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वाराणसी: मैनहोल में गिरा मजदूर, एनडीएआरएफ की टीम मौके पर, राहत बचाव कार्य जारी
Mon, 29 Nov 2021 05:26 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Mon, 29 Nov 2021 05:26 PM IST
सार
वाराणसी के लहुराबीर में हुई इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई। एक मजदूर काम करते वक्त मैनहोल में गिर गया, जिसे निकालने की जद्दोजहद जारी है।
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मजदूर को निकालती एनडीआरफ की टीम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वाराणसी ज़िले में शाही नाले की सफाई के दौरान लहुराबीर चौराहे पर काम के दौरान मैनहोल में मजदूर फंस गया। मजदूर के मैनहोल में फंसने की सूचना पर हड़कंप मच गया। काफी मशक्कत के बाद भी मजदूर को निकाला नहीं जा सका। एनडीआरएफ की टीम दोपहर से ही मजदूर को निकालने में लगी रही। आक्सीजन, लाईट हेल्ड होलर मशीन से लगायत अन्य जरूरी उपकरणों को मैनहोल में फंसे मजदूर तक पहुंचाया गया है लेकिन हलचल बंद होने से अनहोनी की आशंका जताई जा रही है।
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सोमवार को लहुराबीर चौराहे पर दोपहर में गहरे सीवर सफाई व डायवर्जन प्लेट में बोरी लगाने के लिए मैनहोल में उतरा मजदूर रिलीविंग ट्रंक सीवर (आरटीएस) में फंस गया। पश्चिम बंगाल का मालदा निवासी नवाब सारिप (20) मैनहोल में उतरा था। मैनहोल में उतरने के बाद नवाब डायवर्जन प्लेट से हो रहे रिसाव को रोकने के लिए बोरी लगा रहा था। इसी बीच सीवर के तेज प्रेशर से प्लेट खिसकी और कुछ क्षणों में ही काफी वजनी लोहे के डायवर्जन प्लेट के साथ ही मलबा उसके शरीर पर आ गिरा और वह उसमें दबने के बाद फंस गया। करीब 15 मीटर गहरे मैनहोल में जब चीख-चिल्लाहट शुरू हुई तो साथ में काम कर रहे साथियों ने इसकी सूचना ठेकेदार व पुलिस को दी। करीब एक घंटे बाद फायर बिग्रेड मौके पर तो पहुंची लेकिन उसने रेसक्यू करने से हाथ खड़ा कर दिया। बाद में चौकाघाट से एनडीआरएफ मौके पर पहुंची और रेसक्यू शुरू कर दिया लेकिन घंटों मशक्कत के बाद भी एनडीआरएफ को कोई सफलता हाथ नहीं लगी। उधर, मैनहोल में किसी भी तरह के हलचल नहीं होने से अनहोनी की आशंका भी जताई जा रही है।
कई सालों से चल रहा है सीवर लाइन का काम
सीवरेज की समस्या से जूझ रहे काशी में वर्षों से ओटीएस (ओल्ड ट्रंक सीवर) व आरटीएस (रिलीविंग ट्रंक सीवर) का काम चल रहा है। जल निगम के गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की इस योजना के तहत ही नए सीवर लाईनों को डालना और पुराने सीवर लाईनों पर सीवरेज का दबाव कम करना है। शाही नाले की सफाई भी इसी योजना के तहत कराई जा रही है। शाही नाले की सफाई के लिए ही लहुराबीर, नाटी इमली चौराहे पर डायवर्जन लाईन डाली गई और बड़े-बड़े चैम्बरों का निर्माण किया गया है। इन चैम्बरों को जोड़ने के लिए ही लहुराबीर चौराहे पर मैनहोल बनाया गया है। इसी मैनहोल के डायवर्जन प्लेट से रिसाव हो रहा था जिस पर बोरी लगाने और सफाई के लिए काम किया जा रहा था।
ग्रीन कॉरिडोर से एनडीआरएफ पहुंची घटना स्थल
चेतगंज पुलिस की सक्रियता से एनडीआरएफ व कार्यदाई संस्था जल निगम भी सक्रिय हुई। रास्ते पर जगह-जगह जाम के कारण एनडीआरएफ को तत्काल मौके पर लाने में भी पुलिस ने सहयोग किया और अफसरों ने तत्काल ग्रीन कॉरिडोर बनाकर चौकाघाट के सांस्कृतिक संकुल से लहुराबीर तक एनडीआरएफ को पहुंचाकर रेस्क्यू शुरू कराया। घटनास्थल पर एनडीआरएफ की टीम फैंटम बाइक से पहुंची थी।
दो घंटे देर से पहुंचे जल निगम के अफसर
