{"_id":"5b58bd3b4f1c1bb24b8b509c","slug":"kashi-vishwanath-corridor-is-making-for-money-not-for-religion","type":"story","status":"publish","title_hn":"'धर्म के लिए नहीं धन के लिए तैयार हो रहा श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'धर्म के लिए नहीं धन के लिए तैयार हो रहा श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 25 Jul 2018 11:41 PM IST
विज्ञापन
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण धर्म के लिए नहीं धन के लिए किया जा रहा है। श्रीकाशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद का अध्यादेश कहने के लिए धर्म के विकास और उन्नयन के लिए है किंतु वास्तव में यह उद्योग और पूंजीवाद के विकास के लिए तैयार किया गया है।
जिन 15 मोहल्लों को इसमें समाहित किया गया है उन में मठ-मंदिरों को कहीं भी स्थान नहीं दिया गया है। यह बातें श्रीविद्या मठ के प्रभारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार को श्रीविद्यामठ में प्रेसवार्ता के दौरान कही।
कहा कि अध्यादेश में पूजा स्थल को भवन मानकर मठ और मंदिरों के ध्वस्तीकरण को वैध ठहराने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि काशी अनादि काल से तीर्थ स्थल रहा है लेकिन अध्यादेश में इसे पर्यटन हेतु विकसित करने की बात कही जा रही है।
विज्ञापन
क्या काशी को तीर्थ के रूप में विकसित न कर एक उद्योग के रूप में विकसित किया जा रहा है। परिषद विशिष्ट क्षेत्र में कोई भी व्यापार या व्यवसाय कर सकती है। परिषद जिन्हें उचित समझेगी उसे टैक्स में छूट दे सकती है। परिषद जिस भवन को चाहे उसे अध्यादेश से छूट दे सकती है।
परिषद के आदेशों का उल्लंघन करने पर दंड की व्यवस्था है। किंतु परिषद के अधिकारियों द्वारा उल्लंघन किये जाने पर कोई दंड की व्यवस्था नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण परिषद में धर्म अथवा दर्शनशास्त्र के विशेषज्ञों को कोई स्थान नहीं दिया गया है जबकि प्रकरण धर्म स्थान का है।
ये किस प्रकार का अध्यादेश है, जो एक पक्षीय दंड की व्यवस्था करता है और तीर्थ, मठ, मंदिर को कोई स्थान नहीं दिया जाता है।
विज्ञापन
जिन 15 मोहल्लों को इसमें समाहित किया गया है उन में मठ-मंदिरों को कहीं भी स्थान नहीं दिया गया है। यह बातें श्रीविद्या मठ के प्रभारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार को श्रीविद्यामठ में प्रेसवार्ता के दौरान कही।
विज्ञापन
कहा कि अध्यादेश में पूजा स्थल को भवन मानकर मठ और मंदिरों के ध्वस्तीकरण को वैध ठहराने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि काशी अनादि काल से तीर्थ स्थल रहा है लेकिन अध्यादेश में इसे पर्यटन हेतु विकसित करने की बात कही जा रही है।
विज्ञापन
क्या काशी को तीर्थ के रूप में विकसित न कर एक उद्योग के रूप में विकसित किया जा रहा है। परिषद विशिष्ट क्षेत्र में कोई भी व्यापार या व्यवसाय कर सकती है। परिषद जिन्हें उचित समझेगी उसे टैक्स में छूट दे सकती है। परिषद जिस भवन को चाहे उसे अध्यादेश से छूट दे सकती है।
परिषद के आदेशों का उल्लंघन करने पर दंड की व्यवस्था है। किंतु परिषद के अधिकारियों द्वारा उल्लंघन किये जाने पर कोई दंड की व्यवस्था नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण परिषद में धर्म अथवा दर्शनशास्त्र के विशेषज्ञों को कोई स्थान नहीं दिया गया है जबकि प्रकरण धर्म स्थान का है।
ये किस प्रकार का अध्यादेश है, जो एक पक्षीय दंड की व्यवस्था करता है और तीर्थ, मठ, मंदिर को कोई स्थान नहीं दिया जाता है।