बिहार के गया में अनोखा 'मंगला बैंक', भिखारियों के इस बैंक में अब बचे हैं सिर्फ 2,200 रुपये
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बिहार के गया में एक ऐसा भी बैंक है, जहां मैनेजर से लेकर ट्रेजरर तक बहाल हैं। लेकिन वे वेतन नहीं लेते। बैंक के सदस्य पैसे की जमा-निकासी करते हैं। वक्त पड़ने पर लोन भी लेते हैं। लेकिन बैंक इसका ब्याज नहीं लेता। गया में यह अनोखा बैंक है ”मंगला बैंक” और यह भिखारियों का बैंक है।
कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी की मार इस बैंक पर भी पड़ी है। लॉकडाउन में बैंक पूरी तरह खाली हो गया है। अब इसमें सिर्फ 2200 रुपये ही बचे हैं। बुरे दिन के लिए करीब छह साल पहले मां मंगलागौरी मंदिर के पास भीख मांगने वाले भिखारियों ने इस बैंक की स्थापना की थी। मंगलवार को मंदिर में सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं की भीड़ होती है। उस दिन भिखारियों को भीख भी ज्यादा मिलती हैं।
उसी भीख में से 50 रुपये की राशि वे लोग हर हफ्ते यानी मंगलवार को बैंक में जमा करते हैं। भिखारियों का मानना है कि मां मंगलागौरी ही उनका पेट पाल रही हैं और मंगलवार इनके लिए शुभ दिन होता है। इसलिए भिखारियों ने इस बैंक का नाम मंगला बैंक रखा। मंगला बैंक के मैनेजर चनारिक पासवान ने बताया कि पहले समिति में 50 भिखारी थे। लेकिन कोरोना संकट में संख्या कम गई है।
चनारिक ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण भीख मांगना भी बंद है। ट्रेजरर नगीना देवी, मुखिया हीरामणि व सचिव मालती देवी ने बताया कि लॉकडाउन के पहले बैंक में एक लाख 20 हजार जमा थे। लेकिन महामारी के कारण भीख नहीं मिलने के कारण घर चलाना मुश्किल हो गया।
इसके बाद समिति के निर्णय पर लॉकडाउन में घर चलाने के लिए सदस्यों को पांच से सात हजार रुपये लोन के रूप में दे दिए गए। जब मंदिर में श्रद्धालु आने लगेंगे और काम ठीक-ठाक चलने लगेगा, तो घीरे-घीरे पैसे वापस लिए जाएंगे। चनारिक ने बताया कि मंगला बैंक का अकाउंट खाली हो गया है। आपात स्थिति के लिए 2200 रुपये बचा कर रखे गए हैं।