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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Malmas 2023 Sawan Purushottam month is going to start just after few days

Malmas 2023: बस कुछ दिन बाद ही शुरू होने वाला है पुरुषोत्तम मास, जानिए कौन से काम हो जाएंगे वर्जित

Sat, 15 Jul 2023 06:45 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 15 Jul 2023 06:45 PM IST
सार

शिव की नगरी काशी में पुरुषोत्तम मास में भगवान पुरुषोत्तम की पूजा की जाती है। भगवान के मंदिर में 33 कोटि देवताओं के निमित्त 33 मालपुआ अर्पित किया जाता है। ज्योतिषविद विमल जैन ने बताया कि अधिक मास की शुरुआत 17 जुलाई को अर्द्धरात्रि 12:02 बजे से हो रही है। 

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Malmas 2023 Sawan Purushottam month is going to start just after few days
18 जुलाई से 16 अगस्त तक अधिमास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

न पुरुषोत्तम समो मास: अर्थात पुरुषोत्तम मास के समान दूसरा कोई महीना नहीं। सावन के साथ अधिमास का संयोग होने से भक्तों पर भगवान विष्णु के साथ ही महादेव की कृपा भी बरसेगी। 18 जुलाई से 16 अगस्त तक अधिमास के दौरान काशी में पंचक्रोशी परिक्रमा का पुण्य पथ भी श्रद्धालुओं से गुलजार रहेगा।

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काशी में पुरुषोत्तम मास में भगवान पुरुषोत्तम की पूजा की जाती है। भगवान के मंदिर में 33 कोटि देवताओं के निमित्त 33 मालपुआ अर्पित किया जाता है। ज्योतिषविद विमल जैन ने बताया कि अधिक मास की शुरुआत 17 जुलाई को अर्द्धरात्रि 12:02 बजे से हो रही है। अधिमास 16 अगस्त को दिन में 3:08 बजे समाप्त होगा।
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पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग पर यात्रा का विधान

ज्योतिषाचार्य आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि अधिक मास में फल प्राप्ति की कामना से किए जाने वाले सभी कार्य वर्जित हो जाते हैं। पुरुषोत्तम भगवान के मंदिर में रोजाना दर्शन पूजन, कथा श्रवण और व्रत नियम से करना चाहिए। कांस्य पात्र में अन्न-वस्त्र और 33 मालपुआ के दान का विशेष महत्व है। इस दौरान काशी के पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग पर यात्रा का विधान है। श्रद्धालु मणिकर्णिका पर संकल्प और बाबा विश्वनाथ की अनुमति लेकर पंचक्रोशी की परिक्रमा करते हैं।


 

मलमास में वर्जित कार्य

कुआं, बावली, तालाब व बाग-बगीचे लगाने की शुरुआत, प्रथम व्रतारंभ, व्रत उद्यापन, देव प्रतिष्ठा, वधू प्रवेश, भूमि, सोना व तुला दान, विशिष्ट यज्ञ, अष्ट का श्राद्ध उपाकर्म, वेदारंभ, वेदव्रत, गुरुदीक्षा, विवाह, उपनयन और चातुर्मासीय व्रतारंभ।
किए जाने वाले कार्य
प्राणघातक बीमारी की निवृत्ति के लिए रुद्र मंत्र जप, व्रतादि अनुष्ठान, कपिल षष्ठी व्रत, अनावृष्टि निवृत्ति के लिए पुरश्चरण, ग्रहण संंबंधी श्राद्ध, दान, जप, पुत्रोत्पत्ति के कर्म, गर्भाधान, पुंसवन, सीमांत संस्कार।

मलमास में क्या खाएं क्या न खाएं

अधिमास में गेहूं, चावल, सफेद धान, मूंग, जौ, तिल, मटर, सतुआ, शहतूत, ककड़ी, केला, घी, कटहल, आम, पीपल, जीरा, सोंठ, सुपारी, आंवला और सेंधा नमक का सेवन करें।

खाने में वर्जित चीजें
मांस, शहद, उड़द की दाल, चौलाई का साग, चावल का मांड़, लहसुन, प्याज, गाजर, मूली, राई, नशीले पदार्थ, तिल का तेल और दूषित अन्न का त्याग करना चाहिए। इसके अलावा इस मास में अपने परिवार के अतिरिक्त अन्यत्र कुछ ना खाएं।

मलमास के 33 देवताएं

विष्णु, जिष्णु, महाविष्णु, हरि, कृष्ण, अधोक्षज, केशव, माधव, राम, अच्युत, पुरुषोत्तम, गोविंद, वामन, श्रीश, श्रीकांत, विश्वसाक्षी, नारायण, मधुरिप, अनिरुद्ध, त्रिविक्रम, वासुदेव, जगद्योनि, अनंत, शेषशायी, संकर्षण, प्रद्युम्न, दैयारि, विश्वतोमुख, जनार्दन, धारावास, दामोदर, अद्यादन और श्रीपति।

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