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यूपी: गंभीर कुपोषण का स्तर सुधरा फिर भी सोनभद्र का बचपन सबसे कमजोर, 39 फीसदी बच्चे ठिगने; देखें आंकड़े

Sun, 18 Oct 2026 03:33 PM IST
Aman Vishwakarma मनीष जायसवाल, अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।
मनीष जायसवाल, अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 18 Oct 2026 03:33 PM IST
सार

सोनभद्र में गंभीर कुपोषण के स्तर में सुधार के बावजूद बच्चों की सेहत की स्थिति पूर्वांचल में सबसे कमजोर बनी हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार, जिले में 39 फीसदी बच्चे ठिगने और 46.6 फीसदी कम वजन के हैं। पूर्वांचल के 10 जिलों की तुलना में कुपोषण के प्रमुख मानकों पर सोनभद्र की स्थिति सबसे खराब दर्ज की गई है।

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Levels of severe malnutrition improved childhood in Sonbhadra remains most vulnerable children stunted
10 जिलों की तुलना में कुपोषण के प्रमुख मानकों में सबसे खराब स्थिति। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाले सोनभद्र में बच्चों की सेहत की तस्वीर अच्छी नहीं है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 के ताजा आंकड़ों में पूर्वांचल के दस जिलों में सोनभद्र का बचपन सबसे कमजोर पाया गया है। 

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यहां गंभीर कुपोषण की स्थिति पहले से जरूर सुधरी है, लेकिन व्यापक पोषण की समस्या बरकरार है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में 39 फीसदी स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कम लंबाई), 25.6 फीसदी वेस्टिंग (लंबाई के हिसाब से कम वजन) और 46.6 फीसदी कम वजन दर्ज किया गया है। इन तीनों प्रमुख संकेतकों में सोनभद्र की स्थिति सभी 10 जिलों में सबसे खराब है।
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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 (एनएफएचएस-6) के लिए आंकड़े वर्ष 2023-24 में संकलित किए गए थे। अब जारी हुई इसकी रिपोर्ट के मुताबिक सोनभद्र में पांच साल से कम उम्र के 6.6 फीसदी बच्चे गंभीर रूप से वेस्टेड हैं। यह आंकड़ा भी 10 जिलों में सबसे अधिक है। हालांकि राहत की बात यह है कि एनएफएचएस-5 में गंभीर वेस्टिंग 17.4 फीसदी थी, जो इस सर्वे में घटकर 6.6 फीसदी रह गई। यानी गंभीर कुपोषण की स्थिति में 10.8 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ है।

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क्या है एनएफएचएस और क्यों महत्वपूर्ण
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएचएफएस) भारत में परिवारों, महिलाओं, बच्चों और स्वास्थ्य से जुड़े हालात की तस्वीर सामने लाने वाला एक बड़ा राष्ट्रीय सर्वेक्षण है। इससे पता चलता है कि देश और राज्यों में पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, एनीमिया, टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति कैसी है। इनमें कहां कमियां और किस क्षेत्र में सुधार की ज्यादा जरूरत है। इसी आधार पर संबंधित विभाग योजना बनाकर आगे काम करता है।

हर दूसरा बच्चा कम वजन की श्रेणी में
सोनभद्र में कम वजन वाले बच्चों का आंकड़ा 46.6 फीसदी है। यानी सर्वे में शामिल पांच साल से कम उम्र के लगभग हर दो में से एक बच्चे का वजन उम्र के मानक से कम पाया गया। एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 46.5 फीसदी था। इस लिहाज से पांच साल में इसमें लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ। स्टंटिंग भी 38.3 फीसदी से बढ़कर 39 फीसदी हो गई। इसका मतलब है कि बच्चों में लंबे समय से चले आ रहे पोषण संकट में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। वहीं वेस्टिंग 26.8 से घटकर 25.6 फीसदी हुई है।

