बसपा से निलंबन पर बोलीं विधायक वंदना सिंह, मैं बेकसूर, सपा में शामिल होने को लेकर भी दिया बयान
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अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के मामले में बड़े और कड़े फैसले लेने के लिए चर्चित बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने गुरुवार को फिर बड़ा एक्शन लिया है। राज्यसभा सदस्य चुनाव में पार्टी विरोधी कार्यों पर उन्होंने सात विधायकों को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही इन सभी की विधानसभा से सदस्यता समाप्त करने की कार्यवाही भी की जा रही है।
सात विधायकों में आजमगढ़ जिले के सगड़ी विधानसभा से बसपा विधायक वंदना सिंह भी शामिल हैं। हालांकि उन्होंने अपने आप को बेकसूर बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी के हित के लिए कार्य किया है। उनकी आस्था अब भी बसपा के साथ है।
सगड़ी विधायक वंदना सिंह को बसपा से निलंबित किए जाने पर चर्चाओं का बाजार गरम है। विधायक वंदना सिंह ने इसे सरासर गलत बताया है। कार्रवाई से बसपा समर्थको में हड़कंप मचा हुआ है। विधायक वंदना सिंह ने बताया कि मुझे क्यों निकाला गया, मुझे समझ में नहीं आ रहा है। मैं अपने आवास पर हूं।
बसपा के बड़े नेताओं से भी बात हो रही थी। वहीं, बुधवार रात उन्होंने सपा में शामिल होने की बातों से इंकार किया था। एक न्यूज चैनल पर इस तरीके की अफवाह फैलाने का ठीकरा फोड़ा था। उनके प्रतिनिधि संतोष सिंह उर्फ टीपू ने भी इसे अफवाह बताया था।
कई बार उड़ी थी सपा में जाने की अफवाहें
मार्च 2017 के विधानसभा चुनाव में वंदना सिंह ने सगड़ी विधानसभा से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। सपा के प्रत्याशी जयराम सिंह पटेल को हराकर विधायक चुनी गईं। पिछले एक साल से उनकी सपा में जाने की अफवाहें कई बार उड़ चुकी है। बार-बार उनकी सपा से नजदीकियों की चर्चाएं हो रही थी, लेकिन विधायक वंदना सिंह ने इनको सिरे से खारिज करती रहीं।
विधायक वंदना सिंह के पति सर्वेश सिंह उर्फ सीपू वर्ष 2007 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़े और बसपा के मलिक मसूद को हराकर विधायक चुने गए थे। वर्ष 2010 में उन्होंने बसपा ज्वाइन कर ली। 2012 का विधानसभा चुनाव बसपा के टिकट पर सर्वेश सिंह लड़े। सपा प्रत्याशी दुर्गा प्रसाद से हार गए। उनके भाई संतोष सिंह उर्फ टीपू सिंह सगड़ी विधानसभा से बसपा के टिकट पर लड़े और सपा प्रत्याशी अभय नारायण पटेल से हार गए।
19 जुलाई 2013 को पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू की उनके आवास के सामने बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसमें कुख्यात ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू सिंह सहित कई लोग आरोपी बनाए गए हैं। वंदना सिंह के ससुर रामप्यारे सिंह वर्ष 1996 में सपा के टिकट से सगड़ी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और बसपा के बरखूराम वर्मा को हराकर विधायक चुने गए थे।
वर्ष 2002 का विधानसभा चुनाव सपा के टिकट पर लड़े। बसपा के प्रत्याशी मलिक मसूद से 540 वोटों से हार गए। वर्ष 2003 में बसपा की सरकार गिर गई तो समाजवादी पार्टी से वर्ष 2003 में एमएलसी चुने गए। रामप्यारे सिंह को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था।