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बिजली उत्पादन को लेकर बढ़ी चुनौतियां, जानिए क्यों?

Sat, 18 Mar 2017 12:18 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी/सोनभद्र
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी/सोनभद्र Updated Sat, 18 Mar 2017 12:18 AM IST
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many trouble rises for production of electricity,know why
नए बिजलीघरों की बढ़ती संख्या और भविष्य को लेकर बनती योजनाओं के बीच पब्लिक सेक्टर के सामने बिजली उत्पादन को लेकर चुनौती उत्पन्न हो गई है। निजी क्षेत्र की बिजली सस्ती होने के कारण केंद्रीय और राज्य सेक्टर की परियोजनाएं बिजली की खपत को लेकर अभी से जूझने लगी हैं।
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बाजार न मिलने के कारण लगातार थर्मल बैकिंग करनी पड़ रही है। इससे कुछ परियोजनाओं के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा होने लगा है।
केंद्रीय पुल सेक्टर और राज्यों के लोड डिस्पैच सेंटर उन्हीं परियोजनाओं की बिजली आपूर्ति के लिए ले रहे हैं, जिनकी बिजली सबसे सस्ती पड़ रही है।

इसके चलते देश की अग्रणी कंपनी एनटीपीसी की कई परियोजनाओं को उत्पादन घटाना पड़ रहा है। सूबे में स्थित राज्य सेक्टर की परियोजनाओं में भी15 सौ से 25 सौ मेगावाट तक  थर्मल बैकिंग कराई जा रही है। इसके चलते 210 मेगावाट की पनकी परियोजना में दो माह से उत्पादन शून्य है।
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पारीक्षा की इकाइयों को बीच में दो दिन चलाने के बाद फिर से बंद कर दिया गया है। आंकड़े बताते हैं कि सिंगरौली में निजी क्षेत्र की सासन परियोजना की बिजली एनटीपीसी की परियोजनाओं से सस्ती पड़ रही हैं।
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इसके चलते एनटीपीसी की मदर यूनिट सिंगरौली और देश के सबसे बड़े विंध्याचल बिजलीघर को लगातार पूर्ण क्षमता से उत्पादन शेड्यूल नहीं मिल पा रहा है। निजी क्षेत्र की ललितपुर और एनटीपीसी के ऊंचाहार की बिजली राज्य सेक्टर के पनकी, पारीक्षा से सस्ती होने के कारण इन दोनों परियोजनाओं में उत्पादन शून्य बना हुआ है।

खुले बाजार में भी बिजली दर की प्रतियोगिता से सबसे सस्ती बिजली देने वाले अनपरा बिजलीघर और निजी क्षेत्र की लैंको को थर्मल बैकिंग से जूझना पड़ रहा है। इसके चलते कई परियोजनाओं के अस्तित्व पर भी संकट मंडराने लगा है।

इनसे भी मिल रही चुनौती

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बिजली
केंद्र सरकार लगातार सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में लगी हुई है। निकट भविष्य में महज सोनभद्र में रिहंद-ओबरा डैम पर 524 और खडि़या ऐश डैम पर 125 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट स्थापित होने वाला है। इसी तरह अन्य जगहों पर भी इसको लेकर पहल हो रही है।

स्पष्ट है कि आगे चलकर सोलर पावर सेक्टर थर्मल पावर को कड़ी चुनौती देने वाला है। एनटीपीसी सिंगरौली के समूह महाप्रबंधक दिनेश कुमार ने कहा कि निजी क्षेत्र से मिल रही चुनौती का सामना करने के लिए उच्च कोटि के कोयले का भंडारण बढ़ाने और ट्रांसपोर्टिगिं लागत में कमी पर जोर दिया जा रहा है।

पूरी उम्मीद है कि जल्द ही एनटीपीसी सिंगरौली निजी क्षेत्र को पछाड़ते हुए देश की सबसे सस्ती बिजली पैदा करने लगेगा, ताकि पूर्ण उत्पादन का शेड्यूल बराबर मिलता रहे। वहीं यूपीआरवीयूएनएल के निदेशक तकनीकी वीएस तिवारी का कहना है कि बिजली उत्पादन के क्षेत्र में टिके रहने के लिए सस्ती से सस्ती बिजली पैदा करनी होगी।

इसके लिए हर संभव उपाय किए जा रहे हैं। इसके चलते राज्य सेक्टर की बिजली 60 से 70 पैसे सस्ती हुई है। इसे और सस्ता करने का प्रयास जारी है, ताकि निजी क्षेत्र से मिल रही चुनौती से बखूबी निबटा जा सके।
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