Mahashivratri: 45 घंटे बाद बाबा विश्वनाथ ने किया विश्राम, तीन लाख से अधिक भक्तों ने लगाई हाजिरी
महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ के दरबार में शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला रविवाको भी जारी रहा। भक्तों के प्रेम में बाबा विश्वनाथ ने लगातार 45 घंटे तक दर्शन दिए। रविवार रात तक तीन लाख से ज्यादा भक्तों ने बाबा का दर्शन पूजन और जलाभिषेक किया।
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महाशिवरात्रि को रात भर भक्तों के साथ जागने के बाद महादेव ने रविवार को 45 घंटे बाद विश्राम किया। शनिवार को मंगला आरती से शुरू हुआ दर्शन पूजन का सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रहा। चार प्रहर की आरती के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आ रहे हैं। रविवार की देर शाम तक ही तीन लाख से अधिक शिवभक्तों ने बाबा दरबार में हाजिरी लगाई। इससे पहले शनिवार की देर रात 6.88 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया था।
रविवार भोर में तीन बजे के बाद बाबा के दरबार में श्रद्धालुओं की कतार कुछ देर के लिए थमी। तृतीय प्रहर की आरती तड़के तीन बजे शुरू होकर 4:25 पर पूरी हुई। आरती पूर्ण होने के साथ ही श्रद्धालुओं का रेला भी बाबा दरबार पहुंच गया। इसके बाद चतुर्थ प्रहर की आरती सुबह पांच बजे से शुरू होकर सुबह 6:15 बजे तक चली। तब तक बाबा का दरबार श्रद्धालुओं से भर चुका था।
हर-हर महादेव के जयघोष से कपाट बंद हुए
मंदिर चौक पर गंगा द्वार और सरस्वती फाटक से आने वाले श्रद्धालु कतारबद्ध थे। वहीं, ढुंढिराज और ज्ञानवापी से आने वाले श्रद्धालुओं का रेला भी बढ़ता गया। सुबह नौ बजे तक 75 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा दरबार में हाजिरी लगाई।
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दोपहर होने तक श्रद्धालुओं का दबाव कम हुआ और दो बजे के बाद फिर से श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई। देर शाम तक श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला अनवरत जारी थी। शयन आरती के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भव्य आरती के बाद हर-हर महादेव के जयघोष के साथ मंदिर के कपाट बंद हुए।
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पंचक्रोशी की पुण्य यात्रा: मणिकर्णिका से लेकर कपिलधारा तक रही शिवभक्तों की अटूट कतार
पैरों में छाले, फिर भी हर-हर महादेव... का जयघोष करते हुए श्रद्धालुओं ने पंचक्रोशी के पुण्य पथ की यात्रा पूरी कर ली। रविवार को बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर श्रद्धालुओं ने पुण्य यात्रा को विश्राम दिया। तीर्थयात्रा के संकल्प की पूर्णाहुति की।
मणिकर्णिका से संकल्प लेकर आरंभ हुई पंचक्रोशी की यात्रा के पांचों पड़ाव पर श्रद्धालुओं का अटूट रेला नजर आया। 84 किलोमीटर की इस यात्रा को श्रद्धालुओं ने बिना रुके, बिना थके पूरा किया। दरअसल, शुक्रवार से शुरू हुई यात्रा शनिवार को और शनिवार से यात्रा शुरू करने वालों की यात्रा रविवार देर शाम पूरी हुई।
तीर्थयात्रियों ने मणिकर्णिका तीर्थ पर स्नान करने के बाद बाबा दरबार में हाजिरी लगाकर पंचक्रोशी परिक्रमा को विश्राम दिया। थकान और बिना जूता-चप्पल यात्रा पूरी करने वाले तमाम श्रद्धालुओं के पैरों में छाले पड़ गए थे, लेकिन बाबा के दर्शन पाकर हर तीर्थयात्री के चेहरे पर संतोष था। एक दूसरे को सहारा देते, महादेव का नाम जपते श्रद्धालु आगे बढ़े और भगवान भोले के दर्शन-पूजन का अपना लक्ष्य पूरा किया।