फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   King, a folk hero of negligence on both mist

राजा, जन नायक दोनों पर लापरवाही की धुंध

Thu, 26 May 2016 01:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 26 May 2016 01:22 AM IST
विज्ञापन
स्मार्ट सिटी मिशन के पहले राउंड की रैंकिंग से बाहर हो चुके बनारस के दिल में बदहाली के नासूर छिपाए ही नहीं गए, पाले भी जा रहे हैं। इसकी एक बानगी है बेनिया कुंड। चाहे सतरंगी फव्वारों का नजारा लेना हो या फिर झूमती हरियाली के बीच वक्त गुजारना। प्रकृति की खूबसूरती से मनुहार के लिए लोग कभी बेनिया कुंड का ही रुख करते थे, लेकिन अब वहां तसवीर बदल चुकी है। सूबे की समाजवादी सरकार के लिए इससे बड़ा अफसोसनाक क्या होगा कि लोहिया के बाद समाजवाद का रथ खींचने वाले लोकबंधु राजनारायण की प्रतिमा पर मालाफूल नहीं चढ़ता, बल्कि प्रेमी युगलों के जोड़े खर्राटे मारते हैं, तो नशेड़ी उड़ाते हैं धुएं के छल्ले।
विज्ञापन



विशाल पार्क और खेल मैदान में तब्दील हुए बेनिया अब चिनार के पेड़ गुजरे जमाने के चीज हो गए हैं। कभी चिनार के पेड़ों की हरियाली यहां खूबसूरती का मिसाल थी लेकिन वीडीए ने पचासों पेड़ कामर्शियल कॉम्पलेक्स बसाने के लिए कटवा दिए। परिणाम यह हुआ कि न तो कॉम्पलेक्स बसा न पेड़ बचे। शहर के बीच से हरियाली भी उजड़ गई और इस योजना पर करोड़ों रुपये स्वाहा हो गए अलग से। बेनिया में प्रवेश करने के लिए दो द्वार बनवाए गए हैं। एक प्रवेश द्वार राजनारायण पार्क के लिए नगर निगम ने बनवाया है, दूसरा कमिश्नरी का प्रवेश द्वार है। नगर निगम ने पार्क की देखरेख के लिए दो मालियों समेत पांच कर्मियों की तैनाती की है, जो वहां लगे पौधों को भी जिंदा नहीं रख पा रहे हैं। सीवर और मलबे से भरी झील के किनारे एक और पुराना पार्क है, जिसमें अंग्रेजों से पहली बार लोहा लेने वाले काशी नरेश चेतसिंह की प्रतिमा लगी है। इस प्रतिमा के चारों तरफ के पौधे सूख चुके हैं। सन्नाटे में पड़ी इस प्रतिमा के बारे में भी शहर के कुछ पुरनिए ही जानते होंगे, कि राजा चेतसिंह की प्रतिमा वहां लगी है, नई पीढ़ी को इससे अनभिज्ञ रखा गया है।
विज्ञापन



माली लालजी यादव बताते हैं कि शहर के जितने पॉकेटमार, हेरोइन का नशा करने वाले लोग हैं उनका बेनिया सबसे मुफीद अड्डा बन गया है। ऐसे लोगों से पार्क को बचाने के लिए वहां किसी को आने नहीं दिया जाता है। कमोवेश इससे भी गई-गुजरी दशा राजनारायण पार्क की है। वहां तो प्रेमी युगलों के जोड़े माली को आंखे दिखाकर प्रतिमा तक जाने के लिए बने मंच पर अड़ी लगाते हैं। फुर्सत से सिगरेट सुलगाई जाती है। पार्क में कभी सतरंगी फव्वारे चलते थे, लेकिन वह भी अब गुजरे जमाने की चीज हो चुका है। फव्वारा चलता ही नहीं। पार्क से अलग विशाल खेल मैदान की अपनी अलग पीड़ा है। वहां चुनावी दौर में नेताओं की जनसभाएं तो होती हैं लेकिन झाड़ू कभी नहीं लगता। खेल मैदान कमिश्नरी के हिस्से में है,इसलिए निगम के सफाई कर्मी वहां झांकने नहीं जाते।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed