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UP: बाहुबलियों के लिए मुफीद है पूर्वांचल की सियासी जमीन, 90 के दशक में हुई अपराधियों के राजनीतिकरण की शुरुआत
Mon, 18 Mar 2024 02:55 PM IST
शाहरुख खान
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 18 Mar 2024 02:55 PM IST
सार
पूर्वांचल की सियासी जमीन बाहुबलियों के लिए मुफीद है। देश में 90 के दशक में अपराधियों के राजनीतिकरण की शुरुआत हुई। देखें किन बाहुबलियों की किस्मत चमकी।
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Lok Sabha Elections 2024
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारतीय राजनीति के इतिहास में पंडित हरिशंकर तिवारी जेल से चुनाव जीतने वाले पहले बाहुबली थे। गोरखपुर की चिल्लूपार सीट से चुनाव जीतकर वे 22 साल तक विधानसभा के सदस्य रहे। मुलायम सिंह यादव, राम प्रकाश गुप्ता, राजनाथ सिंह और मायावती की सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
इस तरह से पूर्वांचल की सियासत में बाहुबलियों और उनके सगे-संबंधियों की पैठ बनी। अब भी घोसी सीट से अतुल राय और गाजीपुर से माफिया मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल अंसारी सांसद हैं। विधानसभा हो या लोकसभा का चुनाव पूर्वाचल की सियासत में बाहुबलियों की हनक समय के साथ बढ़ती रही।
बात अगर आजमगढ़ की करें तो यहां यादव बंधुओं रमाकांत यादव और उमाकांत यादव का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। रमाकांत यादव ने नब्बे के दशक में पूर्वांचल की सियासत में कदम रखा और 1996, 1999, 2004 व 2009 के लोकसभा चुनाव में बड़े अंतर से जीत दर्ज कर संसद पहुंचे।
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इतना ही नहीं 2004 के लोकसभा चुनाव में रमाकांत का भाई उमाकांत यादव जौनपुर जिले की मछलीशहर लोकसभा सीट से चुनाव जीतने में कामयाब रहा। उधर, गाजीपुर में अंतरराज्यीय माफिया गिरोह के सरगना मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल अंसारी 2004 और 2019 में संसद पहुंचे।
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इस तरह से पूर्वांचल की सियासत में बाहुबलियों और उनके सगे-संबंधियों की पैठ बनी। अब भी घोसी सीट से अतुल राय और गाजीपुर से माफिया मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल अंसारी सांसद हैं। विधानसभा हो या लोकसभा का चुनाव पूर्वाचल की सियासत में बाहुबलियों की हनक समय के साथ बढ़ती रही।
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बात अगर आजमगढ़ की करें तो यहां यादव बंधुओं रमाकांत यादव और उमाकांत यादव का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। रमाकांत यादव ने नब्बे के दशक में पूर्वांचल की सियासत में कदम रखा और 1996, 1999, 2004 व 2009 के लोकसभा चुनाव में बड़े अंतर से जीत दर्ज कर संसद पहुंचे।
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इतना ही नहीं 2004 के लोकसभा चुनाव में रमाकांत का भाई उमाकांत यादव जौनपुर जिले की मछलीशहर लोकसभा सीट से चुनाव जीतने में कामयाब रहा। उधर, गाजीपुर में अंतरराज्यीय माफिया गिरोह के सरगना मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल अंसारी 2004 और 2019 में संसद पहुंचे।
2019 के चुनाव में अफजाल के भाजपा के पूर्वांचल के कद्दावर नेता व तत्कालीन रेल मंत्री मनोज सिन्हा को बड़े अंतर से परास्त कर सबको चौंका दिया थ। हालांकि बांदा जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा मुख्तार अंसारी भी वर्ष 2009 में वाराणसी लोकसभा सीट से किस्मत आजमाया था, मगर उसे भाजपा के डॉ. मुरली मनोहर जोशी के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा था।
