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खुल सकती हैं पुरानी नियुक्तियों की फाइलें
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वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में पुरानी नियुक्तियों की फाइलें खुल सकती हैं। राजभवन में क्रीमीलेयर वालों को एससी और ओबीसी में नियुक्ति की शिकायत पहुंच चुकी है। संभावना है कि इस मामले में भी जांच का आदेश जल्द जारी हो सकता है। फिलहाल विश्वविद्यालय सीआईडी जांच के लिए टीम का इंतजार कर रहा है।
नियुक्ति निरस्त होने के बाद तीनों शिक्षकों को भी विश्वविद्यालय की ओर से पत्र जारी करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। काशी विद्यापीठ में 2017 की तीन नियुक्तियों को निरस्त करने के बाद पुरानी नियुक्तियों की जांच शुरू होने की संभावनाएं भी नजर आ रही है। विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों से इस मामले में कई शिकायतें भेजी जा चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि राजभवन में उक्त शिकायतों को भी काफी गंभीरता से लिया है। ऐसे में पूर्व कुलपति डॉ. पी. नाग के अलावा डॉ. अवधराम के समय में भी हुई नियुक्तियों की जांच शुरू हो सकती है। बता दें कि शासन की ओर से चल रही जांच में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में जांच टीम को कई गड़बड़ियां मिली हैं। नियमों को ताक पर रखकर क्रीमीलेयर वालों को एससी और ओबीसी संवर्ग में नियुक्ति दे दी गई है। पदों के समायोजन में भी खेल हुआ है। 2010-11 में भी सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी को ओबीसी संवर्ग में नियुक्त करने का मामला सामने आया था। बाद में मामला कोर्ट में पहुंचा और नियुक्ति रद्द कर दी गई। बाद में उसी अभ्यर्थी को सामान्य संवर्ग में नियुक्त किया गया। समिति को जांच के दौरान अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया में कई तरह की गड़बड़ी मिली है। अब देखना है कि शासन मामले में क्या कार्रवाई करता है।
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नियुक्ति निरस्त होने के बाद तीनों शिक्षकों को भी विश्वविद्यालय की ओर से पत्र जारी करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। काशी विद्यापीठ में 2017 की तीन नियुक्तियों को निरस्त करने के बाद पुरानी नियुक्तियों की जांच शुरू होने की संभावनाएं भी नजर आ रही है। विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों से इस मामले में कई शिकायतें भेजी जा चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि राजभवन में उक्त शिकायतों को भी काफी गंभीरता से लिया है। ऐसे में पूर्व कुलपति डॉ. पी. नाग के अलावा डॉ. अवधराम के समय में भी हुई नियुक्तियों की जांच शुरू हो सकती है। बता दें कि शासन की ओर से चल रही जांच में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में जांच टीम को कई गड़बड़ियां मिली हैं। नियमों को ताक पर रखकर क्रीमीलेयर वालों को एससी और ओबीसी संवर्ग में नियुक्ति दे दी गई है। पदों के समायोजन में भी खेल हुआ है। 2010-11 में भी सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी को ओबीसी संवर्ग में नियुक्त करने का मामला सामने आया था। बाद में मामला कोर्ट में पहुंचा और नियुक्ति रद्द कर दी गई। बाद में उसी अभ्यर्थी को सामान्य संवर्ग में नियुक्त किया गया। समिति को जांच के दौरान अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया में कई तरह की गड़बड़ी मिली है। अब देखना है कि शासन मामले में क्या कार्रवाई करता है।
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