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हवा का जोर... उड़ी पतंग और भक्काटे का शोर
टीम डिजिटल, वाराणसी
Updated Sat, 14 Jan 2017 09:15 PM IST
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रेती उस पार पतंग उड़ातीं युवतियां
- फोटो : अमर उजाला
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आसमान में इठलाती सतरंगी पतंगे, घरों से लेकर गंगाघाट और उस पार रेती पर भक्काटे की आवाज दिनभर गूंजती रही। यह सिलसिला सुबह से लेकर दिन ढलने तक चलता रहा। पतंगें जमी से लेकर आसमां में तैरती रहीं।
एक दूसरे की पतंग को काटने, पेच लड़ाने की होड़ मची रही। मौका था मकर संक्रांति का। इस पर्व पर युवा, बुजुर्ग, बच्चों और महिलाओं, सभी ने हाथ आजमाए। छतों और मैदानों पर डीजे भी बजते रहे।
गंगा किनारे पतंगबाज कभी-कभी पतंग को नदी के सतह तक ले आते थे और अचानक फिर से मंझे पर झटका देते ही आसमान की ओर उड़ान भर लेती थी। छतों पर डीजे की धुन पर मस्ती के साथ लोगों ने पतंग उड़ाया। महिलाओं ने भी हाथ आजमाए।
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एक दूसरे की पतंग काटने की होड़ मची थी। एक कटी नहीं की दूसरी को ‘छोड़इया’ दे दी जाती थी। जैसे ही दूसरे की पतंग कटती, भक्काटे की आवाज गूंज उठती। कटी पतंग को लूटने वाले भी पीछे नहीं थे।
उड़ती पतंग में लंगड़ (मंझे में पत्थर बांधकर फेंकते और दूसरे को मंझे को फंसाकर खींचना) मारकर खींच लेते ओर पतंग लूट लेते। पूरे दिन दूकानों पर पतंगों और मंझों की खरीदारी होती रही।
नोटबंदी और नए वर्ष की शुभकामनाएं वाली पतंगों की सबसे ज्यादा मांग रही। पक्का महाल की गलियां मंझों से पटी रहीं। सिगरा, महमूरगंज, चौक, गोदौलिया, बेनियाबाग, लंका सहित सभी क्षेत्रों में पतंगबाजी हुई।
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एक दूसरे की पतंग को काटने, पेच लड़ाने की होड़ मची रही। मौका था मकर संक्रांति का। इस पर्व पर युवा, बुजुर्ग, बच्चों और महिलाओं, सभी ने हाथ आजमाए। छतों और मैदानों पर डीजे भी बजते रहे।
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गंगा किनारे पतंगबाज कभी-कभी पतंग को नदी के सतह तक ले आते थे और अचानक फिर से मंझे पर झटका देते ही आसमान की ओर उड़ान भर लेती थी। छतों पर डीजे की धुन पर मस्ती के साथ लोगों ने पतंग उड़ाया। महिलाओं ने भी हाथ आजमाए।
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एक दूसरे की पतंग काटने की होड़ मची थी। एक कटी नहीं की दूसरी को ‘छोड़इया’ दे दी जाती थी। जैसे ही दूसरे की पतंग कटती, भक्काटे की आवाज गूंज उठती। कटी पतंग को लूटने वाले भी पीछे नहीं थे।
उड़ती पतंग में लंगड़ (मंझे में पत्थर बांधकर फेंकते और दूसरे को मंझे को फंसाकर खींचना) मारकर खींच लेते ओर पतंग लूट लेते। पूरे दिन दूकानों पर पतंगों और मंझों की खरीदारी होती रही।
नोटबंदी और नए वर्ष की शुभकामनाएं वाली पतंगों की सबसे ज्यादा मांग रही। पक्का महाल की गलियां मंझों से पटी रहीं। सिगरा, महमूरगंज, चौक, गोदौलिया, बेनियाबाग, लंका सहित सभी क्षेत्रों में पतंगबाजी हुई।
बच्चों ने किया मनोरंजन, सजावटी पतंग की धूम
Makar Sankranti in varanasi
- फोटो : अमर उजाला
पतंगबाजी में बच्चे भी पीछे नहीं रहे। उनके लिए ढेरों कार्टून कैरेक्टर वाले पतंग बाजार में मौजूद रहे। बच्चों ने मोटू-पतलू, भीम, ऑगी वाले पतंग उड़ाए। कुछ बच्चों की पतंगों में घरवालों ने गुब्बारे बांध दिए थे।
सजावटी पतंगों की बाजार में धूम रही। पैकिंग-पन्नी से तैयार छोटी-छोटी पतंगे खूबसूरत लग रही थीं। बाजार में 20 से 30 रुपये में उपलब्ध रहीं। महिलाओं ने इन्हें घर सजाने के लिए खरीदा था।
सड़क या गलियों में दो पहिया वाहनों से सफर कर रहे लोगों में मंझे व पतंग लूटने वालों का डर नजर आया। सड़क पर किधर से भी पतंग लूटने के लिए बच्चे तो बच्चे बूढ़े भी प्रकट हो जाते थे।
इस वजह से लोग सतर्कता से वाहन चलाते दिखे। वहीं मंझों के डर से लोगों ने आज गले में मफलर या सॉल डाल रखा था। गले तक जैके ट बंद होने के साथ ही हेलमेट में ज्यादा लोग नजर आए।
चाहे प्रशासन ने चाइनीज डोर की बिक्री पर पाबंदी लगा रखी है। बावजूद अधिकतर बच्चे चाइनीज डोर के साथ पतंग उड़ाते नजर आए। बच्चों का कहना था कि साधारण डोर वाली पतंगें पल भर में कट जाती हैं।
पतंगबाजी का मजा फूड जोन और डीजे ने दोगुना कर दिया। छतों पर, मैदानों में और गंगा घाट व रेती पर पतंगबाजी ही नहीं बल्कि डीजे के साथ लोग मस्ती करते दिखे। वहीं तरह-तरह के पर्व विशेष व्यंजनों का भरपूर मजा लिया।
सजावटी पतंगों की बाजार में धूम रही। पैकिंग-पन्नी से तैयार छोटी-छोटी पतंगे खूबसूरत लग रही थीं। बाजार में 20 से 30 रुपये में उपलब्ध रहीं। महिलाओं ने इन्हें घर सजाने के लिए खरीदा था।
सड़क या गलियों में दो पहिया वाहनों से सफर कर रहे लोगों में मंझे व पतंग लूटने वालों का डर नजर आया। सड़क पर किधर से भी पतंग लूटने के लिए बच्चे तो बच्चे बूढ़े भी प्रकट हो जाते थे।
इस वजह से लोग सतर्कता से वाहन चलाते दिखे। वहीं मंझों के डर से लोगों ने आज गले में मफलर या सॉल डाल रखा था। गले तक जैके ट बंद होने के साथ ही हेलमेट में ज्यादा लोग नजर आए।
चाहे प्रशासन ने चाइनीज डोर की बिक्री पर पाबंदी लगा रखी है। बावजूद अधिकतर बच्चे चाइनीज डोर के साथ पतंग उड़ाते नजर आए। बच्चों का कहना था कि साधारण डोर वाली पतंगें पल भर में कट जाती हैं।
पतंगबाजी का मजा फूड जोन और डीजे ने दोगुना कर दिया। छतों पर, मैदानों में और गंगा घाट व रेती पर पतंगबाजी ही नहीं बल्कि डीजे के साथ लोग मस्ती करते दिखे। वहीं तरह-तरह के पर्व विशेष व्यंजनों का भरपूर मजा लिया।