उधर, साल 2009 के लोकसभा चुनाव में जौनपुर सीट से पूर्वांचल के बाहुबली धनंजय सिंह की किस्मत चमकी। जौनपुर की जनता ने उन्हें चुनकर संसद भेजा। जबकि, बीते लोकसभा चुनाव में मऊ की घोसी सीट से माफिया मुख्तार अंसारी के करीबी रहे अतुल राय बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।
विधायकी तक ही सीमित रहा बृजेश का कुनबा
बृजेश सिंह के कुनबे से जुड़े लोगों का ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत, विधान परिषद और विधानसभा के चुनाव में दबदबा है। बृजेश एमएलसी रह चुके हैं और उनकी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह अभी एमएलसी हैं। इस बार के आम चुनाव में यह चर्चा है कि खुद बृजेश सिंह या उनके बेटे चुनाव में किस्मत आजमा सकते हैं।
बृजेश सिंह के कुनबे से जुड़े लोगों का ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत, विधान परिषद और विधानसभा के चुनाव में दबदबा है। बृजेश एमएलसी रह चुके हैं और उनकी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह अभी एमएलसी हैं। इस बार के आम चुनाव में यह चर्चा है कि खुद बृजेश सिंह या उनके बेटे चुनाव में किस्मत आजमा सकते हैं।
तहस-नहस हुआ विजय मिश्र का सियासी रसूख
एक दौर था तब भदोही, मिर्जापुर और प्रयागराज की सियासत में विजय मित्र की तूती बोलती थी, मगर हाल के दिनों में उसके ऊपर कानून का इस कदर शिकंजा कसा है कि उसका सियासी रसूख तहस- नहस हो गया है। ज्ञानपुर सीट से विधायक रहे विजय मिश्र को कभी मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता रहा, मगर अब उसके सितारे गर्दिश में हैं।
एक दौर था तब भदोही, मिर्जापुर और प्रयागराज की सियासत में विजय मित्र की तूती बोलती थी, मगर हाल के दिनों में उसके ऊपर कानून का इस कदर शिकंजा कसा है कि उसका सियासी रसूख तहस- नहस हो गया है। ज्ञानपुर सीट से विधायक रहे विजय मिश्र को कभी मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता रहा, मगर अब उसके सितारे गर्दिश में हैं।
अतीक की मौत के बाद कुनबा बिखरा
2004 के चुनाव में अतीक अहमद सपा के टिकट पर फूलपुर सीट से सांसद चुना गया था। वह इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहा। 15 अप्रैल 2023 को जांच के लिए अस्पताल ले जाते समय उसकी व उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
2004 के चुनाव में अतीक अहमद सपा के टिकट पर फूलपुर सीट से सांसद चुना गया था। वह इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहा। 15 अप्रैल 2023 को जांच के लिए अस्पताल ले जाते समय उसकी व उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
बसपा ने पहली बार विनीत को बनाया एमएलसी
वाराणसी के चोलापुर क्षेत्र के गोला गांव के रहने वाले बाहुबली श्यामनारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह ने बीएसपी के टिकट पर राजनीति की शुरुआत की और मिर्जापुर सीट से एमएलसी चुने गए। इसके बाद उन्होंने वापस मुड़कर नहीं देखा और मिर्जापुर सोनभद्र को अपनी कर्मभूमि ही बना लिया। अब भाजपा से एमएलसी विनीत सिंह का क्षेत्रियों में खासा प्रभाव माना जाता है।
वाराणसी के चोलापुर क्षेत्र के गोला गांव के रहने वाले बाहुबली श्यामनारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह ने बीएसपी के टिकट पर राजनीति की शुरुआत की और मिर्जापुर सीट से एमएलसी चुने गए। इसके बाद उन्होंने वापस मुड़कर नहीं देखा और मिर्जापुर सोनभद्र को अपनी कर्मभूमि ही बना लिया। अब भाजपा से एमएलसी विनीत सिंह का क्षेत्रियों में खासा प्रभाव माना जाता है।