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वाराणसी: श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति पर लगाई आस्था की डुबकी, घाटों पर उमड़ी भीड़
Mon, 14 Jan 2019 11:04 AM IST
shashikant misra
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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Published by: shashikant misra
Updated Mon, 14 Jan 2019 11:04 AM IST
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गंगा स्नान
- फोटो : अमर उजाला
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मकर संक्रांति पर सोमवार को काशी में भोर से गंगा घाट पर स्नान करने वाले और बाबा के दरबार में दर्शन पूजन करने वालों की भीड़ लगी रही। इससे पूरा गोदौलिया क्षेत्र श्रद्धालुओं से पटा रहा। मंदिर तक लंबी कतार लगी रही। इससे पूरा मंदिर क्षेत्र बाबा के जयकारे से गुंजायमान रहा।
हालांकि संक्रांति का पर्व मंगलवार को मनाया जाएगा। इसको देखते हुए घाट से लेकर मंदिर तक व्यवस्था की गई है। परंपरागत रूप से कुछ लोगों ने मकर संक्रांति पर्व को सोमवार को ही मनाया। इससे भोर से गंगा तटों पर श्रद्धालु पहुंच गए स्नान कर सूर्य को प्रणाम किया।
अधिकतर श्रद्धालु बाबा दरबार में दर्शन करने के लिए पहुंच गए। इससे सरस्वती फाटक, छत्त्ताद्वार और ढुंढराज गणेश प्रवेश द्वारा पर लंबी लंबी कतारें लगी रही। भीड़ इस कदर थी कि बांस फाटक तक लंबी कतार लगी रही।
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उधर, कुंभ का पहला शाही स्नान 15 जनवरी को है। इसलिए प्रयागराज जाने वाले श्रद्धालु एक दिन पहले ही काशी पहुंचे। महाराष्ट्र, गुजरात के अलावा दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं ने बताया कि प्रयागराज में शाही स्नान से पहले बाबा विश्वनाथ के दर्शन पूजन और गंगा स्नान करने आ गए। इसके बाद हम लोग कुंभ का शाही स्नान करेंगे और फिर अपने अपने प्रदेश को रवाना हो जाएंगे।
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हालांकि संक्रांति का पर्व मंगलवार को मनाया जाएगा। इसको देखते हुए घाट से लेकर मंदिर तक व्यवस्था की गई है। परंपरागत रूप से कुछ लोगों ने मकर संक्रांति पर्व को सोमवार को ही मनाया। इससे भोर से गंगा तटों पर श्रद्धालु पहुंच गए स्नान कर सूर्य को प्रणाम किया।
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अधिकतर श्रद्धालु बाबा दरबार में दर्शन करने के लिए पहुंच गए। इससे सरस्वती फाटक, छत्त्ताद्वार और ढुंढराज गणेश प्रवेश द्वारा पर लंबी लंबी कतारें लगी रही। भीड़ इस कदर थी कि बांस फाटक तक लंबी कतार लगी रही।
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उधर, कुंभ का पहला शाही स्नान 15 जनवरी को है। इसलिए प्रयागराज जाने वाले श्रद्धालु एक दिन पहले ही काशी पहुंचे। महाराष्ट्र, गुजरात के अलावा दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं ने बताया कि प्रयागराज में शाही स्नान से पहले बाबा विश्वनाथ के दर्शन पूजन और गंगा स्नान करने आ गए। इसके बाद हम लोग कुंभ का शाही स्नान करेंगे और फिर अपने अपने प्रदेश को रवाना हो जाएंगे।