मिर्जापुर और चंदौली भी पीछे, जौनपुर, गाजीपुर की स्थिति अच्छी
वाराणसी, मिर्जापुर और आजमगढ़ मंडल के दस जिलों की तुलना में मिर्जापुर में स्टंटिंग 37.8 फीसदी और कम वजन 44.3 फीसदी है। चंदौली में यह आंकड़े क्रमश: 27.9 और 33.4 फीसदी हैं। वाराणसी में स्टंटिंग 25.3 और कम वजन 33.2 फीसदी है। इसके मुकाबले जौनपुर, गाजीपुर और आजमगढ़ में इन संकेतकों का स्तर अपेक्षाकृत कम है।

Levels of severe malnutrition improved childhood in Sonbhadra remains most vulnerable children stunted
केंद्र में बैठे बच्चे। - फोटो : संवाद

गंभीर कुपोषण घटा, व्यापक पोषण की समस्या कायम
रिपोर्ट के मुताबिक सोनभद्र में गंभीर वेस्टिंग में बड़ी गिरावट आई है। इसके बावजूद स्टंटिंग और कम वजन का स्तर लगभग जस का तस है। यह बताता है कि अति गंभीर स्थिति वाले बच्चों की संख्या कम हुई, लेकिन व्यापक पोषण समस्या अभी बनी हुई है। बच्चों के खानपान के आंकड़े पर गौर करें तो छह से 23 माह के बच्चों में पर्याप्त आहार पाने वालों का आंकड़ा एनएफएचएस-5 के 2.5 फीसदी से बढ़कर एनएफएचएस-6 में 36.1 फीसदी हुआ है। जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने का आंकड़ा भी 29.1 से बढ़कर 54.5 फीसदी हुआ है।
 

टीकाकरण में मिली-जुली स्थिति
पांच साल से कम उम्र के बच्चों में सर्वे से पहले के दो सप्ताह में दस्त की शिकायत 2 फीसदी से बढ़कर 16.2 फीसदी दर्ज हुई। दूसरी ओर 12-23 माह के बच्चों में कार्ड अथवा मां की जानकारी के आधार पर पूर्ण टीकाकरण 72.7 से बढ़कर 75.5 फीसदी हुआ है। वहीं तीन डोज पेंटावैलेंट लेने वाले बच्चों का आंकड़ा 83.6 से घटकर 78.2 फीसदी और बीसीजी टीकाकरण 93.6 से घटकर 88 फीसदी हुआ। रोटावायरस की तीन खुराक लेने वाले बच्चों का आंकड़ा 51.4 से बढ़कर 77.2 फीसदी हुआ है।

एक नजर में पूर्वांचल के 10 जिलों में बच्चों का पोषण

जिला: स्टंटिंग: वेस्टिंग: गंभीर वेस्टिंग: कम वजन (आंकड़े प्रतिशत में)
सोनभद्र: 39.0: 25.6: 6.6: 46.6
मिर्जापुर: 37.8: 22.4: 3.2: 44.3
वाराणसी: 27.3: 25.3: 2.2: 33.2
भदोही: 27.1: 19.7: 3.5: 33.7
चंदौली: 25.3: 21.9: 4.5: 33.4
बलिया: 25.9: 11.0: 3.6: 21.2
मऊ: 24.0: 9.4: 1.2: 22.6
गाजीपुर: 22.7: 9.7: 1.9: 18.9
जौनपुर: 21.7: 12.2: 3.0: 30.0
आजमगढ़: 20.3: 13.7: 2.0: 23.7
(स्रोत: आंकड़े राष्ट्रीय परिवार हेल्थ सर्वे-6 से लिए गए हैं।)

जिले में गंभीर कुपोषण की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों तक नियमित पोषाहार व अन्य सुविधाएं पहुंच रही है। उनकी नियमित निगरानी बढ़ाई गई है। जिले स्तर पर भी बच्चों का सर्वेक्षण कराया जा रहा है। कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों का वजन कर रही हैं। जिन बच्चों का वजन कम है, उन्हें डबल पोषाहार दिया जाएगा। जल्द ही जिला स्तर के सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी की जाएगी। - विनीत कुमार सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी।

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