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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Long queues for the last darshan of Yoga Guru Shivanand PM and CM also expressed condolences

पंचतत्व में विलिन हुए योग गुरु: 8 घंटे में 3 बैठक, 46.10 घंटे बाद हरिश्चंद्र घाट पर 6 शिष्यों ने दी मुखाग्नि

Mon, 05 May 2025 12:08 AM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: नितीश कुमार पांडेय Updated Mon, 05 May 2025 12:08 AM IST
सार

129 वर्ष के योग गुरू के निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर जब कबीर नगर स्थित उनके आश्रम पर लाया गया तब देश-विदेश से शिष्य पहुंचे। वहीं एक तरफ शिष्यों की टोली उनकी अंतिम यात्रा निकालने की तैयारी कर रहे थे तो दूसरी ओर कुछ शिष्य उनकी समाधि बनाने की मांग कर रहे थे। 

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Long queues for the last darshan of Yoga Guru Shivanand PM and CM also expressed condolences
योग गुरू को श्रद्धांजलि देते मंत्री दयाशंकर मिश्र - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

योग गुरु बाबा शिवानंद के अंतिम संस्कार पर विवाद सोमवार को थम गया। आठ घंटे में तीन-तीन बैठक के बाद शिष्य हरिश्चंद्र घाट पर योग गुरु का अंतिम संस्कार कराने के लिए तैयार हो गए। योग गुरु के निधन के 46.10 घंटे के बाद सोमवार की शाम हरिश्चंद्र घाट पर छह शिष्यों ने उन्हें मुखाग्नि दी। उनका अस्थि कलश शिष्यों के अंतिम दर्शन के लिए आश्रम में ही रखा जाएगा।

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योगगुरु का निधन तीन मई रात 8:45 बजे बीएचयू में इलाज के दौरान हुआ था।सोमवार की सुबह से पद्मश्री शिवानंद के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद शुरू हो गया। एक तरफ शिष्यों की टोली उनकी अंतिम यात्रा निकालने की तैयारी कर रहे थे तो दूसरी ओर कुछ शिष्य उनकी समाधि बनाने की मांग कर रहे थे। वहीं, मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार कराने की बात कर रहे थे।
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आठ घंटे में लगातार तीन बार प्रशासनिक अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शिष्यों के बीच अंतिम संस्कार पर निर्णय के लिए बैठक हुई। कुछ शिष्यों ने कहा कि उन्हें शूलटंकेश्वर तो कुछ शिष्यों ने कहा कि उनको नमो घाट के पास जमीन मिली है। वहीं, पर वह बाबा को समाधि देंगे। बाबा शिवानंद के छह शिष्यों ने प्रशासन के सामने दो मांगें रखीं। इसमें पहली इच्छा बाबा को भू समाधि देने और दूसरी हरिश्चंद्र घाट पर दाह संस्कार करने की थी।
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शिष्यों का कहना था कि बाबा की अंतिम इच्छा थी कि गंगा किनारे जल समाधि दी जाए। हरिश्चंद्र या मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार किया जाए। विवाद सुलझता न देख कर्नाटक से आई एक शिष्या अधिकारियों के सामने पहुंची और रोने लगी। उसने कहा कि आप लोग ही निर्णय लीजिए। बाबा का शव कई घंटों से पड़ा है और कुछ लोग इस पर राजनीति कर रहे हैं।

गोवा के महामंडलेश्वर ने शिष्यों से कहा कि आप सभी दाह संस्कार करके अस्थि कलश को स्थापित करें। इस पर सभी शिष्य राजी हो गए। इसके बाद पद्मश्री बाबा शिवानंद का अंतिम संस्कार सोमवार की शाम 5:55 बजे राजकीय सम्मान के साथ हरिश्चंद्र घाट पर कर दिया गया। अंतिम यात्रा से पहले शिष्यों ने गुरु के चरणों में हल्दी और कुमकुम लगाया। इसके बाद कागज के पन्नों पर उनके चरणों की छाप उतारी। इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई।


हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार वाले स्थान को फूलों और रंगोली से सजाया गया था। अंतिम यात्रा में शिष्यों के साथ ही कई गणमान्य लोग शामिल हुए। हरिश्चंद्र घाट पर हीरामन विश्वास, संजय सरवजना, पुरुषोत्तम भट्टाचार्य, मामोनी, सुशांत और शर्मिला ने उन्हें मुखाग्नि दी। 12 दिन के बाद उनकी आत्मा की शांति के लिए महायज्ञ और भंडारे का आयोजन होगा।

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