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Varanasi News: 4 साल बाद अपने घर से होगा माता गौरा का गौना, गौरी सदनिका मिलने में खर्च हो गए ढाई करोड़ रुपये

Sun, 17 Mar 2024 07:58 PM IST
अमन विश्वकर्मा आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 17 Mar 2024 07:58 PM IST
सार

Varanasi News: 

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Mata Gaura Gauna will be organised hir home After four years in varanasi
बाबा के विवाह समारोह की चल रहीं तैयारियां। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चार साल के बाद मां गौरा का गौना उनके अपने घर से होगा। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास अब गौरा सदनिका के नाम से जाना जाएगा। चार साल की प्रक्रिया और जद्दोजहद के बाद महंत परिवार को गौरा के मायके का स्वामित्व हासिल हो गया। भवन की रजिस्ट्री और चार सालों तक किराये व रखरखाव में ढाई करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

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रंगभरी एकादशी पर 20 मार्च को चार साल के बाद बाबा विश्वनाथ माता गौरा को उनके मायके से विदा कराकर काशी की गलियों में निकलेंगे। चार साल से किराए के घर से निभाई जा रही रस्में इस बार गौरा के अपने घर गौरा सदनिका से होंगी। 1170 स्क्वायर फीट में निर्मित गौरा का यह घर तीन मंजिला है। इसमें प्रथम तल और तृतीय तल पर रंगभरी व तिलकोत्सव की परंपराएं निभाई जाती हैं।
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र में महंत आवास जनवरी 2020 में धराशायी हो गया था। इसके बाद मंदिर प्रशासन की ओर से पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी व उनके परिवार को टेढ़ीनीम स्थित भवन में अस्थायी तौर पर रहने का इंतजाम किया था। फरवरी 2020 में पहली बार महंत परिवार ने किराये के आवास में रंगभरी एकादशी की परंपरा निभाई। इस दौरान भवन स्वामी ने पूरे भवन को मां गौरा के गौना के लिए अर्पित करने की बात कही, लेकिन कुछ कारणों से यह संभव नहीं हो सका।

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सितंबर 2023 में हुई रजिस्ट्री

Mata Gaura Gauna will be organised hir home After four years in varanasi
बाबा विश्वनाथ और माता गौरा। - फोटो : अमर उजाला

4 साल की जद्दोजहद के बाद सितंबर 2023 में एक करोड़ 54 लाख में भवन स्वामी ने डॉ. कुलपति तिवारी को यह भवन रजिस्ट्री की। शिवांजलि के संयोजक संजीवरत्न मिश्र ने बताया कि महंत आवास धराशायी होने के बाद रजत सिंहासन क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके कारण पहली बार बाबा का तिलकोत्सव कुश से बनाए गए सिंहासन पर करना पड़ा था।

इस बाबत श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने कहा कि पुश्तैनी निवास धराशायी होने के बाद गौरा की बरात पहली बार किराये के जिस भवन से निकली थी अब वह गौरा का अपना भवन हो गया है।

कुछ जानकारियां

  • 360 साल से काशी में मां गौरा के गौने का आयोजन होता है।
  • भवन के 75 फीसदी हिस्से में होता है देवकार्य
  • ग्राउंड फ्लोर पर चल रजत सिंहासन प्रतिमा का स्थान
  • दूसरे फ्लोर पर रहता है महंत परिवार
  • तीसरे तल पर बाबा की रजत प्रतिमाओं के दैनिक पूजन का होता है कार्यक्रम
  • 1170 स्क्वायर फीट में है निर्मित मकान
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