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दोस्तों संग सिकंदर फैला रहे हैं शिक्षा का उजियारा
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वाराणसी। काशी विद्यापीठ ब्लॉक के मढ़ौली गांव के सिकंदर ने मन में शिक्षा का अलख जगाने का जो सपना मार्च 2019 में देखा था, अब वह साकार होने लगा है। प्राथमिक विद्यालय के 52 बच्चों के साथ निशुल्क कोचिंग खोलकर शिक्षा का अलख जगाने का बीड़ा उठाने वाले सिकंदर अब चार अध्यापकों और 62 बच्चों के साथ शिक्षा का उजियारा फैला रहे हैं।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पीजी के छात्र सिकंदर के साथ अब उसके दोस्त किशन मौर्या, जाकिर हुसैन, फरहान कुरैशी और बीएचयू की छात्रा शुभ्रा तिवारी भी जुड़ गए हैं। सिकंदर ने बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया और नि:शुल्क कोचिंग खोल दिया लेकिन आर्थिक बोझ बढ़ता गया तो परेशान हो गया। इसके बाद अपनी पॉकेट मनी और विश्वविद्यालय से मिली छात्रवृत्ति से दो कमरा भी किराए पर लिया। बच्चों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक को भी रखा। जब आसपास के लोगों को इसकी जानकारी हुई तो न केवल सिकंदर और उनकी टीम के सदस्यों के इस प्रयास को सराह रहे हैं बल्कि आर्थिक मदद करना भी शुरू कर दिए हैं। पूरी टीम का जोश, जज्बात देख मड़ाव निवासी सभाजीत पटेल बच्चों को कौशल विकास के साथ ही सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दे रहे हैं। सिकंदर के पिता शंभूनाथ गाय पालकर परिवार का भरण पोषण करते हैं।
कक्षा एक से सात तक के बच्चे कर रहे पढ़ाई
सिकंदर ने बताया कि पहले तो लोग अपने बच्चों को इस कोचिंग में भेजने से घबराते थे, लेकिन जब यहां के बच्चों की योग्यता और उपलब्धियों की जानकारी मिली तो और भी बच्चे आने लगे। कक्षा 1 से 7 तक के नाथूपुर ,लखनपुर, चंदापुर, मढौली व आसपास के गांवों के लगभग दर्जनों बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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प्राथमिक विद्यालय और मॉडर्न विद्यालयों के बच्चों के बीच की खाई को पाटने के उद्देश्य से यह निशुल्क कोचिंग शुरू किया गया है। मॉडर्न विद्यालयों के लगभग सभी बच्चों को कोचिंग दी जाती है, लेकिन प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है। -सिकंदर मौर्या
नि:शुल्क कोचिंग के माध्यम से समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि कुछ भी असंभव नहीं है। सब कुछ संभव है क्योंकि अब तक का इतिहास रहा है कि देश के प्रशासनिक सेवाओं में जाने वाले ज्यादातर बच्चे गांव से और इन्हीं प्राथमिक विद्यालयों से निकलकर पहुंचे हैं। -जाकिर हुसैन
दिन में विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई करते हैं और शाम को 5 से 7 बजे तक का समय बच्चों के लिए रिजर्व रखा गया है। दो घंटे बच्चों के साथ बिताने और इनको पढ़ाने के बाद काफी खुशियां मिलती हैं। परिवार का भी पूरा सहयोग मिलता है। -शुभ्रा
प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों में भी असीम प्रतिभा है। इनको पढ़ाने के बाद बहुत खुशी होती है। किसी माडर्न विद्यालय के बच्चों से यह बच्चे कहीं कमजोर नहीं है। -फरहान
क्या हैं खास
शिक्षा को रोचक बनाने के लिए समय-समय पर सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग
हर महीने में दो बार परीक्षा के साथ ही बच्चों के माता-पिता के साथ बैठक
बच्चों के बीच खेलकूद, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताओं का आयोजन
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पीजी के छात्र सिकंदर के साथ अब उसके दोस्त किशन मौर्या, जाकिर हुसैन, फरहान कुरैशी और बीएचयू की छात्रा शुभ्रा तिवारी भी जुड़ गए हैं। सिकंदर ने बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया और नि:शुल्क कोचिंग खोल दिया लेकिन आर्थिक बोझ बढ़ता गया तो परेशान हो गया। इसके बाद अपनी पॉकेट मनी और विश्वविद्यालय से मिली छात्रवृत्ति से दो कमरा भी किराए पर लिया। बच्चों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक को भी रखा। जब आसपास के लोगों को इसकी जानकारी हुई तो न केवल सिकंदर और उनकी टीम के सदस्यों के इस प्रयास को सराह रहे हैं बल्कि आर्थिक मदद करना भी शुरू कर दिए हैं। पूरी टीम का जोश, जज्बात देख मड़ाव निवासी सभाजीत पटेल बच्चों को कौशल विकास के साथ ही सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दे रहे हैं। सिकंदर के पिता शंभूनाथ गाय पालकर परिवार का भरण पोषण करते हैं।
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कक्षा एक से सात तक के बच्चे कर रहे पढ़ाई
सिकंदर ने बताया कि पहले तो लोग अपने बच्चों को इस कोचिंग में भेजने से घबराते थे, लेकिन जब यहां के बच्चों की योग्यता और उपलब्धियों की जानकारी मिली तो और भी बच्चे आने लगे। कक्षा 1 से 7 तक के नाथूपुर ,लखनपुर, चंदापुर, मढौली व आसपास के गांवों के लगभग दर्जनों बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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प्राथमिक विद्यालय और मॉडर्न विद्यालयों के बच्चों के बीच की खाई को पाटने के उद्देश्य से यह निशुल्क कोचिंग शुरू किया गया है। मॉडर्न विद्यालयों के लगभग सभी बच्चों को कोचिंग दी जाती है, लेकिन प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है। -सिकंदर मौर्या
नि:शुल्क कोचिंग के माध्यम से समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि कुछ भी असंभव नहीं है। सब कुछ संभव है क्योंकि अब तक का इतिहास रहा है कि देश के प्रशासनिक सेवाओं में जाने वाले ज्यादातर बच्चे गांव से और इन्हीं प्राथमिक विद्यालयों से निकलकर पहुंचे हैं। -जाकिर हुसैन
दिन में विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई करते हैं और शाम को 5 से 7 बजे तक का समय बच्चों के लिए रिजर्व रखा गया है। दो घंटे बच्चों के साथ बिताने और इनको पढ़ाने के बाद काफी खुशियां मिलती हैं। परिवार का भी पूरा सहयोग मिलता है। -शुभ्रा
प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों में भी असीम प्रतिभा है। इनको पढ़ाने के बाद बहुत खुशी होती है। किसी माडर्न विद्यालय के बच्चों से यह बच्चे कहीं कमजोर नहीं है। -फरहान
क्या हैं खास
शिक्षा को रोचक बनाने के लिए समय-समय पर सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग
हर महीने में दो बार परीक्षा के साथ ही बच्चों के माता-पिता के साथ बैठक
बच्चों के बीच खेलकूद, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताओं का आयोजन