{"_id":"58f524b74f1c1b1b74471ec3","slug":"melodramatic-narrative-from-north-to-south","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तर से दक्षिण तक के राग-ताल हुए एकाकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तर से दक्षिण तक के राग-ताल हुए एकाकार
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 18 Apr 2017 01:55 AM IST
विज्ञापन
संकट मोचन संगीत समारोह
- फोटो : facebook
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
उत्तर और दक्षिण के राग हों, चाहे साज और ताल, सुर-लय के संगम में सोमवार की रात सब एकाकार हो गए। भरतनाट्यम में शिव के तांडव नर्तन और कृष्ण के महारास के भावों को सजाकर जहां पद्मश्री गीता चंद्रन ने विश्वभर के संगीत प्रेमियों का ध्यान खींचा, वहीं विख्यात ख्याल गायक पद्मश्री उस्ताद रशीद खां की ठुमरी भी श्रोताओं को भाई। दक्षिण भारतीय वाद्य मृदंगम के जाने-माने कलाकार डॉ. येल्ला वेंकटेश्वर राव ने पखावज पर बेजोड़ जुगलबंदी से संगीत समारोह को नई ऊंचाई प्रदान की। ऐसे महान साधकों की प्रस्तुतियों के साथ सोमवार को संकट मोचन संगीत समारोह की तीसरी निशा संगीत प्रेमियों के लिए यादगार बन गई।
पद्मश्री गीता चंद्रन ने अपनी बेटी शरण्या चंद्रन के साथ संकट मोचन के दरबार में पारंपरिक शैली के नृत्य विन्यास और संयोजन से अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने पुष्पांजलि के बाद नटराज स्तुति, कृष्ण-राधा के महारास, मारुतिनंदन हनुमान, पवनसुत के भावों को भौंहों, इशारों, मुद्राओं और कदमों की थिरकन के जरिए प्रदर्शित किया। साज नटवांगम पर गुरु एस. शंकर, वायलिन पर श्रीनिवासन, मृदंगम पर मनोहर बालखंडे ने संगत की। गायन पर साथ दिया ज्योतिश्री देवी ने।
इनके बाद ख्याल गायक पद्मश्री रशीद खां ने मंच संभाला। उन्होंने शुरुआत की रागपुरिया कल्याण में निबद्ध विलंबित एक ताल की बंदिश से। बोल थे- आज सोवत लाड लड़ावन रे माई..। इसके बाद उन्होंने ठुमरी पर स्वरों की लोच से संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया। आखिरी ठुमरी- याद पिया की आए, ये दुख सहा न जाए.. की प्रस्तुति से उन्होंने विदा ली। तबले पर तन्मय घोष, हारमोनियम पर पं. कृष्ण गोंड ने संगत की। गायन में साथ दिया सुखबीर नायक ने।
विज्ञापन
इनके बाद पद्मभूषण पं. साजन मिश्र के पुत्र स्वरांश ने मंच संभाला। इन्होंने राग मालकौंस में विलंबित एक ताल की बंदिश- किनके मन राम बिराजे... से शुरुआत की। समापन भजन से किया। तबले पर पं. राकेश मिश्र, हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। इनके बाद उत्तर-दक्षिण के ताल वाद्य यंत्रों पर बेजोड़ कचहरी लगाई गई। मृदंगम पर डॉ. येल्ला वेंकटेश्वर राव, पखावज पर पं. भवानी शंकर, तबले पर पं. कुमार बोस ने ताल नाद से संकट मोचन मंदिर परिसर गुंजायमान कर दिया।
पद्मश्री गीता चंद्रन ने अपनी बेटी शरण्या चंद्रन के साथ संकट मोचन के दरबार में पारंपरिक शैली के नृत्य विन्यास और संयोजन से अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने पुष्पांजलि के बाद नटराज स्तुति, कृष्ण-राधा के महारास, मारुतिनंदन हनुमान, पवनसुत के भावों को भौंहों, इशारों, मुद्राओं और कदमों की थिरकन के जरिए प्रदर्शित किया। साज नटवांगम पर गुरु एस. शंकर, वायलिन पर श्रीनिवासन, मृदंगम पर मनोहर बालखंडे ने संगत की। गायन पर साथ दिया ज्योतिश्री देवी ने।
विज्ञापन
इनके बाद ख्याल गायक पद्मश्री रशीद खां ने मंच संभाला। उन्होंने शुरुआत की रागपुरिया कल्याण में निबद्ध विलंबित एक ताल की बंदिश से। बोल थे- आज सोवत लाड लड़ावन रे माई..। इसके बाद उन्होंने ठुमरी पर स्वरों की लोच से संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया। आखिरी ठुमरी- याद पिया की आए, ये दुख सहा न जाए.. की प्रस्तुति से उन्होंने विदा ली। तबले पर तन्मय घोष, हारमोनियम पर पं. कृष्ण गोंड ने संगत की। गायन में साथ दिया सुखबीर नायक ने।
विज्ञापन
इनके बाद पद्मभूषण पं. साजन मिश्र के पुत्र स्वरांश ने मंच संभाला। इन्होंने राग मालकौंस में विलंबित एक ताल की बंदिश- किनके मन राम बिराजे... से शुरुआत की। समापन भजन से किया। तबले पर पं. राकेश मिश्र, हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। इनके बाद उत्तर-दक्षिण के ताल वाद्य यंत्रों पर बेजोड़ कचहरी लगाई गई। मृदंगम पर डॉ. येल्ला वेंकटेश्वर राव, पखावज पर पं. भवानी शंकर, तबले पर पं. कुमार बोस ने ताल नाद से संकट मोचन मंदिर परिसर गुंजायमान कर दिया।