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काशी में कम आए अतिथि
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वाराणसी। विश्व में काशी की बेहतर ब्रांडिंग के बावजूद विदेशी सैलानियों की संख्या में गिरावट आई है। इसका कारण विभिन्न पर्यटन क्षेत्रों से काशी की अच्छी कनेक्टिविटी (परिवहन साधन) न होना बताया जा रहा है। इसके चलते पर्यटन क्षेत्र की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां अपने पैकेज में काशी को शामिल करने से गुरेज कर रही हैं। सैलानियों की मांग पर ही बनारस की यात्रा कराई जा रही है। हालांकि देशी सैलानियों की संख्या में उछाल आया है। जानकारों की मानें तो कुछ जरूरी कदम उठाकर काफी हद तक इस समस्या में कमी लाई जा सकती है।
पर्यटन काशी की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2015 में 35,347 विदेशी पर्यटक काशी आए। 2018 में यह संख्या 34,125 ही रह गई। 2019 में भी लगभग यही हाल रहा। जून 2018 में दस हजार से ज्यादा विदेशी सैलानी आए तो 2019 में यह संख्या आठ हजार के आसपास ही रह गई। क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, विदेशी सैलानियों की संख्या में आ रही है गिरावट का कारण बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। साथ ही अन्य राज्यों, प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ ही पड़ोसी देशों से बेहतर कनेक्टिविटी नहीं है। होटल महंगे होना भी एक बड़ी वजह है। टूर ऑपरेटर शैलेंद्र सिंह ने बताया कि बड़ी टूर कंपनियां अपने पैकेज में काशी को कम शामिल कर रही हैं। आगरा के अलावा राजस्थान के शहरों से बेहतर रेल, हवाई संपर्क न होना भी इसकी वजह है।
खजुराहो की फ्लाइट बंद होने का बड़ा असर पड़ा। नेपाल की भी काशी से अच्छी एयर कनेक्टिविटी नहीं है। -राहुल मेहता, अध्यक्ष, टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन
विदेशी सैलानियों की आवक काफी कम हो गई है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन उद्योग के लिए यह मंदी का दौर है। -रोनाल्ड बेंजामिन नाडर, टूर ऑपरेटर
समस्या से उबरने के लिए यह सुझाए उपाय
विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयासों पर मंथन शुरू हो गया है। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग वंदे भारत एक्सप्रेस के टूंडला में ठहराव की मांग पिछले कई महीने से कर रहे हैं। इसके लिए रेलमंत्री सहित कई जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा गया है। आगरा से आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए यह मांग की जा रही है। उनका यह भी कहना है कि होटलों की बुकिंग पर प्रशासन का नियंत्रण हो और दरें कम की जाएं। उनका कहना है कि बैंकाक के होटलों के रेट काशी के होटलों से कम है।
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यह भी उठाएं कदम
- खजुराहो और नेपाल के लिए सीधी फ्लाइट हो।
- आगरा व राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से रेल कनेक्टिविटी मजबूत करें।
- जाम की समस्या से निजात के साथ ही यातायात टूरिस्ट फ्रैंडली बनाएं।
- हवाई जहाज से सामान ले जाने की लिमिट बढ़ाई जाए।
कोट्स-
वार्षिक आंकड़ों के अनुसार विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी नहीं आई है। ज्यादा से ज्यादा सैलानी काशी दर्शन करें इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। -कीर्तिमान श्रीवास्तव, पर्यटन अधिकारी
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पर्यटन काशी की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2015 में 35,347 विदेशी पर्यटक काशी आए। 2018 में यह संख्या 34,125 ही रह गई। 2019 में भी लगभग यही हाल रहा। जून 2018 में दस हजार से ज्यादा विदेशी सैलानी आए तो 2019 में यह संख्या आठ हजार के आसपास ही रह गई। क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, विदेशी सैलानियों की संख्या में आ रही है गिरावट का कारण बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। साथ ही अन्य राज्यों, प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ ही पड़ोसी देशों से बेहतर कनेक्टिविटी नहीं है। होटल महंगे होना भी एक बड़ी वजह है। टूर ऑपरेटर शैलेंद्र सिंह ने बताया कि बड़ी टूर कंपनियां अपने पैकेज में काशी को कम शामिल कर रही हैं। आगरा के अलावा राजस्थान के शहरों से बेहतर रेल, हवाई संपर्क न होना भी इसकी वजह है।
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खजुराहो की फ्लाइट बंद होने का बड़ा असर पड़ा। नेपाल की भी काशी से अच्छी एयर कनेक्टिविटी नहीं है। -राहुल मेहता, अध्यक्ष, टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन
विदेशी सैलानियों की आवक काफी कम हो गई है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन उद्योग के लिए यह मंदी का दौर है। -रोनाल्ड बेंजामिन नाडर, टूर ऑपरेटर
समस्या से उबरने के लिए यह सुझाए उपाय
विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयासों पर मंथन शुरू हो गया है। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग वंदे भारत एक्सप्रेस के टूंडला में ठहराव की मांग पिछले कई महीने से कर रहे हैं। इसके लिए रेलमंत्री सहित कई जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा गया है। आगरा से आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए यह मांग की जा रही है। उनका यह भी कहना है कि होटलों की बुकिंग पर प्रशासन का नियंत्रण हो और दरें कम की जाएं। उनका कहना है कि बैंकाक के होटलों के रेट काशी के होटलों से कम है।
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यह भी उठाएं कदम
- खजुराहो और नेपाल के लिए सीधी फ्लाइट हो।
- आगरा व राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से रेल कनेक्टिविटी मजबूत करें।
- जाम की समस्या से निजात के साथ ही यातायात टूरिस्ट फ्रैंडली बनाएं।
- हवाई जहाज से सामान ले जाने की लिमिट बढ़ाई जाए।
कोट्स-
वार्षिक आंकड़ों के अनुसार विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी नहीं आई है। ज्यादा से ज्यादा सैलानी काशी दर्शन करें इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। -कीर्तिमान श्रीवास्तव, पर्यटन अधिकारी