मणिकर्णिका की रामलीला : जुलूस में सजे 30 लाग विमान, 30 महाकाली के स्वरूप; गलियों में निकली शोभायात्रा
Varanasi News : शोभायात्रा के दौरान मणिकर्णिका घाट की गलियों में भीड़ मौजूद रही। लोग हर-हर महादेव का उद्घोष कर रहे थे। वहीं, झांकियों के ऊपर फूलों की बौछार की जा रही थी।
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मणिकर्णिका घाट की रामलीला में रविवार को नक्कटैया की लीला हुई। इस दौरान काशी की गंगा जमुनी तहजीब के दर्शन भी हुए। नक्कटैया का जुलूस जब दालमंडी पहुंचा तो मुस्लिम बंधुओं ने भी स्वागत किया और शोभायात्रा के साथ-साथ चल दिए। जुलूस में 30 लाग विमान और 30 महाकाली के स्वरूप आकर्षण के केंद्र रहे।
रविवार की रात मणिकर्णिका घाट पर शूर्पणखा भगवान राम और लक्ष्मण के सामने विवाह का प्रस्ताव रखती है। इन्कार करने पर वह क्रोध में आकर मां सीता को मारने के लिए दौड़ पड़ती है। तभी लक्ष्मण उसकी नाक और कान काट लेते हैं। इसके बाद वह रक्त छिड़कती हुई मणिकर्णिका की गलियों से चौक थाने के पास खर दूषण से मदद मांगने पहुंचती है। शूर्पणखा को देख दोनों भाई अपनी राक्षसी सेना लेकर निकल पड़ते हैं।
चौक थाने से शोभायात्रा दालमंडी में प्रवेश करती है। शोभायात्रा में भगवान के स्वरूप, बुढि़या के मुखौटा, भगवान कृष्ण का रास, राम दरबार की झांकी, भगवान शिव का तांडव आकर्षण के केंद्र थे। इसके अलावा शोभ्ाायात्रा में ऊंट, घोड़े, ढोल, शहनाई, डमरू दल भी साथ में चल रहे थे।
शोभायात्रा दालमंडी से हड़हा सराय के मार्ग से गोविंदपुरा, चौक होते हुए मुक्तिद्वार से होते हुए मणिकर्णिका घाट पर पहुंचकर भोर में समाप्त हुई। इस दौरान रामलीला समिति के सुशील कपूर, विभूति नारायण सिंह, मनोज शर्मा, मानवेंद्र सिंह, बिहारी लाल गुप्ता, विजय शंकर पांडेय आदि ने सहयोग किया।
शिव की नगरी में कल कालिया नाग का मान मर्दन
वाराणसी। काशी के लक्खा मेले में शुमार नागनथैया की लीला मंगलवार को होगी। तुलसीघाट पर नागनथैया की लीला की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। गंगा में लीला के लिए लगाए जाने वाले पीपे को पेंट किया जा रहा है। घाट पर जगह-जगह बैरिकेडिंग की तैयारी भी हो रही है।
गोस्वामी तुलसीदास ने 498 साल पहले तुलसीघाट पर श्रीकृष्ण लीला की शुरुआत की थी। मंगलवार को तुलसीघाट पर होने वाली नागनथैया की लीला में गंगा यमुना का रूप धरेंगी और तुलसीघाट गोकुल में तब्दील हो जाएगा। 20 दिनों की लीला में नौवें दिन नागनथैया की लीला होती है। घाट की सीढि़यों से लेकर गंगा की लहरों पर नाव में सवार होकर लोग लीला का आनंद उठाते हैं।
काशीराज परिवार भी इस लीला का पीढि़यों से साक्षी बनता है। तुलसीघाट पर लीला की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सोमवार को काठ के कालिया नाग का रंगरोगन किया जाएगा। वहीं, लीला से पहले संकटमोचन मंदिर से कदंब की डाल भी काटकर लाई जाएगी। विधि-विधान से पूजन के बाद डाल को तुलसीघाट पर गंगा किनारे लगा दिया जाएगा। इसी डाल पर खड़े होकर भगवान कृष्ण गंगा में छलांग लगाएंगे।
संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास ने 498 साल पहले इस लीला की शुरुआत की थी। गोस्वामी तुलसीदास की देन है कि रामलीला के साथ ही भगवान कृष्ण की लीला भी काशी में जीवंत रूप में होती है। श्रीकृष्ण लीला में भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव से लेकर पूतना वध, कंस वध, गोवर्धन पर्वत सहित कई लीलाओं का मंचन किया जाता है।