{"_id":"693887d0e38ba035b1054ed7","slug":"mahamanas-bharat-ratna-seen-with-sculpture-gold-coins-varanasi-news-c-20-vns1021-1215405-2025-12-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: मूर्तिकला, स्वर्ण मुद्राओं के साथ देखा महामना का भारत रत्न","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: मूर्तिकला, स्वर्ण मुद्राओं के साथ देखा महामना का भारत रत्न
विज्ञापन
वाराणसी। काशी तमिल संगमम के चौथे संस्करण में तमिलनाडु से आए प्रतिनिधि मंडल ने बीएचयू स्थित भारत कला भवन का भ्रमण किया। उन्होंने पारंपरिक तमिल नृत्य और खेलों के माध्यम से सांस्कृतिक आदान–प्रदान का आनंद लिया। प्रतिनिधियों ने हड़प्पा, गुप्ता और सिंधु सभ्यता की मूर्तिकला एवं मृदभांड के साथ-साथ चित्र वीथिका में मुगल शैली की पेंटिंग, निधि वीथिका में गुप्तकालीन स्वर्ण मुद्राएं और महामना को मिला भारत रत्न देखा।
कुदाल चलाकर लिया गेहूं की बोआई का अनुभव
तमिलनाडु से आए किसानों ने बीएचयू के कृषि अनुसंधान फार्म में कुदाल चलाकर गेहूं की बोआई का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। किसान शशिकांत राय ने प्रिसिजन फार्मिंग, ड्रोन-आधारित बुवाई और शून्य जुताई तकनीक के लाभ साझा किए। इसके बाद ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में आयोजित संगोष्ठी में शामिल हुए। संगोष्ठी में शस्य विज्ञान विभाग के प्रो. निखिल कुमार सिंह ने बताया कि धान की बोआई बारिश शुरू होने से ठीक पहले करने से सिंचाई और श्रम लागत कम होती है।उन्होंने एफपीओ मॉडल को मजबूत करने और कृषि विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाने की जरूरत पर भी बल दिया।
विज्ञापन
कुदाल चलाकर लिया गेहूं की बोआई का अनुभव
तमिलनाडु से आए किसानों ने बीएचयू के कृषि अनुसंधान फार्म में कुदाल चलाकर गेहूं की बोआई का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। किसान शशिकांत राय ने प्रिसिजन फार्मिंग, ड्रोन-आधारित बुवाई और शून्य जुताई तकनीक के लाभ साझा किए। इसके बाद ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में आयोजित संगोष्ठी में शामिल हुए। संगोष्ठी में शस्य विज्ञान विभाग के प्रो. निखिल कुमार सिंह ने बताया कि धान की बोआई बारिश शुरू होने से ठीक पहले करने से सिंचाई और श्रम लागत कम होती है।उन्होंने एफपीओ मॉडल को मजबूत करने और कृषि विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाने की जरूरत पर भी बल दिया।
विज्ञापन