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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   'King of us do not speak ... "

'हमसे ना बोलो राजा...'

Sun, 08 Jan 2017 02:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 08 Jan 2017 02:03 AM IST
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दशाश्वमेध घाट पर गंगा का सुरम्य किनारा शनिवार की रात बनारस घराने की ठुमरी और दादरा की लोच से गूंजा। मौका था अकबर के समकालीन संगीत साधक बैजू बावरा के समाधि स्थल अलंकरण और संगीत समारोह का। बनारस साड़ी फैक्ट्री परिसर में संगीत के गुणीजनों ने प्रसिद्ध ख्याल गायक व शहर के इकलौते जलतरंग वादक डॉ. राजेश्वर आचार्य को बैजू बावरा अलंकरण से सम्मानित किया। रात तक सुरों की बारिश श्रोता गोता लगाते रहे।
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दीप प्रज्ज्वलन रमन शंकर पंड्या, अमूल्य शर्मा  ने किया। इसके बाद वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा और अमिताभ भट्टाचार्य ने अभिनंदन पत्र और स्मृति चिह्न डॉ. राजेश्वर आचार्य को प्रदान किया । फिर परवान चढ़ी संगीत निशा। ठुमरी सम्राट पं. महादेव प्रसाद मिश्र के पुत्र पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने राग चारुकेशी से शुरुआत की। बंदिश के बोल थे- रे मन सीताराम सुमिरि ले..। इसके बाद राम मिश्र खमाज में बनारसी ठुमरी की बंदिश के बोल थे- हमसे ना बोले राजा...। फिर राग कौशिक में दूसरी ठुमरी-याद पिया की आए...की उन्होंने प्रस्तुति की। सांवरिया मन भायो रे.. के बाद बनारस की कजरी- हमके सावन में झुलनी गढ़ाय दा पिया...से उन्होंने विराम लिया। तबले पर नंदकिशोर मिश्र ने संगत की। संचालन राम कुमार पांडेय ने किया। अतिथियों का स्वागत किया ओमदत्त फाउंडेशन के अध्यक्ष श्याम कुमार पांडेय ने।
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