मसान की होली: बिना किसी कारण नहीं जाना चाहिए श्मशान, विद्वानों ने गृहस्थों से किया ये खास अनुरोध
Masan Ki Holi 2025: काशी के विद्वानों ने मसान की होली को बंद करने और गृहस्थों को दूर रहने का अनुरोध किया। कहा कि शास्त्रों में कहीं नहीं लिखा है कि चिताभस्म की होली आमजनों के लिए है।
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काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि श्मशान में बिना किसी कारण के नहीं जाना चाहिए। मसान की होली अशास्त्रीय एवं धर्म मर्यादा का उल्लंघन है, इसे बंद कर देना चाहिए। वह बुधवार को अस्सी घाट पर विश्व वैदिक सनातन न्यास की ओर से अस्सी घाट पर काशी तीर्थ धर्म की शास्त्रीय मर्यादा की रक्षा के लिए अशास्त्रीय इवेंट मसान की होली के मामले में विद्वतजनों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं विश्वनाथ मंदिर के व्यवस्थापक डॉ. विनय पांडेय ने शास्त्र प्रमाणों का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां मृत शरीरों का अंतिम संस्कार होता है, वहां रहना नहीं चाहिए। जो व्यक्ति श्मशान में अधिक समय बिताता है, वह पाप के प्रभाव में आ जाता है। हमारे शास्त्रों में कहीं नहीं लिखा गया है कि चिताभस्म की होली आमजनों के लिए है। यह धर्म का उल्लंघन है एवं एक इवेंट बन चुका है। इसे पूर्ण रूप से बंद कर देना चाहिए।
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व सदस्य प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय ने कहा कि आज के युवाजन रील और वीडियो के कारण इस तरह के घटना को परंपरा मान कर चल रहे हैं। इससे बचना चाहिए। विश्व वैदिक सनातन न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सिंह ने कहा श्मशान में अनावश्यक रूप से जाना वर्जित है। विशेष रूप से सनातन धर्म में आस्था रखने वाले, गर्भवती, महिलाओं और बच्चों के लिए। यदि आवश्यक हो तब वहां से लौटने के बाद स्नान और शुद्धिकरण करना आवश्यक बताया गया है।
कुछ वर्षों से काशी की पवित्रता शुचिता और महिमा को धूल धूसरित कर मसाने की होली के नाम पर कुछ मतिमूढ़ लोगों द्वारा युवाओं को इकट्ठा कर नशे में मदमस्त कर हुड़दंग मचाना उचित एवं धर्मसम्मत नहीं है। इसे तत्काल बंद कर देना चाहिए।
सनातन दल रक्षक के प्रमुख अजय शर्मा जी ने कहा कि 12 साल पहले से यह धर्म के नाम पर अधर्म हो रहा है। पवित्र काशीतीर्थ श्मशान भूमि पर शोर शराबा, नशेड़ी हुड़दंगियों का हुड़दंग और डीजे बजाकर शवों की भस्म से मसाने की होली खेलना बंद करें।
इस दौरान विश्व हिंदू परिषद के कन्हैया सिंह, वैदिक ब्राह्मण सभा से विनय पांडेय(महादेव), केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के पंडित कमल तिवारी, राजेश्वर शुक्ला, के के सबरवाल, अनिल मिश्रा, पंकज अग्रवाल, परितोष सिंह,सत्यम पांडेय मौजूद रहे।