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बदलते भारत से रिश्ता मजबूत कर गए प्रवासी भारतीय
Fri, 25 Jan 2019 11:20 AM IST
shashikant misra
शशांक मिश्र,अमर उजाला,वाराणसी
शशांक मिश्र,अमर उजाला,वाराणसी
Published by: shashikant misra
Updated Fri, 25 Jan 2019 11:20 AM IST
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वापस जाते प्रवासी भारतीय
- फोटो : amar ujala
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15वें प्रवासी भारतीय दिवस के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय आयोजन के दौरान प्रवासियों का भारत से रिश्ता और मजबूत हुआ है। नए भारत के निर्माण में प्रवासियों की अहम भूमिका और उनके लिए किए जा रहे कामों के जिक्र से दुनिया भर में नाम कमा रहे भारतवंशियों का नाता भी जुड़ा।
अलग-अलग सात प्लेनरी सेशन के जरिए उन्हें देश में हो रहे बदलाव से रूबरू कराया तो उनके विचारों को भी आत्मसात किया गया। उधर, काशी आतिथ्य के जरिए भी प्रवासियों के बीच नई छवि बनाने की कोशिश हुई, ताकि आने वाले समय में पर्यटन के क्षेत्र में इसका लाभ मिल सके। तीन दिवसीय भव्य आयोजन के जरिये दुनिया भर से आए मेहमानों को भारत की नई तस्वीर दिखाई गई।
सौर ऊर्जा, भारत में अवसर और चुनौतियां, वेस्ट मैनेजमेंट, कृत्रिम अभिसूचना, सायबर क्षमता में वृद्धि सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रवासियों से विचार विमर्श किया गया। इसके जरिए यहां के प्रयासों और दुनिया में किए जा रहे कामों को समझा गया।
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ओडीओपी सहित अन्य प्रदर्शनियों के जरिए उत्तर प्रदेश की छवि तेजी से विकसित होने वाले प्रदेश के रूप में बनाने का प्रयास किया गया। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि प्रवासी भारतीय दिवस के आयोजनों का दूरगामी परिणाम मिलता है।
इस बार का आयोजन भव्य होने से प्रवासियों का रुख भारत की ओर बढे़गा। काशी आतिथ्य से न सिर्फ प्रवासियों से दिल का रिश्ता बना है, बल्कि वह यहां आने के लिए विदेशों में बसे लोगों को प्रेरित भी करेंगे। ऐसे में यहां के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
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अलग-अलग सात प्लेनरी सेशन के जरिए उन्हें देश में हो रहे बदलाव से रूबरू कराया तो उनके विचारों को भी आत्मसात किया गया। उधर, काशी आतिथ्य के जरिए भी प्रवासियों के बीच नई छवि बनाने की कोशिश हुई, ताकि आने वाले समय में पर्यटन के क्षेत्र में इसका लाभ मिल सके। तीन दिवसीय भव्य आयोजन के जरिये दुनिया भर से आए मेहमानों को भारत की नई तस्वीर दिखाई गई।
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सौर ऊर्जा, भारत में अवसर और चुनौतियां, वेस्ट मैनेजमेंट, कृत्रिम अभिसूचना, सायबर क्षमता में वृद्धि सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रवासियों से विचार विमर्श किया गया। इसके जरिए यहां के प्रयासों और दुनिया में किए जा रहे कामों को समझा गया।
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ओडीओपी सहित अन्य प्रदर्शनियों के जरिए उत्तर प्रदेश की छवि तेजी से विकसित होने वाले प्रदेश के रूप में बनाने का प्रयास किया गया। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि प्रवासी भारतीय दिवस के आयोजनों का दूरगामी परिणाम मिलता है।
इस बार का आयोजन भव्य होने से प्रवासियों का रुख भारत की ओर बढे़गा। काशी आतिथ्य से न सिर्फ प्रवासियों से दिल का रिश्ता बना है, बल्कि वह यहां आने के लिए विदेशों में बसे लोगों को प्रेरित भी करेंगे। ऐसे में यहां के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
सुनहरी यादें सहेज भारी मन से मेहमान विदा
