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ब्लैक लिस्टेड कार से करा दिया बनारस के प्रभारी मंत्री का दौरा, बवाल के बाद जांच का आदेश
अजीत कुमार सिंह, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 06 Feb 2018 10:22 AM IST
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ब्लैक लिस्टेड गाड़ी
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समीक्षा बैठक के लिए बीते शनिवार बनारस पहुंचे सूबे के कद्दावर मंत्री सुरेश खन्ना को जो गाड़ी नगर निगम प्रशासन ने मुहैया कराई उस पर बवाल हो गया है। जिस वाहन से मंत्री ने शहर का निरीक्षण किया वह एक ब्लैक लिस्टेड इनोवा कार थी।
वह परिवहन विभाग के रिकार्ड में न सिर्फ ब्लैक लिस्टेड है बल्कि मई 2017 के बाद का उसका टैक्स भी नहीं जमा है। निलंबित एटीआरओ आरएस यादव के जेल जाने के बाद से इस गाड़ी को ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया था।
निरीक्षण से लेकर समीक्षा बैठक तक लापरवाहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश देने वाले नगर विकास मंत्री खुद अपने ही विभाग की बेपरवाही के घेरे में आ गए।
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संसदीय एवं नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना शनिवार दोपहर बनारस पहुंचे थे। कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण, डीएम योगेश्वर राम मिश्र, नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल से लेकर पूरा अमला उनके स्वागत में मौजूद था। मंत्री को यहां यूपी 65 ईटी-5152 नंबर की इनोवा क्रिस्टा उपलब्ध कराई गई।
ये टैक्सी नंबर (व्यावसायिक वाहन) की गाड़ी है, जिस पर पीले रंग की नंबर प्लेट होनी चाहिए। यातायात नियमों के विरुद्ध गाड़ी पर सफेद-काले रंग की नंबर प्लेट लगाई गई थी। गाड़ी के नंबर की जांच करने पर पता चला कि गाड़ी परिवहन विभाग के रिकार्ड में ब्लैकलिस्टेड है।
यह गाड़ी किसी राजनारायण यादव के नाम से दर्ज है। इसका टैक्स भी 31 मई 2017 के बाद का जमा नहीं किया गया है। इसी गाड़ी से भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भेजे गए निलंबित एआरटीओ आरएस यादव वाहनों की चेकिंग करते थे। उसके जेल जाने के बाद से इस गाड़ी को ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया है।
परिवहन विभाग के मुताबिक किसी वाहन को ब्लैकलिस्टेड कर दिए जाने के बाद उसकी खरीद-बिक्री या फिर टैक्स जमा करने के पूर्व परिवहन अधिकारियों की एनओसी लेनी पड़ती है। किन परिस्थितियों में यह कार नगर विकास मंत्री को उपलब्ध कराई गई, इसे लेकर जिला प्रशासन से नगर निगम तक के अधिकारी कटघरे में हैं।
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वह परिवहन विभाग के रिकार्ड में न सिर्फ ब्लैक लिस्टेड है बल्कि मई 2017 के बाद का उसका टैक्स भी नहीं जमा है। निलंबित एटीआरओ आरएस यादव के जेल जाने के बाद से इस गाड़ी को ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया था।
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निरीक्षण से लेकर समीक्षा बैठक तक लापरवाहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश देने वाले नगर विकास मंत्री खुद अपने ही विभाग की बेपरवाही के घेरे में आ गए।
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संसदीय एवं नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना शनिवार दोपहर बनारस पहुंचे थे। कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण, डीएम योगेश्वर राम मिश्र, नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल से लेकर पूरा अमला उनके स्वागत में मौजूद था। मंत्री को यहां यूपी 65 ईटी-5152 नंबर की इनोवा क्रिस्टा उपलब्ध कराई गई।
ये टैक्सी नंबर (व्यावसायिक वाहन) की गाड़ी है, जिस पर पीले रंग की नंबर प्लेट होनी चाहिए। यातायात नियमों के विरुद्ध गाड़ी पर सफेद-काले रंग की नंबर प्लेट लगाई गई थी। गाड़ी के नंबर की जांच करने पर पता चला कि गाड़ी परिवहन विभाग के रिकार्ड में ब्लैकलिस्टेड है।
यह गाड़ी किसी राजनारायण यादव के नाम से दर्ज है। इसका टैक्स भी 31 मई 2017 के बाद का जमा नहीं किया गया है। इसी गाड़ी से भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भेजे गए निलंबित एआरटीओ आरएस यादव वाहनों की चेकिंग करते थे। उसके जेल जाने के बाद से इस गाड़ी को ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया है।
