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शगुन और संस्कृति के रंगों का प्रतीक है ‘लहरिया, इस सावन में छाया है ये फैशन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 08 Aug 2018 03:54 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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बात सावन और तीज की हो तो बिना लहरिया साड़ी के यह त्योहार अधूरा है। इस हरियाली वाले मौसम में महिलाओं और युवतियों को लहरिया साड़ी हमेशा से ही लुभाती आई है। आकर्षक प्रिंट वाले लहरियों की डिमांड मार्केट में सबसे ज्यादा बढ़ी है। सिर्फ सावन में नहीं बल्कि शादी-ब्याह के मौके पर भी काफी आकर्षक लगता है।
आज लहरिया सभी तरह के इंडियन वियर में इस्तेमाल होने वाला आम फैशन बन गया है। खासकर साड़ियों और दुपट्टों में मारवाड़ी समाज की महिलाएं लहरिया संस्कृति तीज त्योहार जैसे खास मौकों पर पहनना पसंद करती हैं क्योंकि यह परिधान खुशनुमा जीवन का प्रतीक माना गया है।
तीज की खरीदारी करने आईं काजल ने बताया कि मेरी शादी मार्च में हुई है और शादी के बाद यह मेरा पहला हरियाली तीज है। लहरिया को सावन में विशेष तौर पर पसंद किया जाता है। यह महिलाओं को एक ट्रेडिशनल लुक भी देता है। आगे की स्लाइड्स में देखें.....
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आज लहरिया सभी तरह के इंडियन वियर में इस्तेमाल होने वाला आम फैशन बन गया है। खासकर साड़ियों और दुपट्टों में मारवाड़ी समाज की महिलाएं लहरिया संस्कृति तीज त्योहार जैसे खास मौकों पर पहनना पसंद करती हैं क्योंकि यह परिधान खुशनुमा जीवन का प्रतीक माना गया है।
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तीज की खरीदारी करने आईं काजल ने बताया कि मेरी शादी मार्च में हुई है और शादी के बाद यह मेरा पहला हरियाली तीज है। लहरिया को सावन में विशेष तौर पर पसंद किया जाता है। यह महिलाओं को एक ट्रेडिशनल लुक भी देता है। आगे की स्लाइड्स में देखें.....
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क्या है लहरिया
लहरिया राजस्थान की एक पारंपरिक टाई एंड डाई तकनीक है। इसे 17वीं शताब्दी में ईजाद किया गया था। इसका इस्तेमाल राजपुताना राजाओं की पगड़ी पर किया जाता था। 19वीं शताब्दी के अंत तक इसका इस्तेमाल राजस्थान के कई हिस्सों में होने लगा। राजस्थानी संस्कृति की बात करें तो राजस्थान में लहरिया सिर्फ कपड़े पर उकेरा गया डिजाइन या स्टाइल भर नहीं, यह रंग बिरंगी धारियां शगुन और संस्कृति के वो सारे रंग है जो राजस्थानी संस्कृति के खास परिचायक है। सावन में लहरिया पहनना बेहद शुभ माना गया है।
सावन में लहरिया की बिक्री परवान पर है। लहरिये की कुर्तियां पांच सौ रुपये से लेकर 1500 रुपये तक की रेंज में उपलब्ध हैं। वहीं दुपट्टे 100 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध हैं। आमतौर पर लहरियों में दो रंगों का प्रयोग किया जाता है, लेकिन बढ़ती डिमांड और बदलते फैशन ट्रैंड में अब मल्टी कलर में भी बनाया जाने लगा है। कुर्ती, लॉन्ग सूट, स्कर्ट में रंग-बिरंगे लहरिया को यूज किया जा रहा है। लहरिया स्कर्ट और टॉप में भी वैरायटी के चलते इसे लड़कियां खूब पसंद कर रही हैं।
सावन में लहरिया की बिक्री परवान पर है। लहरिये की कुर्तियां पांच सौ रुपये से लेकर 1500 रुपये तक की रेंज में उपलब्ध हैं। वहीं दुपट्टे 100 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध हैं। आमतौर पर लहरियों में दो रंगों का प्रयोग किया जाता है, लेकिन बढ़ती डिमांड और बदलते फैशन ट्रैंड में अब मल्टी कलर में भी बनाया जाने लगा है। कुर्ती, लॉन्ग सूट, स्कर्ट में रंग-बिरंगे लहरिया को यूज किया जा रहा है। लहरिया स्कर्ट और टॉप में भी वैरायटी के चलते इसे लड़कियां खूब पसंद कर रही हैं।
लहरिया के भी कई प्रकार
बंधेज लहरिया: इस लहरियां में महिलाओं की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है। ज्यादातर महिलाएं इसमें लाल, पीले रंग की सांड़ी खरीदती है। इसमें फ ूल पत्तियों का डिजाइन या चौकोर आकृति का डिजाइन भी दिया जाता है। जो इसको और भी सुंदर बना देता है।
पंचरंगी लहरिया: यह पांच रंगों से मिलकर बनाया जाता है। आजकल इसमें पांच रंगों को कुंदन और मेंकारी से सजाया जाता है।
बारीक लहरिया: जॉजर्ट से निर्मित हल्के और महीन कपड़े पर यह लहरिया बारीक-बारीक लाइनों को ध्यान में रखते हुए बनाया जाता है।
गोटा पट्टी लहरिया: लहरिया से साड़ियों में गोटा वर्क खास होता है। इनमे पचरंगा, मोठड़ा और डबल धारी पैटर्न काफी पसंद किए जा रहे है। तीज के हिसाब से यह सबसे बेहतर विकल्प है।
गोल्डन वर्क के साथ : लहरिया के साथ आजकल नए नए आविष्कार कि ए जा रहे है। सूट, दुपट्टा, राजपूती पोशाक या साड़ी लहरिया के साथ गोल्डन वर्क काफी अच्छा लगता है।