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जौनपुरः इस बार गठबंधन के इम्तिहान की बारी, भितरघात से गड़बड़ाएगा तीनों प्रमुख उम्मीदवारों का गणित

Sat, 11 May 2019 10:47 AM IST
Vikas Kumar विनोद कुमार तिवारी, अमर उजाला, जौनपुर
विनोद कुमार तिवारी, अमर उजाला, जौनपुर Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 11 May 2019 10:47 AM IST
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lok sabha elections 2019 this time the test of the alliance in jaunpur
गठबंधन प्रत्याशी श्याम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला

जौनपुर लोकसभा सीट के मतदाता उलटफेर करने में माहिर माने जाते हैं। यहां पांच बार जनसंघ व भाजपा जीती और पांच बार ही कांग्रेस का कब्जा रहा है। दो बार सपा व एक बार बसपा ने भी परचम लहराया है। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...

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कांग्रेस प्रत्याशी देवब्रत मिश्रा - फोटो : अमर उजाला

इस चुनाव में यों तो जौनपुर संसदीय क्षेत्र से 20 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होना है, लेकिन मुख्य मुकाबला सपा-बसपा गठबंधन और भाजपा के बीच ही होना है। कांग्रेस इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना सकती है। अहम बात यह भी है कि गठबंधन और दोनों प्रमुख दलों में टिकट न मिलने से नाराज दावेदारों की संख्या भी कम नहीं है। ऐसे में भितरघात की सबसे ज्यादा आशंका वाली इस सीट पर वोटों का बंटवारा होना तय है। 

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भाजपा प्रत्याशी केपी सिंह - फोटो : अमर उजाला

भाजपा ने तमाम किंतु परंतु के बावजूद पड़ोसी सीटों के जातीय समीकरण साधने के लिए 2014 में चुने गए डॉ. केपी सिंह को फिर से मैदान में उतारा है। सपा-बसपा गठबंधन ने रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी श्याम सिंह यादव को भी इसी आधार पर उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने भी अंतर्विरोध के बाद ही अनुभवी देवव्रत मिश्र पर दांव लगाया है। 2014 में कांग्रेस ने भोजपुरी फिल्मों के स्टार रवि किशन को टिकट दिया था लेकिन न तो पार्टी को इसका फायदा मिला और न ही रवि किशन पार्टी में रुक पाए। 

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मेडिकल कॉलेज का निर्माण, गोमती नदी में प्रदूषण, शाहगंज चीनी मिल को चालू कराने और जिला मुख्यालय पर पेयजल और पार्किंग की व्यवस्था न होना आम लोगों को खल रहा है। भाजपा राष्ट्रवाद के मुद्दे को तो हवा दे रही है। साथ ही उनको केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों का सहारा है। दूसरी ओर गठबंधन और कांग्रेस प्रत्याशी द्वारा पांच साल में हुए विकास कार्यों को नाकाफी बताते हुए वोट मांगे जा रहे हैं।  

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जौनपुर में चुनाव पर चर्चा करते लोग - फोटो : अमर उजाला

शिक्षाविद् एवं साहित्यकार डॉ. ब्रजेश कुमार यदुवंशी का कहना है कि बसपा-सपा गठबंधन से बने नए समीकरण में भाजपा के सामने सीट बचाने की चुनौती है। वहीं वीरेंद्र पांडेय सीट पर एयर स्ट्राइक को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हैं तो ओलंदगंज निवासी मिंटू पाठक दावा करते हैं कि ध्रुवीकरण होगा। कारोबारी अमित गुप्ता कहते हैं कि चुनाव चेहरों पर लड़ा जा रहा है। मुद्दे तो गायब हैं। व्यापारी नेता श्रवण जायसवाल और संदीप पांडेय का स्पष्ट मत है कि अपने-अपने वोटों को सहेजना बड़े उम्मीदवारों के लिए कड़ी परीक्षा है। मतदाताओं में जबर्दस्त नाराजगी के कारण किसी भी नेता का गणित गड़बड़ा सकता है।

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