परिवहन विभाग के मुताबिक किसी वाहन को ब्लैकलिस्टेड कर दिए जाने के बाद उसकी खरीद-बिक्री या फिर टैक्स जमा करने के पूर्व परिवहन अधिकारियों की एनओसी लेनी पड़ती है। किन परिस्थितियों में यह कार नगर विकास मंत्री को उपलब्ध कराई गई, इसे लेकर जिला प्रशासन से नगर निगम तक के अधिकारी कटघरे में हैं।
नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना
- फोटो : File Photo
प्रदेश के नगर विकास मंत्री और जिले के प्रभारी सुरेश खन्ना को शहर में आने-जाने के लिए ब्लैक लिस्टेड इनोवा गाड़ी उपलब्ध कराने का मामला अधिकारियों के गले की फांस बन गया है। अब इस मामले की जांच के बहाने विभागीय अधिकारियों को बचाने की कोशिश शुरू हो गई है।
पता चला है कि मेयर और नगर आयुक्त भी ट्रेवल एजेंसी की गाड़ियों से चलते हैं और प्राय: इनके बारे में कोई जांच-पड़ताल नहीं की जाती है, क्योंकि नगर निगम के कुछ अफसरों की गाड़ियां भी यहां किराए पर लगी हुई हैं।
सीधे-सीधे लापरवाही सामने आने के बावजूद नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल का कहना है कि जिस ट्रेवल एजेंसी से गाड़ी मंगाई गई थी, उसके संचालक से जवाब तलब किया जाएगा। साथ ही वाहन के संबंध में परिवहन विभाग से भी जानकारी मांगी जाएगी।
यह भी कहा, अगर जांच में गाड़ी ब्लैक लिस्टेड पाई गई तो संबंधित व्यक्ति पर कार्रवाई होगी। खन्ना को उपलब्ध कराई गई इनोवा का मई के बाद से टैक्स जमा नहीं किया गया है। इस गाड़ी से कभी चंदौली के निलंबित एआरटीओ आरएस यादव चलते थे।
यादव की गिरफ्तारी के बाद उसे ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है। यह जानकारी सभी को थी पर किसी जांच-पड़ताल से बचने के लिए इसे प्रभारी मंत्री के लिए बुला लिया गया। सूत्रों की मानें तो मंत्री को वाहन उपलब्ध कराने के लिए पीसीएफ प्लाजा स्थित एक ट्रेवल एजेंसी से कहा गया था।
नगर निगम और एडीएम प्रोटोकाल कार्यालय की ओर से इसी एजेंसी के जरिए वाहन लिए जाते हैं। एजेंसी संचालक अजय सिंह का कहना है कि उनके यहां कई लोग अपने वाहन चलवाते हैं। अमूमन वाहन का रजिस्ट्रेशन पेपर, परमिट, बीमा, फिटनेस और चालक का डीएल चेक किया जाता है।
अगर गाड़ी का टैक्स नहीं जमा है तो वाहन मलिक जुर्माने के साथ उसे बाद में जमा कर सकता है। वाहन ब्लैक लिस्टेड है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। जानकारी की जा रही है कि यह गाड़ी अब तक किन-किन और मंत्रियों के लिए मंगाई जा चुकी है।
पता चला है कि मेयर और नगर आयुक्त भी ट्रेवल एजेंसी की गाड़ियों से चलते हैं और प्राय: इनके बारे में कोई जांच-पड़ताल नहीं की जाती है, क्योंकि नगर निगम के कुछ अफसरों की गाड़ियां भी यहां किराए पर लगी हुई हैं।
सीधे-सीधे लापरवाही सामने आने के बावजूद नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल का कहना है कि जिस ट्रेवल एजेंसी से गाड़ी मंगाई गई थी, उसके संचालक से जवाब तलब किया जाएगा। साथ ही वाहन के संबंध में परिवहन विभाग से भी जानकारी मांगी जाएगी।
यह भी कहा, अगर जांच में गाड़ी ब्लैक लिस्टेड पाई गई तो संबंधित व्यक्ति पर कार्रवाई होगी। खन्ना को उपलब्ध कराई गई इनोवा का मई के बाद से टैक्स जमा नहीं किया गया है। इस गाड़ी से कभी चंदौली के निलंबित एआरटीओ आरएस यादव चलते थे।
यादव की गिरफ्तारी के बाद उसे ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है। यह जानकारी सभी को थी पर किसी जांच-पड़ताल से बचने के लिए इसे प्रभारी मंत्री के लिए बुला लिया गया। सूत्रों की मानें तो मंत्री को वाहन उपलब्ध कराने के लिए पीसीएफ प्लाजा स्थित एक ट्रेवल एजेंसी से कहा गया था।
नगर निगम और एडीएम प्रोटोकाल कार्यालय की ओर से इसी एजेंसी के जरिए वाहन लिए जाते हैं। एजेंसी संचालक अजय सिंह का कहना है कि उनके यहां कई लोग अपने वाहन चलवाते हैं। अमूमन वाहन का रजिस्ट्रेशन पेपर, परमिट, बीमा, फिटनेस और चालक का डीएल चेक किया जाता है।
अगर गाड़ी का टैक्स नहीं जमा है तो वाहन मलिक जुर्माने के साथ उसे बाद में जमा कर सकता है। वाहन ब्लैक लिस्टेड है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। जानकारी की जा रही है कि यह गाड़ी अब तक किन-किन और मंत्रियों के लिए मंगाई जा चुकी है।