स्कूल के दिनों में ही विश्व हिंदू परिषद से जुड़ गए थे मनोज सिन्हा, कभी मुख्यमंत्री की रेस में थे आगे
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा जम्मू-कश्मीर के नए उपराज्यपाल के लिए नामित किए गए हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गिरीश चंद्र मूर्मू का इस्तीफा बुधवार को देर रात स्वीकार कर लिया। इससे पहले यूपी में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री की रेस में भी मनोज सिन्हा का नाम चर्चा में रहा है।
जम्मू-कश्मीर के नए लेफ्टिनेंट गवर्नर(उपराज्यपाल) के रूप में मनोज सिन्हा का चुना जाना उनके गृह जनपद गाजीपुर के लोगों के लिए गर्व का विषय है। इससे जनपद के कोने-कोने में और मनोज सिन्हा को चाहने वालों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद तहसील के मोहनपुरा गांव के साधारण परिवार में जन्मे मनोज सिन्हा ने छात्र राजनीति से अपनी शुरुआत की। बीएचयू के छात्रसंघ अध्यक्ष से लेकर केंद्रीय मंत्री तक पहुंचने का सफर काफी कष्टदायक रहा। उन्हें कई बार हार-जीत के बीच से होकर गुजरना पड़ा। मनोज सिन्हा के परिजन, स्कूली दिनों के मित्र और उनके गांव मोहनपुरा के लोग इस पद के मिलने से काफी खुश हैं।
जिले के पूर्वी छोर पर बसा गांव मोहनपुरवा अब किसी परिचय का मोहताज नहीं है। इसी गांव का लाल न सिर्फ सियासी चक्रव्यूह को भेदकर तीन बार सांसद बना, बल्कि पीएम नरेंद्र मोदी के विश्वसनीय होने के चलते रेल राज्यमंत्री भी रह चुके हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में हारने के बाद से मनोज सिन्हा को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल बनने के बाद सब पर विराम लग चुका है।
देखा जाए तो मोहनपुरा गांव के बीचों-बीच स्थित खपरैल का पुश्तैनी मकान अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। इस घर के आंगन में अपने तीन भाइयों के साथ मनोज सिन्हा ने खेलते-कूदते बचपन बिताया है। घर के चंद कदम दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय से उनकी पढ़ाई शुरू हुई और गांव में ही इंटर तक की पढ़ाई पूरी की।
ग्रामीण बताते हैं कि स्कूली दिनों से ही मनोज सिन्हा गंभीर छात्र रहे हैं और आम बच्चों की तरह कभी शरारत करते नहीं देखे गए। गणित और विज्ञान के विषयों में उत्कृष्ट प्रर्दशन के आधार पर जिले के राजकीय सिटी इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट (विज्ञान वर्ग) में दाखिला लिया।
मनोज सिन्हा के स्कूली दिनों के कई साथी बचपन के दिनों को याद करते हुए बताते है कि, ''सिटी इंटर कॉलेज में आईएससी के पहले वर्ष में ही विश्व हिन्दू परिषद(वीएचपी) के संपर्क में आए और उसके कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगे।" स्कूली दिनों में वीएचपी के संपर्क में आने के बाद मनोज सिन्हा के दिलों दिमाग में राजनीतिक महत्वकांक्षा ने घर कर लिया।
इंटरमीडिएट की परीक्षा उन्होंने फर्स्ट क्लास पास की और घरवालों का सपना पूरा करने बीटेक की पढ़ाई के लिए वह बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पहुंच गए। यहां से उन्होंने छात्र राजनीत में अपना कदम रखा। आगे चलकर वह बीएचयू छात्र संघ के अध्यक्ष भी निर्वाचित हुए।
मनोज सिन्हा का राजनीतिक सफर
एक जुलाई 1959 को गांव मोहनपुरा-गाजीपुर में मनोज सिन्हा का जन्म हुआ। वर्ष 1982 में बीएचयू में छात्रसंघ चुनाव जीतकर राजनीति में उतरे। वर्ष 1989 से 1996 तक वे राष्ट्रीय परिषद के सदस्य बने रहे। वर्ष 1996 में पहली बार सांसद निर्वाचित हुए। इसके बाद 1999 और 2014 में भी जनता ने चुनकर लोकसभा में भेजा। मनोज सिन्हा 13वीं लोक सभा के बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले सदस्यों में से एक रहे हैं। यह अपने सरल स्वभाव के कारण भी जाने जाते हैं।