नाश्ता नदारद, खाना आधा पेट
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शरणार्थियों का आरोप है कि एक परिवार में पांच लोग हैं तो केवल तीन को भोजन का पैकेट दिया जा रहा है। आधा पेट खाकर किसी तरह वे गुजारा कर रहे हैं। न यहां कोई अधिकारी आता है न जनप्रतिनिधि। अपनी फरियाद सुनाएं भी तो किससे।
प्राथमिक पाठशाला ढेलवरिया चौकाघाट में रह रहे बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि सुबह से दोपहर एक बजे तक उन्हें कुछ भी नहीं मिलता। इसके बाद अधपकी खिचड़ी मिलती है। शाम को सात पूड़ी-सब्जी मिलती है। वह भी पर्याप्त नहीं मिलती। नवयुवक विद्या मंदिर चौकाघाट के बाढ़ पीड़ितों का कहना था कि अव्यवस्था तो बहुत है लेकिन वे शिकायत किससे करें।
अगर विरोध किया तो शिविर के कर्ता-धर्ता अगले दिन से जो मिल रहा है वह भी देना बंद कर देंगे। आधा पेट खाना दिया जा रहा है। परिवार में पांच लोग हैं तो तीन को ही भोजन के पैकेट दिए जा रहे हैं। प्रशासनिक उच्चाधिकारी हों या स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, सभी मुख्य मार्गों पर खुले शिविरों में पहुंच रहे हैं। गलियों में खुले राहत शिविरों तक कोई आ ही नहीं रहा है।