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बोले रोजी जॉन, संतों-नेताओं पर कार्रवाई संवैधानिक अधिकारों का हनन
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 14 Oct 2015 02:14 AM IST
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वाराणसी। राष्ट्रीय छात्र संगठन के अध्यक्ष रोजी जॉन ने अन्याय प्रतिकार यात्रा में शामिल साधु-संतों और कांग्रेसजनों पर पुलिस की कार्रवाई को संवैधानिक अधिकारों का हनन करार दिया है। उन्होंने कहा कि संविधान में देश के हर नागरिक को अपने-अपने धर्म के अनुसार धार्मिक कार्य संपादित करने का अधिकार मिला हुआ है। संविधान के विपरित 22 सितंबर की रात संतों और भक्तों पर लाठियां बरसाई गईं। उन पर हत्या के प्रयास और बलवा जैसे फर्जी मुकदमे लादे गए, जो सरासर गलत है। ये बातें उन्होंने मंगलवार को कांग्रेस के इंग्लिशिया लाइन कार्यालय पर बातचीत में कहीं।
रोजी ने कहा कि सपा सरकार में अपराधी बेखौफ हैं और संतों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। निर्दोष लोगों को जेल में डाला जा रहा है। कहा कि कोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए प्रशासन को समय रहते विसर्जन का विकल्प दे देना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सच्चाई तो यह है कि प्रशासन ने विवाद सुलझाने का प्रयास ही नहीं किया। इस मौके पर मौजूद प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष वीपी सिंह ने कहा कि मूर्ति
का विसर्जन शास्त्र सम्मत ढंग से प्रवाहमान जल में होना चाहिए। कहा कि जब प्रशासन के पास व्यवस्था नहीं थी तो गणेश प्रतिमा का विसर्जन क्यों रोका गया? यह एक साजिश है। संतों में इसे लेकर गहरी नाराजगी है। इससे पहले दोनों नेता जिला जेल में बंद राछासं के जिलाध्यक्ष विकास सहित अन्य बंदियाें से मुलाकात की। फिर विद्या मठ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात करने पहुंचे।
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रोजी ने कहा कि सपा सरकार में अपराधी बेखौफ हैं और संतों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। निर्दोष लोगों को जेल में डाला जा रहा है। कहा कि कोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए प्रशासन को समय रहते विसर्जन का विकल्प दे देना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सच्चाई तो यह है कि प्रशासन ने विवाद सुलझाने का प्रयास ही नहीं किया। इस मौके पर मौजूद प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष वीपी सिंह ने कहा कि मूर्ति
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का विसर्जन शास्त्र सम्मत ढंग से प्रवाहमान जल में होना चाहिए। कहा कि जब प्रशासन के पास व्यवस्था नहीं थी तो गणेश प्रतिमा का विसर्जन क्यों रोका गया? यह एक साजिश है। संतों में इसे लेकर गहरी नाराजगी है। इससे पहले दोनों नेता जिला जेल में बंद राछासं के जिलाध्यक्ष विकास सहित अन्य बंदियाें से मुलाकात की। फिर विद्या मठ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात करने पहुंचे।
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