच करोड़ की लागत से पांच एकड़ में भवन बनकर तैयार है। एक अप्रैल से सत्र शुरू होने के बाद भी यहां दाखिले नहीं हुए। अब यदि दोनों सरकारों के बीच आपसी सहमति बन भी गई तो भी पढ़ाई अगले सत्र से ही शुरू हो पाएगी।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को माध्यमिक स्तर की अच्छी शिक्षा देने के उद्देश्य से प्रदेश में मॉडल स्कूल योजना शुरू की थी। इन स्कूलों में पढ़ाई तो सीबीएसई बोर्ड से होनी है लेकिन उसका माध्यम हिंदी होगा। मॉडल स्कूलों के संचालन और संसाधन पर आने वाले खर्च की 75 फीसदी धनराशि केंद्र को और 25 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार को
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देनी है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र ने यह कहकर धनराशि देने से इंकार कि इस योजना में राज्यांश बढ़ा दिया गया है। इसलिए प्रदेश सरकार अपने संसाधनों से इनका संचालन करे। वहीं, प्रदेश सरकार केंद्र से 75 प्रतिशत धनराशि मांग रही है। इस खींचतान में यह योजना लटक गई है। जिले में आराजीलाइन
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ब्लाक के जक्खिनी में पांच करोड़ की लागत से पांच एकड़ में भवन बनकर तैयार है। एक अप्रैल से सत्र शुरू होने के बाद भी यहां दाखिले नहीं हुए। अब यदि दोनों सरकारों के बीच आपसी सहमति बन भी गई तो भी पढ़ाई अगले सत्र से ही शुरू हो पाएगी।