प्यार, दुलार, आदर और सत्कार से प्रवासी भारतीयों का रोम-रोम पुलकित हो उठा। ऐसी सुनहरी यादें मिलीं जो उनके मन में रची-बसी रहेंगी। तीन दिन बाद विदाई बेला आई तो भावुक मेजबान चौखट पर विनम्रता से मेहमान को ताकते रहे। अपनत्व से अभिभूत अतिथियों की भी आंखें भर आईं।
तीन दिन कैसे बीते, पता ही नहीं चला। तीन दिन तक उत्सव के रंग में रंगे ऐढ़े गांव, टेंट सिटी धीरे-धीरे फिर पुराने रूप में आ जाएगी, लेकिन जो अहसास मन में बसा, उसका रंग हमेशा चटख रहेगा। दुनिया के 90 देशों से आए इन खास मेहमानों ने इससे पहले कभी नगरी के दर्शन किए थे। कहीं काल भैरव के दर्शन का सुख तो कहीं सारनाथ की शांति का अहसास।
संकट मोचन मंदिर, बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई और श्रीराम लीला के लिए प्रसिद्ध रामनगर देखा। गौरवान्वित मेहमान दिव्य गंगा आरती के भी साक्षी बने। नौका में बैठ राजघाट से अस्सी घाट तक काशी का सौंदर्य निहारा।
तीन दिन कैसे बीते, पता ही नहीं चला। तीन दिन तक उत्सव के रंग में रंगे ऐढ़े गांव, टेंट सिटी धीरे-धीरे फिर पुराने रूप में आ जाएगी, लेकिन जो अहसास मन में बसा, उसका रंग हमेशा चटख रहेगा। दुनिया के 90 देशों से आए इन खास मेहमानों ने इससे पहले कभी नगरी के दर्शन किए थे। कहीं काल भैरव के दर्शन का सुख तो कहीं सारनाथ की शांति का अहसास।
संकट मोचन मंदिर, बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई और श्रीराम लीला के लिए प्रसिद्ध रामनगर देखा। गौरवान्वित मेहमान दिव्य गंगा आरती के भी साक्षी बने। नौका में बैठ राजघाट से अस्सी घाट तक काशी का सौंदर्य निहारा।
गंगा मइया बुलाएंगी तो फिर आएंगे
सम्मेलन में भाग लेने के बाद प्रवासी भारतीयों ने लौटते वक्त कहा कि पूर्वजों की माटी को नमन कर वह धन्य हो गए। गंगा मइया बुलाएंगी तो हम फिर आएंगे। लंदन से आए नैमे समीन ने कहा कि काशी आकर बहुत अच्छा लगा। अब तक सिर्फ सुना था, लेकिन ये काशी से उससे ज्यादा अलौकिक है। गंगा आरती तो लाजवाब है।
स्विट्जरलैंड से आए सुनील ने कहा कि गंगा और गंगा आरती दोनों ही मन में बस गए। बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर तो धन्य हो गया। सारनाथ में महात्मा बुद्ध के दर्शन हुए। बहरीन की अनुरिता मृत्युंजय ने कहा कि हिंदुस्तान सच में महान है। यहां जो आजादी है, वो कहीं नहीं। बहरीन में लोग हमें हिंद और हिंदी कहकर बुलाते हैं। बहुत गर्व महसूस होता है।
अबुधाबी से आए अभिलाष ने कहा कि यहां जो प्यार और सत्कार मिला, उसे शब्दों में नहीं बयां किया जा सकता। यूएसए से आए अतुल अग्निहोत्री भी पहली बार काशी की धरती को नमन किया।
कैलास नाथ यादव के नेतृत्व में पंडित दीनदयाल हस्तकला संकुल और स्टेडियम के बीच प्रवासी भारतीयों को भारत के आध्यात्मिक चिंतन से अवगत कराया गया। साथ ही स्वामी अड़गड़ानंद महाराज द्वारा लिखित यथार्थ गीता की प्रतियां भेंट की गईं।
स्विट्जरलैंड से आए सुनील ने कहा कि गंगा और गंगा आरती दोनों ही मन में बस गए। बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर तो धन्य हो गया। सारनाथ में महात्मा बुद्ध के दर्शन हुए। बहरीन की अनुरिता मृत्युंजय ने कहा कि हिंदुस्तान सच में महान है। यहां जो आजादी है, वो कहीं नहीं। बहरीन में लोग हमें हिंद और हिंदी कहकर बुलाते हैं। बहुत गर्व महसूस होता है।
अबुधाबी से आए अभिलाष ने कहा कि यहां जो प्यार और सत्कार मिला, उसे शब्दों में नहीं बयां किया जा सकता। यूएसए से आए अतुल अग्निहोत्री भी पहली बार काशी की धरती को नमन किया।
कैलास नाथ यादव के नेतृत्व में पंडित दीनदयाल हस्तकला संकुल और स्टेडियम के बीच प्रवासी भारतीयों को भारत के आध्यात्मिक चिंतन से अवगत कराया गया। साथ ही स्वामी अड़गड़ानंद महाराज द्वारा लिखित यथार्थ गीता की प्रतियां भेंट की गईं।