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भगवान धन्वंतरि: काशी में निभाई गई 328 साल पुरानी परंपरा, दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु; सुरक्षा रही दुरुस्त

Sun, 19 Oct 2025 05:22 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 19 Oct 2025 05:22 PM IST
सार

Varanasi News: आम श्रद्धालुओं ने भी रजत के सिंहासन पर विराजमान, चारों हाथों में अमृत कलश, चक्र, शंख एवं जोंक लिए हुए भगवान धन्वंतरि की 328 साल पुरानी प्रतिमा का दर्शन किया।

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Lord Dhanvantari 328-year-old tradition observed in Kashi devotees arriving for darshan security tight
भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा का दर्शन किया गया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Dhanwantari Puja 2025: धनतेरस के शुभ अवसर अवसर पर कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को सुड़िया स्थित राजवैद्य स्व. पंडित शिव कुमार शास्त्री के धन्वंतरि निवास पर भगवान धन्वंतरि पूजनोत्सव हुआ। 328 साल पुरानी पूजन की परंपरा को पांचवी पीढ़ी ने निभाया।

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शनिवार को दोपहर 12 बजे भगवान धन्वंतरि के मंदिर का कपाट खोला गया। चांदी के सिंहासन पर विराजमान भगवान धन्वंतरि को विशिष्ट चमत्कारी औषधियों जैसे रस, स्वर्ण, हीरा, माणिक, पन्ना, मोती तथा जड़ीबूटियों में केशर, कस्तूरी, अंबर, अश्वगंधा, अमृता, शंखपुष्पी, मूसली का विशेष भोग लगाया गया।  
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भगवान का हिमालय से मंगवाए गए विशेष फूलों के साथ ही आर्किड, लिली, गुलाब, ग्लेडियोलस, रजनीगंधा, तुलसी और गेंदा से शृंगार किया गया। तत्पश्चात शास्त्रोक्त विधि से पूजन एवं आरती राजवैद्य पं. रामकुमार शास्त्री, नंदकुमार शास्त्री,समीर कुमार शास्त्री, उत्पल शास्त्री, आदित्य, मिहिर एवं कोमल शास्त्री ने सपरिवार उतारी।

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धन्वंतरि कूप पर हुआ पूजन
काशी मंडल वैद्य सभा की ओर से धन्वंतरि जयंती के अवसर पर महामृत्युंजय मंदिर परिसर स्थित धन्वंतरि अमृत कूप एवं धनवत्रेश्वर महादेव पर राष्ट्र स्वास्थ्य के लिए विशेष पूजन, अर्चन और हवन का आयोजन किया गया। वैद्य समाज के साथ ही चिकित्सा संगठनों ने वैदिक ऋचाओं के साथ आहुतियां अर्पित कीं। मुख्य अतिथि आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु ने कहा कि यह धन्वंतरि कूप विश्व में अद्वितीय है। 

आरोग्य की कामना की
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के स्वास्थ केंद्रम में भगवान धन्वंतरि का पूजन हुआ। छात्रकल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेश कुमार मिश्र के द्वारा धनतेरस पर्व पर भगवान धन्वंतरि का विधि पूर्वक पूजन किया गया। इस अवसर पर धन्वंतरि पूजन कर विश्व और समूचे संस्था को आरोग्य युक्त बनाने की कामना की गई। 

वक्ताओं ने कहा कि धन्वंतरि जयंती के अवसर पर आयुर्वेद के देवता धनवंतरी की पूजा की जाती है। यह दिन चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान देने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने कहा कि स्वस्थ जीवन जीने के लिए हमें आयुर्वेद और योग को अपनाना चाहिए। भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के देवता हैं और स्वास्थ्य एवं आरोग्य के लिए उनकी पूजा की जाती है। 

महामृत्युंजय मंदिर में आयुर्वेद के जनक का आवाहन
धन त्रयोदशी पर शनिवार को महामृत्यंजय मंदिर स्थित धन्वंतरि कूप पर भगवान धन्वंतरि का आवाहन किया गया। धन्वंतरि कूप का पूजन करने के साथ ही मंत्रों से कूप के जल को ऊर्जित किया गया। दारानगर स्थित महामृत्युंजय महादेव मंदिर परिसर में स्थित धन्वंतरि कूप अपने आप में अनोखी धार्मिक और आयुर्वेदिक मान्यता रखता है।

माना जाता है कि यह कूप देवताओं के वैद्य भगवान धन्वंतरि द्वारा निर्मित किया गया था, जिन्होंने इसमें अपनी दिव्य औषधियां और जड़ी-बूटियां समर्पित की थीं। स्थानीय पौराणिक कथाओं के अनुसार, धन्वंतरि और नागराज तक्षक के बीच हुए एक संघर्ष के बाद भगवान ने इस कूप के जल को औषधीय गुणों से भर दिया था।

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