Kashi Vishwanath: आज और शुक्रवार को खुलेंगी विश्वनाथ धाम की 56 हुंडियां, मुमुक्षु भवन की महिलाएं गिनेंगी
Varanasi News: बाबा विश्वनाथ धाम में स्थापित 56 हुंडियों को मंगलवार और शुक्रवार को सार्वजनिक रूप से खोला जाएगा। दान राशि की गिनती सीसीटीवी निगरानी में मुमुक्षु भवन की वरिष्ठ महिलाओं, सेवानिवृत्त क्लास-वन अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में होगी। दान में मिले सोना-चांदी का मूल्यांकन कर उसे ट्रेजरी में जमा कराया जाता है।
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Kashi Vishwanath Temple: वाराणसी में बाबा विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं द्वारा किए जाने वाले दान की प्रक्रिया को लेकर मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में स्थापित 56 हुंडियों को सप्ताह में दो दिन, मंगलवार और शुक्रवार को सार्वजनिक रूप से खोला जाता है। कोई भी व्यक्ति इस पूरी प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देख सकता है, जिससे दान व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहती है।
मंडलायुक्त ने बताया कि श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में दान देने के तीन प्रमुख माध्यम हैं। श्रद्धालु डिजिटल माध्यम से, मंदिर कार्यालय में सीधे पहुंचकर अथवा हुंडियों के माध्यम से दान कर सकते हैं। मंदिर प्रशासन सभी माध्यमों से प्राप्त दान का व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से लेखा-जोखा रखता है।
हुंडियों से प्राप्त नकदी की गिनती निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाती है। नोटों और सिक्कों की अलग-अलग गिनती होती है। इस दौरान एक राजपत्रित अधिकारी, बैंक कर्मी और अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौजूद रहते हैं। पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में संपन्न कराई जाती है ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।
गिनती के कार्य में मुमुक्षु भवन की 20 से 25 वरिष्ठ महिलाएं तथा सेवानिवृत्त क्लास-वन अधिकारी स्वयंसेवक के रूप में सहयोग करते हैं। बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में नोटों और सिक्कों की संख्या का विवरण रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। इसके बाद धनराशि को बैंक खाते में जमा कराया जाता है और बैंक स्टेटमेंट से मिलान कर प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाता है।
मंडलायुक्त ने बताया कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने, चांदी और अन्य बहुमूल्य धातुओं को अलग से सुरक्षित रखा जाता है। विशेषज्ञों की मदद से उनकी शुद्धता और मूल्य का आकलन किया जाता है। इसके बाद उन्हें ट्रेजरी में जमा कर संबंधित अभिलेखों में दर्ज किया जाता है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल दान के लिए मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर क्यूआर कोड की सुविधा उपलब्ध है। श्रद्धालु मंदिर कार्यालय में जाकर भी दान कर सकते हैं, जहां उन्हें विधिवत रसीद प्रदान की जाती है। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य दान प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और भरोसेमंद बनाए रखना है।