फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Looking for great grandfather's bio came for search of ancestors from trinidad

परदादा का बायोडाटा देखकर सात समंदर पार से आए पूर्वजों की तलाश में

Mon, 09 Mar 2020 01:28 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Mon, 09 Mar 2020 01:28 AM IST
विज्ञापन
Looking for great grandfather's bio came for search of ancestors from trinidad
गाजीपुर के दुबिहा गांव में पहुंचे विदेशी दंपति - फोटो : अमर उजाला।

गाजीपुर दुबिहा क्षेत्र के उतरांव गांव में शनिवार को विदेश से आए पांचवीं पीढ़ी के डेविड लखन तथा उनकी पत्नी गीता लखन अपने भाई, भतीजों तथा सगे संबंधियों को खोजते हुए पहुंचे तो उनका स्वागत करते कई परिवारों के लोग अघा नहीं रहे थे। थोड़ी देर पहले विदेशी लग रहा यह दंपती इसी गांव और माटी से जुड़ा निकला।

विज्ञापन


गांव में उनके सगे निकले शिवजी यादव, भगवान यादव आदि के परिजन सहित जैसे पूरा गांव ही उनसे दो बात करने को लालायित हो गया। हालांकि डेविड और गीता गांव में करीब दो ही घंटे रहे। जब वह जाने लगे तो सभी की आंखें छलछला गईं। गांव के लिए कुछ खास करने और जल्द ही फिर आने का वादा कर विदेशी दंपती वाराणसी के लिए रवाना हो गया।
विज्ञापन


उतरांव के शिवजी यादव के परदादा के भाई लखन अहीर को 1888 में अंग्रेज गिरमिटिया मजदूर के रूप में त्रिनिदाद एंड टोबैगो ले गए थे। वहां अंग्रेजों की ओर से लाए गए इन भारतीय नागरिकों से गन्ना की खेती कराने के साथ ही गन्ना मिलों में काम करवाया जाता था। वहां से भारतीय लोग वापस नहीं आ पाए और बाद में उसी देश में बस गए और वहां के निवासी हो गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


लखन अहीर की चौथी पीढ़ी के डेविड लखन ने अपने पूर्वजों की जानकारी प्राप्त करने की सोची और वह इसे जरूरी काम समझ कर करने लगे। हालांकि इस बीच उन्होंने वेस्टइंडीज में अपना कारोबार बढ़ा लिया और वहीं बस भी गए लेकिन पूर्वजों से मुलाकात का जुनून उनके भीतर समाया रहा।
 

Looking for great grandfather's bio came for search of ancestors from trinidad
Sea Beach - फोटो : Pixabay

करीब 132 वर्षों के बाद अपने परिवार के सदस्यों का पता लगाकर करीब पांच बजे टूरिस्ट वाहन से वह उतराव गांव में अपने रिश्ते में भाई शिवजी यादव और श्री भगवान यादव के घर पर पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी गीता लखन तथा वाराणसी से एक गाइड भी था। गांव पहुंच कर जब वह अपने भाइयों से मिले तो दोनों ओर से प्रेम का रस फूट पड़ा। गांव का नजारा भी बदल गया था। डेविड गांव के कई लोगों से मिले। परिजनों को अपने देश बुलाया। कहा कि वह गांव के लिए भी कुछ करेंगे। करीब दो घंटे प्रवास के बाद वह फिर वाराणसी चले गए।
 

उतरांव गांव में दो घंटे के अपने प्रवास में ही डेविड लखन तथा गीता लखन ने लोगों से इतनी आत्मीयता बना ली कि परिजन उनसे काफी घुल मिल गए। उत्साह से भरपूर डेविड ने बताया कि 1888 में जब अंग्रेज उनके परदादा के पिता लखन अहीर को लेकर त्रिनिदाद एंड टोबैगो आए तो उस समय उनका इंग्रेशन पास बनाया गया था। उस समय वहां उनका एक बायोडाटा तैयार किया जिसमें देश के नाम के साथ ही गांव का नाम तथा कुछ अन्य विवरण भी लिखा हुआ था।

इसे देखने के बाद ही उन्हें भारत में रह रहे अपने पूर्वजों को खोजने और मिलने का ख्याल आया। इस इंग्रेशन पास के आधार पर त्रिनिदाद की सरकार से संपर्क किया और सारा रिकार्ड खंगाला, जिससे बहुत सी जानकारियां मिलीं। इसके बाद, उन्होंने भारत के एक एनजीओ के माध्यम से गाजीपुर के अभिलेखागार से संपर्क किया। इसके बाद उतरांव गांव में रह रहे सभी परिजनों के बारे में जानकारी मिली।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed