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Varanasi News: मन, प्रकृति और प्राचीन हिमालयी जड़ी-बूटियों से होगा बीमारियों की जड़ पर वार

Sat, 12 Sep 2026 01:20 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 01:20 AM IST
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Mind, nature and ancient Himalayan herbs will attack the root of diseases.
केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ तथा सेंट्रल काउंसिल आफ तिब्बतन मेडिसिन एवं केंद्री
सारनाथ। केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान में शुक्रवार को तिब्बती चिकित्सा पद्धति पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इसका आयोजन सेंट्रल काउंसिल ऑफ तिब्बतन मेडिसिन और केंद्रीय तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन, धर्मशाला के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। इस सम्मेलन में देशभर से 140 सदस्य भाग ले रहे हैं।
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मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय तिब्बतन प्रशासन के स्वास्थ्य मंत्री कॉलदेन पेमाछो ने कहा कि सोवा-रिग्पा का अर्थ उपचार का विज्ञान है। यह सिर्फ दवा नहीं, बल्कि शरीर, मन और प्रकृति को एक साथ ठीक करने की पूरी प्रणाली है। उन्होंने बताया कि यह पद्धति आयुर्वेद की तरह ही प्राचीन है। तिब्बती चिकित्सा तीन दोषों वायु, पित्त और कफ पर आधारित है, जो आयुर्वेद से मिलते-जुलते हैं। इसमें हिमालय में मिलने वाली 1000 से अधिक जड़ी-बूटियों, खनिजों और भस्मों का उपयोग होता है। यह पद्धति किसी रासायनिक पदार्थ का प्रयोग नहीं करती और बीमारी की जड़ पर काम करती है। पेमाछो ने कहा कि तिब्बती दवाएं तनाव, अनिद्रा, अवसाद, पाचन संबंधी पुरानी समस्याओं, गठिया, जोड़ों के दर्द, यकृत और गुर्दे के विकारों, नासिका संबंधी समस्याओं तथा संवेदनशीलता और श्वसन संबंधी बीमारियों में विशेष रूप से उपयोगी हैं।
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पेमाछो ने आगे कहा कि तिब्बती मान्यता है कि 80 फीसदी बीमारियां मन से शुरू होती हैं। इसलिए दवा के साथ ध्यान, योग, सही खानपान और व्यवहार में सुधार भी बताया जाता है। यह दृष्टिकोण दलाई लामा द्वारा भी समर्थित है। सेंट्रल काउंसिल ऑफ तिब्बतन मेडिसिन के अध्यक्ष थुपतेन कुनफेल ने बताया कि यह सोवा-रिग्पा के चिकित्सकों और छात्रों के लिए चौथा राष्ट्रीय सम्मेलन है। इसमें देशभर के विद्वानों को सिद्धांत और नैदानिक अभ्यास पर प्रस्तुतिकरण के लिए आमंत्रित किया गया है।
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सोवा-रिग्पा चिकित्सा पद्धति पर आज प्रस्तुत होगा शोध

मुख्य वक्ता पद्मश्री पद्मा गुरुमित ने कहा कि तिब्बती चिकित्सा का प्रामाणिक ग्रंथ ग्युशी या चार तंत्र है। यह आज भी तिब्बती चिकित्सकों की शिक्षा और अभ्यास के केंद्र में है। संस्थान के कुलपति वांगचुक दोर्जे नेगी ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि तिब्बती चिकित्सा पद्धति उपचार की एक मूल्यवान प्रणाली है। यह कई आधुनिक बीमारियों में लाभ प्रदान करती है और दुनिया भर के लोगों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस संगोष्ठी में शनिवार को देशभर से 11 चुने हुए सदस्य सोवा-रिग्पा चिकित्सा पद्धति पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे।
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