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भगवान बुद्ध को गुरु पूर्णिमा के दिन ही हुई थी ज्ञान की प्राप्ति, बौद्ध धर्म के लिए है बहुत पवित्र दिन

Sat, 24 Jul 2021 05:25 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 24 Jul 2021 05:25 PM IST
सार

आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा और धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस भी कहा जाता है। इसी दिन पांच शिष्यों को ज्ञान मिला था। जिस दिन उन्होंने अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे धम्म चक्क प्रवत्तन सूत्त कहते हैं। भगवान बुद्ध गुरुओं के भी गुरु थे इसलिए हमारे देश में इस दिन को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।
 

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Lord Buddha had attained enlightenment on the day of Guru Purnima
बुद्ध

विस्तार

वाराणसी में बौद्ध धर्म के लिए आषाढ़ पूर्णिमा बहुत ही पवित्र दिन है। आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा और धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस भी कहा जाता है। बोधिसत्व राजकुमार सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की आयु में इसी दिन अपना गृह त्याग किया था और सत्य की खोज में निकल पड़े थे। छह साल की कठिन तपस्या के बाद उनको वैशाख पूर्णिमा के दिन ज्ञान प्राप्त हुआ। 49 दिनों तक निर्वाण सुख में डूबे रहने के बाद सिद्धार्थ गौतम ने यह तय किया कि उन्होंने जो ज्ञान हासिल किया है उसे लोगों तक पहुंचाना है। लोगों को धम्म सिखाना है।

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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय केश्रमण विद्या संकाय के विभागाध्यक्ष प्रो. रमेश प्रसाद ने बताया कि ज्ञान प्राप्ति और निर्वाण सुख पूरा करने के बाद 11 दिनों में लगातार पैदल चल कर वह वाराणसी के ऋ षिपत्तन मृगदाय वन में पहुंचे। अपने पांचों साथियों को धम्म उपदेश दिया। जिसके बाद वो पांचों शिष्य अर्हत हो गए। वहीं, ऋषिपत्तन मृगदाय वन में वह बुद्ध की सेवा करने लगे।
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इसी वन में बुद्ध ने पांचों शिष्यों के साथ पहला वर्षावास किया। जिस दिन उन्होंने अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे धम्म चक्क प्रवत्तन सूत्त कहते हैं। भगवान बुद्ध गुरुओं के भी गुरु थे इसलिए हमारे देश में इस दिन को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

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भगवान बुद्ध केउपदेश त्रिपिटक में है समाहित
प्रो. रमेश प्रसाद ने बताया कि महात्मा बुद्ध द्वारा बताए गए उपदेश सभी के लिए महत्व रखते हैं। उनके और बौद्ध धर्म के बारे मे जितनी भी जानकारी है वह सब पिटाका में मौजूद है। बौद्ध धर्म के मूल उपदेशों का प्रचार भी त्रिपिटक से किया जाता है। पिटक तीन भागों में विभाजित हैं। सूत्त पिटक, विनय पिटक, अभिदम पिटक।

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