सुविधा: इंटरनेट की बाध्यता खत्म करेगी आईआईटी बीएचयू की लोरावन तकनीकी, आपदाओं में हो सकेगा संचार
आईआईटी बीएचयू ने इंटरनेट पर आश्रित रहने की बाध्यता समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
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आईआईटी बीएचयू की लोरावन तकनीकी इंटरनेट पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति कम करेगी। आईआईटी ने इंटरनेट पर आश्रित रहने की बाध्यता समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। अनुसंधान के उद्देश्यों से परिसर के अंदर लोरावन की सुविधा स्थापित कर रहा है।
लोरावन का उपयोग करके बहुत कम बिजली की खपत (बैटरी के माध्यम से) के साथ सुरक्षित डेटा को एक स्थान से दूसरे स्थान पर साझा कर सकता है। इस प्रकार, उपयोगकर्ताओं को पांच साल बाद भी बैटरी को बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इस अनुसंधान कार्य का नेतृत्व डॉ. हरि प्रभात गुप्ता ने अपने शोध दल डॉ. तनिमा दत्ता, डॉ. प्रीति कुमारी, रमाकांत और शुभम पांडेय के साथ किया ।
वित्तीय लागत का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं
लोरावन तकनीक के जरिए उपयोगकर्ताओं को कोई वित्तीय लागत का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। यह बच्चों की निगरानी करने, प्राकृतिक आपदाओं, कृषि क्षेत्र, वाहन ट्रैकिंग, बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और कई अन्य मामलों में त्वरित संचार में मदद करती है।
बच्चों की ट्रैकिंग और ट्रेसिंग आसानी से संभव
इससे दैनिक उपयोग के स्मार्टफोन और लोरावन की मदद से माता-पिता द्वारा भीड़ भरे माहौल जैसे- कुंभ मेला आदि में बच्चों की ट्रैकिंग और ट्रेसिंग आसानी से संभव हो जाएगी।
निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन ने कहा कि संस्थान की मौजूदा बहु-मंजिला इमारतों को लोरावन सक्षम स्मार्ट बिल्डिंग में बदला जा रहा है। इससे बिजली, पानी एवं गैस मीटर की स्वचालित रीडिंग, उपलब्ध वाहन पार्किंग स्थानों की जांच, कूड़ेदान की सफाई व निपटारे में मदद और बगीचों में स्वचालित पानी का छिड़काव करने में मदद मिलेगी।
प्राकृतिक आपदा में होगा बेहतर संचार
लोरावन तकनीक उत्तराखंड की बाढ़, चक्रवात ताऊते जैसी प्राकृतिक आपदाओं के मामले में भी कारगर सिद्ध होगी। आपदा के दौरान जहां संचार नेटवर्क के बुनियादी ढांचे पूरी तरह से ध्वस्त हो गए थे, वहां भी लोरावन एक त्वरित और संभावित संचार समाधान है। लोरावन अन्य देशों के उन पर्यटकों तक भी अपनी पहुंच बढ़ा देगा जिनके पास अपनी यात्रा के दौरान सक्रिय इंटरनेट कनेक्शन नहीं है।
स्मार्टफोन से भी जुड़ सकेगा
संस्थान डिवाइस डिजाइनिंग, गेटवे प्लेसमेंट और डिवाइस डिप्लोयमेंट और किसी भी सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले स्मार्टफोन के साथ इसे जोड़ा जा सकता है। इस शोध का मुख्य फोकस डिवाइस की लागत को एक किफायती लागत तक कम करना है जिसे भारतीय उपयोगकर्ता आसानी से चला सकें। आईआईटी बीएचयू परिसर में लोरावन पंजीकृत स्टार्टअप कंपनियों को अपने आईओटी उत्पादों को विकसित करने में भी मदद करेगा।