फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Kashi Vishwanath corridor construction debris dumped in Ganga varanasi

वाराणसी : गंगा में डाला जा रहा काशी विश्वनाथ धाम का मलबा, गंगाजल से उठ रही बदबू, प्रवाह बाधित

Mon, 05 Jul 2021 12:32 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 05 Jul 2021 12:32 AM IST
सार

काशी विश्वनाथ धाम में चल रही तोड़फोड़ और निर्माण के बाद निकले मलबे को गंगा में ही निस्तारित किया जा रहा है। गंदगी जमा होने से गंगाजल से बदबू आ रही है।

विज्ञापन
Kashi Vishwanath corridor construction debris dumped in Ganga varanasi
गंगा में जमा हुआ मलबा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण गंगधार से बाबा दरबार को एकाकार करने के लिए किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ धाम से निकलने वाले मलबे को ललिता घाट के आगे गंगा में ही डालकर छोड़ दिया गया है। इसके कारण घाट पर गंगा के पानी से बदबू उठने लगी है, वहीं पानी में गंदगी भी जमा हो चुकी है। इसके कारण वहां एक मिनट ठहरना भी अब मुश्किल हो चुका है।

विज्ञापन


मीरघाट से जैसे ही ललिता घाट की तरफ आगे बढ़ते हैं तो घाट किनारे मलबे का ढेर लगा हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि काशी विश्वनाथ धाम में चल रहे तोड़फोड़ और निर्माण के बाद निकले मलबे को गंगा में ही निस्तारित किया जा रहा है। मीरघाट और ललिताघाट के पहले गंगा में ही मलबे का ढेर जमा हो चुका है। उसके आगे ललिता घाट पर बन रहे रैंप से सटे मलबे और गंदगी का ढेर जमा हो चुका है। इसके कारण यहां पर गंगा का प्रवाह बाधित हो रहा है।
विज्ञापन


अब जैसे-जैसे गंगा का जलस्तर बढ़ता जाएगा मलबा धीरे-धीरे गंगा की तलहटी में समाहित होता जाएगा। मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि गंगा में मलबा डालने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो उसको हटवाया जाएगा। वहां पर निर्माण कार्य चल रहा है हो सकता है सिल्टिंग के दौरान मिट्टी जमा हो गई हो।

विज्ञापन
विज्ञापन

शैवाल ने बढ़ाई समस्या 
कुछ दिनों पहले गंगा में हरे शैवाल के कारण अस्सी से ललिता घाट के बीच कई जगहों पर गंगाजल का रंग हरा हो गया था। इस मामले की जब जांच कराई गई तो जिला प्रशासन ने बताया था कि मिर्जापुर से एसटीपी से बहकर यह शैवाल आए हैं। वहीं आईआईटी बीएचयू के नदी विज्ञानी प्रो. यूके चौधरी ने प्रशासन की रिपोर्ट को खारिज करते हुए पीएम और सीएम को पत्र लिखकर कहा था कि यह शैवाल एसटीपी से नहीं ललिता घाट पर गंगा की धारा को रोकने के कारण गंगा में पैदा हुए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed