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कीमतों की उछाल से वीडीए के मकानों से दूर हुए खरीदार
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वाराणसी। बदलते बनारस में हजारों लोग एक अदद मकान की तलाश में हैं, मगर विकास प्राधिकरण के सौ से ज्यादा आवासीय भवनों को खरीदार ही नहीं मिल रहे हैं। बाजार से ज्यादा कीमत और जर्जर हो चुके भवनों को बेचने के लिए वीडीए कई बार प्रयास कर चुका है। मगर कीमतों में उछाल के चलते यह भवन कई सालों से जस के तस पड़े हुए हैं।
विकास प्राधिकरण ने दो दशक पहले बड़ी गैबी, रामनगर, कोनिया, अशोक विहार सहित शहर में कई जगहों पर विकास प्राधिकरण ने आवासीय फ्लैट बनाए थे। उस समय आवंटन होने के बाद करीब अलग अलग योजनाओं के 112 फ्लैट और 53 प्लाट लाख प्रयास के बाद भी नहीं बिक पाए। इसके बाद हर वर्ष सरकारी नियमों के अनुसार फ्लैट व प्लाट की कीमत बढ़ती गई। अब आलम यह है कि बचे हुए फ्लैट्स की हालत काफी जर्जर हो चुकी है। ऐसे में इन आवासों को खरीदने वालों को उसमें रहने से पहले एक बड़ी कीमत खर्च कर उसे ठीक कराना होगा। ऐसे में फ्लैट्स काफी महंगे साबित हो रहे हैं। यहां बता दें कि विकास प्राधिकरण के 39 आवासीय भूखंड बड़ा लालपुर, रामनगर और अशोक विहार में बिक्री के लिए हैं। 35 मीटर से लेकर 463 मीटर तक के आवासीय भूखंड इसमें रामनगर में 45 मीटर का प्लाट 5.95 लाख और बड़ा लालपुर में 35 मीटर का प्लाट 8.23 लाख रुपये में है। अलग अलग प्लाट का लोकेशन के हिसाब से अलग अलग कीमत रखी गई है। जबकि इन जगहों पर वीडीए की शह पर विकसित की जा रही अवैध कालोनियों में छोटे छोटे प्लाट इससे कम कीमत मेें उपलब्ध होने के चलते वर्षो से सरकारी प्लाट को खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
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पांच लाख के आवास में ढाई लाख का और खर्चा
कोनिया, रामनगर, शिवपुर, पांडेयपुर, लालपुर और बड़ी गैबी में 25 मीटर के 88 फ्लैट खाली पड़े हैं। वीडीए ने अलग अलग फ्लैट की कीमत 5 लाख 75 हजार से 14 लाख रुपये तक की कीमत रखी है। कई साल पहले बने इन फ्लैट की समय पर मरम्मत नहीं होने की वजह से इनकी हालत ज्यादा खराब हो गई है। वीडीए के अधिकारियों के मुताबिक पांच लाख 75 हजार का फ्लैट लेने वाले को खिड़की, दरवाजे और अन्य मरम्मत में कम से कम ढाई लाख रुपये खर्च करने होंगे। ऐसे में इन फ्लैट्स की कीमत 10 लाख रुपये ज्यादा पहुंच जाएगी।
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फ्लैट की हालत सुधरे तो मिल सकते हैं खरीदार
वर्तमान में वीडीए इन फ्लैट को जहां हैं जैसे हैं की शर्त पर बेचने का प्रयास कर रहा है। जर्जर हो चुके फ्लैट में ऊपर या नीचे और अगल बगल में आवंटियों के रहने के कारण मरम्मत में दिक्कत भी हो सकती है। इसके अलावा आवास के मूल्य में 10 फीसदी प्री पेड जीज रेंट की अनिवार्यता ने भी इनकी कीमत बढ़ा रखी है। वीडीए के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि जर्जर फ्लैट की मरम्मत कराकर उन्हें बेचा जाए तो उसके खरीदार मिल जाएंगे।
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ज्यादा कीमतों के कारण फ्लैट के खरीदार कम आते हैं। बाजार सर्वे में फ्लैट्स की कीमत 15 से 20 फीसदी तक ज्यादा पाई गई है। इसी आधार पर शासन से अनुमति मांगी गई है। हालांकि 20 जनवरी को होने वाले ई ऑक्शन में तय कीमतों पर ही बोली लगेगी। मगर हमारा प्रयास है कि अगली पर इनकी कीमतों में कमी कर ली जाए।
राहुल पांडेय, उपाध्यक्ष, विकास प्राधिकरण
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विकास प्राधिकरण ने दो दशक पहले बड़ी गैबी, रामनगर, कोनिया, अशोक विहार सहित शहर में कई जगहों पर विकास प्राधिकरण ने आवासीय फ्लैट बनाए थे। उस समय आवंटन होने के बाद करीब अलग अलग योजनाओं के 112 फ्लैट और 53 प्लाट लाख प्रयास के बाद भी नहीं बिक पाए। इसके बाद हर वर्ष सरकारी नियमों के अनुसार फ्लैट व प्लाट की कीमत बढ़ती गई। अब आलम यह है कि बचे हुए फ्लैट्स की हालत काफी जर्जर हो चुकी है। ऐसे में इन आवासों को खरीदने वालों को उसमें रहने से पहले एक बड़ी कीमत खर्च कर उसे ठीक कराना होगा। ऐसे में फ्लैट्स काफी महंगे साबित हो रहे हैं। यहां बता दें कि विकास प्राधिकरण के 39 आवासीय भूखंड बड़ा लालपुर, रामनगर और अशोक विहार में बिक्री के लिए हैं। 35 मीटर से लेकर 463 मीटर तक के आवासीय भूखंड इसमें रामनगर में 45 मीटर का प्लाट 5.95 लाख और बड़ा लालपुर में 35 मीटर का प्लाट 8.23 लाख रुपये में है। अलग अलग प्लाट का लोकेशन के हिसाब से अलग अलग कीमत रखी गई है। जबकि इन जगहों पर वीडीए की शह पर विकसित की जा रही अवैध कालोनियों में छोटे छोटे प्लाट इससे कम कीमत मेें उपलब्ध होने के चलते वर्षो से सरकारी प्लाट को खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
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पांच लाख के आवास में ढाई लाख का और खर्चा
कोनिया, रामनगर, शिवपुर, पांडेयपुर, लालपुर और बड़ी गैबी में 25 मीटर के 88 फ्लैट खाली पड़े हैं। वीडीए ने अलग अलग फ्लैट की कीमत 5 लाख 75 हजार से 14 लाख रुपये तक की कीमत रखी है। कई साल पहले बने इन फ्लैट की समय पर मरम्मत नहीं होने की वजह से इनकी हालत ज्यादा खराब हो गई है। वीडीए के अधिकारियों के मुताबिक पांच लाख 75 हजार का फ्लैट लेने वाले को खिड़की, दरवाजे और अन्य मरम्मत में कम से कम ढाई लाख रुपये खर्च करने होंगे। ऐसे में इन फ्लैट्स की कीमत 10 लाख रुपये ज्यादा पहुंच जाएगी।
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फ्लैट की हालत सुधरे तो मिल सकते हैं खरीदार
वर्तमान में वीडीए इन फ्लैट को जहां हैं जैसे हैं की शर्त पर बेचने का प्रयास कर रहा है। जर्जर हो चुके फ्लैट में ऊपर या नीचे और अगल बगल में आवंटियों के रहने के कारण मरम्मत में दिक्कत भी हो सकती है। इसके अलावा आवास के मूल्य में 10 फीसदी प्री पेड जीज रेंट की अनिवार्यता ने भी इनकी कीमत बढ़ा रखी है। वीडीए के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि जर्जर फ्लैट की मरम्मत कराकर उन्हें बेचा जाए तो उसके खरीदार मिल जाएंगे।
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ज्यादा कीमतों के कारण फ्लैट के खरीदार कम आते हैं। बाजार सर्वे में फ्लैट्स की कीमत 15 से 20 फीसदी तक ज्यादा पाई गई है। इसी आधार पर शासन से अनुमति मांगी गई है। हालांकि 20 जनवरी को होने वाले ई ऑक्शन में तय कीमतों पर ही बोली लगेगी। मगर हमारा प्रयास है कि अगली पर इनकी कीमतों में कमी कर ली जाए।
राहुल पांडेय, उपाध्यक्ष, विकास प्राधिकरण