मणिकर्णिका घाट पर विसर्जित की गई बीके बिड़ला की अस्थियां, परिवार ने किए काशी विश्वनाथ के दर्शन
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देश के नामी उद्योगपति समूह बिड़ला परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य और कुमार मंगलम बिड़ला के दादाजी बसंत कुमार बिड़ला का तीन जुलाई को निधन हो गया था। स्व. बसंत बिड़ला का अस्थिकलश बुधवार को मणिकर्णिका घाट पर विसर्जित किया गया।
वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर बुधवार को सुबह 10 बजे बिड़ला परिवार बसंत बिड़ला का अस्थि कलश लेकर पहुंचा। बसंत बिड़ला की पुत्री जयश्री मोहता के हाथों में अस्थिकलश था। वाराणसी एयरपोर्ट से 10.15 बजे बिड़ला परिवार शहर की तरफ प्रस्थान किया। उनकी बेटी जयश्री मोहता अस्थि कलश लेकर हवाई अड्डे से सीधे भैंसासुर घाट पहुंचीं।
फिर वहां से नाव के जरिए मणिकर्णिका घाट गईं। मणिकर्णिका घाट पर अपने पिता बसंत बिड़ला के अस्थियों का विसर्जन किया। इसके बाद नाव से ही बिड़ला परिवार दशाश्वमेध घाट पहुंचा और काशी विश्वनाथ के दर्शन किए।
कौन थे बसंत कुमार बि़ड़ला
देश के नामी उद्योगपति समूह बिड़ला परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य और कुमार मंगलम बिड़ला के दादाजी बसंत कुमार बि़ड़ला का 98 साल की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। बसंत बिड़ला सेंचुरी टेक्सटाइल एंड इंडस्ट्रीज के चेयरमैन थे।
बसंत बिड़ला ने 15 साल की उम्र में व्यापार की कमान संभाल ली थी। वो उद्योगपति घनश्यामदास बिड़ला के सबसे छोटे बेटे थे। सबसे पहले वो केसोराम इंडस्ट्रीज के चेयरमैन बने थे। यहीं से उन्होंने कई व्यापार में अपना हाथ अजमाया और समूह को आगे ले जाने में सफल रहे।
जिन सेक्टर्स में उन्होंने समूह को नई ऊंचाई पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उनमें कॉटन, विस्कॉस, पॉलिएस्टर, नायलॉन, रिफ्रेक्ट्री पेपर, शिपिंग, टायरकोर्ड, ट्रांसपेरेंट पेपर, सीमेंट, चाय, कॉफी, इलायची, केमिकल्स, प्लाईवुड, एमडीएफ बोर्ड शामिल हैं।
1995 में कुमार मंगलम बिड़ला के पिताजी आदित्य विक्रम बिड़ला का 1995 में निधन हो गया था। वो बसंत कुमार बिड़ला के इकलौते पुत्र थे। उनके परिवार में दो बेटियां जयश्री मोहता और मंजूश्री खेतान हैं।