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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर लोकार्पण: संकल्प से सिद्धि का संदेश, भविष्य के समीकरण साध गए पीएम मोदी

Mon, 13 Dec 2021 04:58 PM IST
उत्पल कांत शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी
शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 13 Dec 2021 04:58 PM IST
सार

काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारों में विरोधियों पर हमला किया। इतिहास की गर्त में समा चुके आतताइयों का भी जिक्र किया।

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Kashi Vishwanath corridor Varanasi PM Modi Inauguration  Message of sankalp se siddhi prime minister modi will fix future equations
Kashi Vishwanath corridor: पीएम मोदी वाराणसी पहुंचे - फोटो : twitter @BJP

विस्तार

काशी विश्वनाथ के लोकार्पण के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदुत्व के सांस्कृतिक सरोकारों पर अपनी सरकार के समर्पण और आस्था से संकल्पों को सिद्धि तक पहुंचाने का भी संदेश दिया।  प्रतीकों के सहारे राजनीतिक मुद्दों को परवान चढ़ाकर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के माहिर मोदी इस काम के जरिये भी भविष्य के समीकरण को साध गए। साथ ही सभी को एहसास कराने की कोशिश भी की कि कोई उनपर कितना भी कड़ा और बड़ा हमला करे लेकिन वे संस्कृति पर हुए आक्रमण से हुए बदलावों को बदलने के लिए कृत संकल्पित हैं।

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इस बहाने उनके निशाने पर गैर भाजपा सरकारों के चाल, चरित्र और चिंतन भी रहा। काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद अपने संबोधन में विरोधियों पर निशाना साधा। बिना किसी का नाम लिए कहा कि जब मैं बनारस आया तो एक विश्वास लेकर आया था। विश्वास अपने से ज्यादा बनारस के लोगों का था।
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तब कुछ लोग जो बनारस के लोगों पर संदेह करते थे। वह लोग कहते थे कि कैसे होगा? होगा ही नहीं। कहते थे कि यहां तो ऐसा ही चलता है। मोदी जैसे बहुत आकर चले गए। मुझे आश्चर्य होता था कि बनारस के लिए कैसे इस तरह की धारणाएं बना दी गई थीं। 
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काशी विश्वनाथ धाम लोकार्पण को भले ही कोई इसे भाजपा के सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ाने के अभियान का हिस्सा माने लेकिन देश की सांस्कृतिक राजधानी मानी जाने वाली काशी में तैयार विश्वनाथ धाम का कॉरिडोर कई संदेश छिपाए है।

संदेश... विध्वंस के खिलाफ निर्माण का, संहार के खिलाफ सृजन का। चूंकि शिव के भीतर एक साथ संहार और सृजन का तत्व एक साथ समाहित माना जाता है, तो जाहिर है कि इस  कॉरिडोर के लोकार्पण के सहारे किसी न किसी रूप में प्रधानमंत्री ने तुष्टीकरण की नीति पर प्रहार कर विरोधी राजनीतिक दलों की शक्ति कमजोर करने की भी कोशिश की। 
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पीएम मोदी ने गर्त में समा चुके आतताइयों का भी किया जिक्र

Kashi Vishwanath corridor Varanasi PM Modi Inauguration  Message of sankalp se siddhi prime minister modi will fix future equations
पीएम मोदी - फोटो : self
पीएम मोदी ने कहा कि मुझे पता था कि ये जड़ता बनारस की नहीं थी। हो भी नहीं सकती थी। इसमें थोड़ा बहुत राजनीति और थोड़ा निजी स्वार्थ था। बनारस पर आरोप लगाए जा रहे थे लेकिन काशी तो काशी है। काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है, जिनके हाथों में डमरू है। यहां महादेव की सरकार है।  पीएम मोदी ने इस दौरान केन्द्र तथा राज्य सरकारों के काम के साथ ही साथ इतिहास की गर्त में समा चुके आतताइयों का भी जिक्र किया।

पीएम मोदी ने कहा कि आतातायियों ने इस नगरी पर आक्रमण किए, इसे ध्वस्त करने के प्रयास किए। औरंगजेब के अत्याचार, उसके आतंक का इतिहास साक्षी है। जिसने सभ्यता को तलवार के बल पर बदलने की कोशिश की। लेकिन इस देश की मिट्टी बाकी दुनिया से कुछ अलग है।

यहां अगर औरंगजेब आता है तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं। अगर कोई सालार मसूद इधर बढ़ता है तो राजा सुहेलदेव जैसे वीर योद्धा उसे हमारी एकता की ताकत का अहसास करा देते हैं। अंग्रेजों के दौर में भी, हेस्टिंग का क्या हश्र काशी के लोगों ने किया था, ये तो काशी के लोग जानते ही हैं।
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सोमनाथ से विश्वनाथ तक

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काशी विश्वनाथ धाम। - फोटो : अमर उजाला।
दरअसल, काशी का इतिहास भारतीय  संस्कृति के समृद्धि की जानकारी देने वाला इतिहास है। यह 11वीं शताब्दी से 17वीं शताब्दी के बीच भारतीय संस्कृति के प्रतीक चिह्नों के विध्वंस और पुनर्निर्माण के संघर्ष की कहानी है। मान्यता के अनुसार, खुद भगवान शिव के मां पार्वती के साथ पृथ्वी पर सर्वप्रथम यहीं प्रकट हुए थे।

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इसी कारण इसे द्वादश ज्योतिर्लिंगों में आदि यानी प्रथम शिवलिंग का महत्व दिया गया है। आदि शंकराचार्य, अहिल्याबाई होल्कर, संत रविदास, संत कबीर, भगवान बुद्ध के कृतित्व व व्यक्तित्व से प्रेरित काशी प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में कहे तो सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास के जीवंत प्रमाण है। इसमें यदि सोमनाथ के विध्वंस और उसके पुनर्निर्माण के साथ काशी विश्वनाथ के विध्वंस और पुर्निर्माण की गाथा जोड़ दी जाए तो अपने आप पूरे देश में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का संदेश चला जाता है ।
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