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UP: तब घरानों से थे पीएम-सीएम, सात सांसद और सात विधायक, अब पूर्वांचल से राज्यसभा में सिर्फ एक सांसद नीरज शेखर

Sat, 06 Apr 2024 11:25 AM IST
शाहरुख खान पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 06 Apr 2024 11:25 AM IST
सार

राजनीति की मुख्य धारा में आने के लिए राजनीतिक घरानों की नई पीढ़ी संघर्ष कर रही है। पहले राजनीतिक घरानों से पीएम-सीएम थे। सात सांसद और सात विधायक थे, अब पूर्वांचल से राज्यसभा में सिर्फ एक सांसद नीरज शेखर हैं। 

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Lok Sabha Election 2024 New generation of political houses struggling to enter the mainstream of politics
Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश और देश की सियासत में पूर्वांचल के पांच बड़े राजनीतिक घरानों का एक अलग रसूख रहा है। इन घरानों से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के साथ ही केंद्र व राज्य सरकार में मंत्री के अलावा सात सांसद और सात विधायक हुए। हालांकि ज्यादातर राजनीतिक घरानों के उत्तराधिकारियों की मौजूदा दौर की राजनीति की मुख्य धारा से दूरी बन चुकी है।
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भाजपा से राज्यसभा सांसद नीरज शेखर को छोड़कर पूर्वांचल के अन्य सभी प्रमुख राजनीतिक घरानों के सदस्य पुराना सियासी रसूख पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी का देश की सियासत में एक अलग स्थान था। 
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वाराणसी और चंदौली की स्थानीय राजनीति में उनकी अच्छी-खासी दखल हुआ करती थी। वह खुद वाराणसी से वर्ष 1984 में कांग्रेस के सांसद चुने गए थे। वहीं, उनकी बहू चंद्रा त्रिपाठी चंदौली से वर्ष 1984 में कांग्रेस की सांसद रहीं। उनके पुत्र पंडित लोकपति त्रिपाठी उत्तर प्रदेश में मंत्री रहे। 
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मौजूदा समय में पंडित कमलापति त्रिपाठी के पौत्र पूर्व एमएलसी राजेशपति त्रिपाठी और प्रपौत्र पूर्व एमएलए ललितेशपति त्रिपाठी कांग्रेस से दूरी बना चुके हैं। ललितेशपति सपा के सहयोग से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर भदोही से किस्मत आजमा रहे हैं।
 

घोसी लोकसभा से कल्पनाथ राय वर्ष 1989 से 1999 तक लगातार चार बार सांसद रहे। पहले दो चुनाव में वह कांग्रेस के प्रत्याशी थे। एक चुनाव उन्होंने स्वतंत्र राजनीतिज्ञ के रूप में लड़ा और आखिरी चुनाव में वह समता पार्टी के प्रत्याशी थे। कल्पनाथ राय के उत्तराधिकारी राजनीति में अपना कोई ठोस मुकाम नहीं बना सके।

 

देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर बलिया से वर्ष 1989 से 2007 तक लगातार छह बार जनता दल और समाजवादी जनता पार्टी से सांसद चुने गए। उनके निधन के बाद उनके पुत्र नीरज शेखर ने बलिया से लोकसभा का उपचुनाव जीता।
 

फिर, 2009 में वह समाजवादी पार्टी से बलिया से सांसद चुने गए। 2014 के आम चुनाव में नीरज शेखर को हार मिली। नीरज अब भाजपा से राज्यसभा सदस्य हैं, लेकिन चंद्रशेखर सरीखा राजनीतिक तेवर उनका नहीं है।

जौनपुर के पूर्व राजा यादवेंद्र दत्त दूबे तीन बार विधायक और दो बार सांसद चुने गए थे। सितंबर 1999 में उनका निधन हुआ तो राजघराने ने सियासत से दूरी बना ली। जौनपुर के सिंगरामऊ के पूर्व राजा कुंवर श्रीपाल सिंह तीन बार विधायक चुने गए। हालांकि उनके पोते कुंवर जय सिंह बाबा और प्रपौत्र कुंवर मृगेंद्र सिंह सियासत में मनचाहा मुकाम नहीं बना सके।
 

मिर्जापुर के बैरिस्टर यूसुफ इमाम पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के करीबियों में से एक थे। उनके पुत्र अजीज इमाम विंध्य क्षेत्र के कांग्रेस के बड़े नेता थे। वह 1952 से 1966 तक यूपी विधानसभा और फिर 1971 से 1977 तक व 1980 में लोकसभा में कांग्रेस के सिंबल पर पहुंचे। अजीज इमाम की राजनीतिक विरासत संभालने के लिए उनके पुत्र कैप्टन सरताज इमाम ने जोर आजमाइश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सके।
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