पुलिस इस काम में तो सक्रिय रही लेकिन जमीन के भीतर तकनीकी जानकारी नहीं होने के चलते कार्रवाई से उसके हाथ बंधे थे। लेटलतीफी वाली कार्यशैली के लिए जाने जाने वाले जलनिगम के अधिकारी दो घंटे की देरी से घटनास्थल पर पहुंचे।
रस्सी टूटने को लेकर संशय
जिस रस्सी के सहारे मजदूर नवाब सारिप मैनहोल में उतरा था उसके टूटने की बात भी बताई जा रही है। कहा जा रहा था कि जब हैवी लोहे की प्लेट व बालू से भरी बोरियों के साथ भारी सीवर व मलबे का दबाव जब रस्सी पर पड़ा तो वह टूट गई। हालांकि रस्सी टूटी की नहीं इसको लेकर संशय बरकरार है। इस बारे में कोई जिम्मेदार बोलने को भी तैयार नहीं है।
कई सालों से चल रहा है सीवर लाइन का काम
सीवरेज की समस्या से जूझ रहे काशी में वर्षों से ओटीएस (ओल्ड ट्रंक सीवर) व आरटीएस (रिलीविंग ट्रंक सीवर) का काम चल रहा है। जल निगम के गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की इस योजना के तहत ही नए सीवर लाईनों को डालना और पुराने सीवर लाईनों पर सीवरेज का दबाव कम करना है। शाही नाले की सफाई भी इसी योजना के तहत कराई जा रही है। शाही नाले की सफाई के लिए ही लहुराबीर, नाटी इमली चौराहे पर डायवर्जन लाईन डाली गई और बड़े-बड़े चैम्बरों का निर्माण किया गया है। इन चैम्बरों को जोड़ने के लिए ही लहुराबीर चौराहे पर मैनहोल बनाया गया है। इसी मैनहोल के डायवर्जन प्लेट से रिसाव हो रहा था जिस पर बोरी लगाने और सफाई के लिए काम किया जा रहा था।
ग्रीन कॉरिडोर से एनडीआरएफ पहुंची घटना स्थल
चेतगंज पुलिस की सक्रियता से एनडीआरएफ व कार्यदाई संस्था जल निगम भी सक्रिय हुई। रास्ते पर जगह-जगह जाम के कारण एनडीआरएफ को तत्काल मौके पर लाने में भी पुलिस ने सहयोग किया और अफसरों ने तत्काल ग्रीन कॉरिडोर बनाकर चौकाघाट के सांस्कृतिक संकुल से लहुराबीर तक एनडीआरएफ को पहुंचाकर रेस्क्यू शुरू कराया। घटनास्थल पर एनडीआरएफ की टीम फैंटम बाइक से पहुंची थी।
दो घंटे देर से पहुंचे जल निगम के अफसर
पुलिस इस काम में तो सक्रिय रही लेकिन जमीन के भीतर तकनीकी जानकारी नहीं होने के चलते कार्रवाई से उसके हाथ बंधे थे। लेटलतीफी वाली कार्यशैली के लिए जाने जाने वाले जलनिगम के अधिकारी दो घंटे की देरी से घटनास्थल पर पहुंचे।
रस्सी टूटने को लेकर संशय
जिस रस्सी के सहारे मजदूर नवाब सारिप मैनहोल में उतरा था उसके टूटने की बात भी बताई जा रही है। कहा जा रहा था कि जब हैवी लोहे की प्लेट व बालू से भरी बोरियों के साथ भारी सीवर व मलबे का दबाव जब रस्सी पर पड़ा तो वह टूट गई। हालांकि रस्सी टूटी की नहीं इसको लेकर संशय बरकरार है। इस बारे में कोई जिम्मेदार बोलने को भी तैयार नहीं है।
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घर की माली हालत ठीक नहीं, भाई दिव्यांग है
मैनहोल में फंसे नवाब के घर की स्थिति बेहद दयनीय है। वह अपने घर का इकलौता कमाने वाला है। पिता अनीकूल मजदूरी करते हैं और घर में और कोई कमाने वाला नहीं है। बड़ा भाई दिव्यांग है।
एनडीआरएफ कमांडेंट, मुके श कुमार शर्मा ने बताया कि मैनहोल से पानी निकाला जा रहा है। एनडीआरएफ की ओर से बचाव कार्य जारी है। राहत बचाव कार्य देर रात तक चलेगा। फिलहाल अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है।
मैनहोल में फंसे नवाब के घर की स्थिति बेहद दयनीय है। वह अपने घर का इकलौता कमाने वाला है। पिता अनीकूल मजदूरी करते हैं और घर में और कोई कमाने वाला नहीं है। बड़ा भाई दिव्यांग है।
एनडीआरएफ कमांडेंट, मुके श कुमार शर्मा ने बताया कि मैनहोल से पानी निकाला जा रहा है। एनडीआरएफ की ओर से बचाव कार्य जारी है। राहत बचाव कार्य देर रात तक चलेगा। फिलहाल अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है।