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गवाह है आंकड़ेः गैरों से दोस्ती और अपनों से दूरी बढ़ा रहा ‘मोबाइल’

Thu, 03 Aug 2017 03:17 PM IST
amarujala.com, written by- पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी
amarujala.com, written by- पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी Updated Thu, 03 Aug 2017 03:17 PM IST
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mobile is a cause of Increasing distance from family and friendship with unknown
पढ़ाई के लिए डांट-फटकार और घर का हिंसक माहौल भी बच्चों के भागने की अहम वजह - फोटो : demo
सूचना तकनीक के इस दौर में आम आदमी के जीवन का जरूरी हिस्सा बन चुका मोबाइल किशोरों के भटकाव का जरिया भी बन रहा है। मोबाइल फोन किशोरों की अपनों से दूरियां तो गैरों से दोस्ती बढ़ा रहा है।
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बीते छह महीने में बनारस बाल कल्याण समिति के पास घर से भागीं 50 किशोरियां पहुंची। समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के अनुसार उनकी काउंसलिंग की गई तो सामने आया कि इनमें 80 फीसदी किशोरियों ने मोबाइल से बातचीत के दौरान सपनों की दुनिया सजा सजा कर ऐसे राह पर चल पड़ीं, जहां सिर्फ धोखा और भटकाव के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ।
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पुलिस और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से जनवरी से जून तक बाल कल्याण समिति के पास 527 किशोरवय पहुंचाए गए। इनमें 477 किशोर और 50 किशोरियां थीं। इनमें से 470 को उनके परिवार से मिलवा दिया गया।

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वहीं, अन्य को गैर सरकारी संस्थाओं के आश्रय गृहों में रखा गया है। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मनोज मिश्र ने बताया कि जो घर से भागे या भटके हुए बच्चे होते हैं औसतन उनकी उम्र आठ से 12 वर्ष के बीच होती है।

 

इनके घर छोड़कर जाने की अहम वजह पढ़ाई को लेकर डांट-फटकार, घुमक्कड़ी प्रवृत्ति का होना, घर का हिंसक माहौल या अभिभावक का नशेड़ी होना होती है।

वहीं, जो किशोरियां आती हैं औसतन उनकी उम्र 14 से 16 वर्ष के बीच होती है। इनमें ज्यादातर किशोरियों के घर से भागने की अहम वजह मोबाइल फोन पर शुरू हुई बातचीत के बाद अनजाने पर भरोसा करना है। 
 

88 बाल श्रमिक मुक्त कराए मगर तस्करों का पता नहीं

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बाल मजदूर - फोटो : demo pic
वाराणसी जिले भर में अभियान चलाकर बीते छह महीने में 88 बाल श्रमिक मुक्त कराकर उनके परिवार वालों को सुपुर्द किए गए। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने बताया कि इनमें से 90 फीसदी बच्चे बिहार के थे।

इन्हें पंजाब व गुजरात ले जाने के दौरान पकड़ा गया। बताया कि बच्चे तो मुक्त करा लिए जाते हैं लेकिन तस्करों का पता नहीं लग पाता है। जरूरी है कि पुलिस ऐसे तस्करों के खिलाफ भी अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई करे।
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