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स्नातक में जो विषय था ही नहीं, उसी विषय के बन गए प्रोफेसर
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वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शिक्षकों की नियुक्ति व प्रमाण पत्रों की जांच में गड़बड़ियों की शृंखला लंबी है। कई अभ्यर्थी ऐसे हैं कि वह जिस विभाग में प्रोफेसर नियुक्त हैं, वह विषय स्नातक स्तर पर उन्होंने अध्ययन ही नहीं किया है। काशी विद्यापीठ के 101 शिक्षकों की जांच में गड़बड़ियों की संख्या आधा दर्जन से अधिक हैं। कहीं मानकों को दरकिनार कर नौकरी दी गई है तो कहीं चहेतों को नियुक्त करने में बेहतर उम्मीद्वारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
2017 में सामान्य संवर्ग में सहायक आचार्य के पदों पर विज्ञापन आमंत्रित किए गए। इंटरव्यू के लिए ऐसे अभ्यर्थियों को साक्षात्कार पत्र जारी कर दिया गया, जो उस पद के लिए शैक्षिक योग्यता भी नहीं रखते थे। स्नातक में कुछ और विषय था, लेकिन परास्नातक में विशेष शाखा से डिग्री हासिल कर ली। आयोग, यूजीसी और विश्वविद्यालय के नियमानुसार जिस विभाग में प्रोफेसर की नियुक्ति की जानी है। स्नातक और परास्नातक स्तर पर वह विषय अवश्य होना चाहिए। बावजूद इसके चयन समिति ने यूजीसी के मानकों को ताक पर रखकर अपने चहेते अभ्यर्थी को साक्षात्कार पत्र जारी कर दिया और चयन समिति की संस्तुति पर उसको नियुक्ति भी दे दी गई। इस मामले की शिकायत जब विश्वविद्यालय प्रशासन से की गई तो शिकायतकर्ता को मानसिक स्तर पर कई तरह से प्रताड़ित किया गया। यह केवल एक ही मामला नहीं है, ऐसे कई मामले हैं, जहां चयन समिति की संस्तुति पर चयन किया गया और साक्षात्कार पत्र जारी किए गए हैं।
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2017 में सामान्य संवर्ग में सहायक आचार्य के पदों पर विज्ञापन आमंत्रित किए गए। इंटरव्यू के लिए ऐसे अभ्यर्थियों को साक्षात्कार पत्र जारी कर दिया गया, जो उस पद के लिए शैक्षिक योग्यता भी नहीं रखते थे। स्नातक में कुछ और विषय था, लेकिन परास्नातक में विशेष शाखा से डिग्री हासिल कर ली। आयोग, यूजीसी और विश्वविद्यालय के नियमानुसार जिस विभाग में प्रोफेसर की नियुक्ति की जानी है। स्नातक और परास्नातक स्तर पर वह विषय अवश्य होना चाहिए। बावजूद इसके चयन समिति ने यूजीसी के मानकों को ताक पर रखकर अपने चहेते अभ्यर्थी को साक्षात्कार पत्र जारी कर दिया और चयन समिति की संस्तुति पर उसको नियुक्ति भी दे दी गई। इस मामले की शिकायत जब विश्वविद्यालय प्रशासन से की गई तो शिकायतकर्ता को मानसिक स्तर पर कई तरह से प्रताड़ित किया गया। यह केवल एक ही मामला नहीं है, ऐसे कई मामले हैं, जहां चयन समिति की संस्तुति पर चयन किया गया और साक्षात्कार पत्र जारी किए गए हैं।
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